बुधवार, 11 सितंबर 2013

soch

सकारात्मक सोच घोर अँधेरे में भी
 रोशनी  की किरण ढूंढ लेती है 
नकारात्मक सोच रोशनी में भी
 साफ़ साफ नहीं देख पाती है 

KUNVARE SO KE

kunvare so ke
एक दिन रमलू को एक अनजान फोन नंबर से फोन आया --फोन पै एक छोरी बोली हैलो थाम कुंवारे सो के ? 
रमलू बोल्या --हाँ कुंवारा सूँ फेर थाम कौन बोलो सो ? 
जवाब आया -- मैं था री घराली प्रेमो बोलूं सूँ ,आ घर नै फेर बताऊँगी | 
थोड़ी सी वार मैं फेर फोन आया अर एक छोरी बोली --थाम शादी शुदा सो ? 
रमलू बोल्या --हाँ फेर थाम कौन बोलो सो ? 
लड़की -- मैं थारी गर्ल फ्रैंड ! धोखेबाज !!! 
रमलू--सॉरी डार्लिंग मनै सोच्या मेरी घराली प्रेमो है | 
लड़की-- प्रेमो ए सूँ| घरा आ एक बॅ फेर बताऊँगी |

RAMLOO

रमलू -पहलम मैं अपनी बीवी नै बीए करवाऊँगा 
फेर एम ए और पीएचडी और फिर अच्छी सी नौकरी दिवाऊंगा 
कमलू बोल्या - अर फेर आच्छा सा रिश्ता देखकै उसका ब्याह भी करवा दिए ।