रविवार, 4 अगस्त 2019

रमलू का बाबू-- रमलू तेरे ताहिं फूल तोड़कै ल्याण ताहिं कहया था अर तूँ पूरी डाहली तोड़ ल्याया फूल की गेल्याँ।
रमलू-- बाबू, उड़ै लिख राख्या था अक फूल तोड़णा मना सै, इस करकै मैं डाहली ए तोड़ ल्याया।

एक बार रमलू पूरा पट्टियों मैं लिपटया पड़या था।
कमलू-- के हुया रमलू? यो के हाल बना राख्या सै?
रमलू- के बताऊँ कमलू! मैं बीस लोगों नै मिलकै नै पीटया।
कमलू- फेर तनै के करया?
रमलू-- करना के था मनै भी कहया-- हिम्मत सै तो एक एक करकै आओ।
कमलू-- फेर
रमलू-- फेर के , फेर बीसों नै एक एक करकै मेरी पींघ सी बधा दी।

माँ नै रमलू तैं कहया-- बेटा लैंप जला दे।
कुछ देर पाछै माँ नै फेर बुझ्या-- बेटा लैंप जला दिया?
रमलू बोल्या-- हां माँ! वो तो जब आपणै कहया था, जिबै चूल्हे मैं गेर दिया था, इब ताहिं तो पूरा जल लिया होगा ।

एक आदमी नै सात एक साल के रमलू तैं बुझ्या-- तेरे बाल असल मैं बहोत सूंदर सैं।ये किसतै मिले- बाबू से अक माँ से।
रमलू-- जित ताहिं मेरी समझ मैं आवै सै- मेरे बाबू तैं , क्योंकि उसके ए सिर के सारे बाल गायब सैं।