गुरुवार, 6 अक्टूबर 2022

कुछ जानकारियां

         **कुछ जानकारी**

जनवरी 2022 में ऑक्सफैम इंडिया ने 'इनिक्वालिटी किल्स'शीर्षक से जो रिपोर्ट प्रकाशित की, उसने यह हैरतअंगेज  उद्घाटन किया कि महामारी के दौरान ( मार्च 2020 से नवंबर 2021) के बीच जहां देश के 84% परिवारों की आमदनी में गिरावट आई वहीं बिलियनेयरज (खरबपतियों) की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई और उनकी कुल संपत्ति 23.14  लाख करोड़ से बढ़कर 53.16 लाख करोड तक जा पहुंची। 'सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी' के अध्ययन के अनुसार, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों ने 2021 के अप्रैल महीने से 2022 के मार्च महीने तक सम्मिलित रूप से 9.3 लाख करोड का मुनाफा कमाया। यह उसे पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 70 फीसद से भी ज्यादा है और महामारी से पहले के एक पूरे दशक (2010-11 से 2019 तक) के सालाना औसत मुनाफे से
3 गुना अधिक।  महामारी के पहले वर्ष यानी 2020 -21 में भी यह मुनाफा  ठीक पिछले साल के मुकाबले दोगुना था। महामारी के दूसरे वर्ष में तो एक नया रिकॉर्ड कायम हो गया।
      2014 -15 से 2020-21 के बीच इस सरकार ने टैक्स इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन) के नाम पर कारपोरेट करदाताओं को 6.15 लाख करोड़ की छूट दी और बैंकों ने 10 लाख 72 हजार करोड़ के कर्जों को बट्टा खाते में डाल कर एक नई मिसाल कायम की । 2019 में मोदी सरकार ने कारपोरेट टैक्स दर  को 30 फीसद से घटाकर 22 फीसद कर दिया। इससे कारपोरेट क्षेत्र को 1.45 लाख करोड का तोहफा मिला । सरकार का तर्क था कि इससे निवेश बढ़ेगा, निवेश बढ़ने से रोजगार मिलेंगे और कुल मांग बढ़ेगी ; यानी अर्थव्यवस्था को आगे की ओर धक्का मिलेगा । ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बेरोजगारी में कोई फर्क नहीं पड़ा और निवेश भी जैसा था वैसा  ही रहा यानी कुल मिलाकर, पूंजीपतियों की जेबें भर गई और देश के आमजन की बदहाली बरकरार रही।
        सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में हरियाणा राज्य की बेरोजगारी दर 37.3% है, जो राष्ट्रीय औसत (8.3%) से लगभग चार गुना है।
एनसीआरबी 2021
--1144 हत्याएं,
राज्य में हर दिन 3-4 लोगों की मौत
2021 में दहेज हत्या के 275 मामले, देश में सबसे ज्यादा दर
नाबालिग लड़कियों की खरीद के 992 मामले 2021 में दर्ज हुए
महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 16658 मामले, 2020 से 28.1% की वृद्धि
एक तरफ जहां हरियाणा 37.3 फीसदी की बेरोजगारी दर का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों में 1.82 लाख पद खाली हैं।
टैगोर--" संस्कृति खूबसूरत व्यवहार है"
बंधुतव, मानवता , स्वतंत्रता, समानता वैज्ञानिक सोच संवैधानिक मूल्य हैं। बाबा अम्बेडकर की देन हैं
संस्कृति दो तरह की हो सकती है
भौतिक संस्कृति
और बौद्धिक संस्कृति
अपराध बीमार समाज का प्रतीक है
हरियाणा बना तब 82 प्रतिशत लोग गांव में रहते थे ।18% शहर में ।
विलेज इकोनामी रही है बहुत पहले के  हरियाणा में
"सब्र का फल मीठा"
"उतने पैर पसारिये  जितनी चादर तोर"
बेल की खेती-- गाय --दूध
"काम प्यारा है चाम प्यारा नहीं है" काम सर्वोत्तम था, श्रम का महत्व था।
"सबर का धन सबसे बड़ा धन "अभाव को डील करने का साधन ।
"करकै खा लिया, लेकर दे दिया " मुफ्तखोरे नहीं हैं।
"पहले मारै सो जीतै"
" दाबा करै खराबा " दबाव नहीं मानते थे. मुहावरे ,लोकगीत और खंगालने की जरूरत है हरियाणा की संस्कृति  जानने समझने  के लिए। (असमानता घटाना उस वक्त के विकास का उद्देश्य था)
1990 के बाद असमानताएं बढ़ाना विकास का उद्देश्य हो गया।
तब से उपभोक्ता संस्कृति की मुख्य भूमि बननी शुरू होती है ।
संस्कृति के नाम पर मैदान खाली हो जाता है पुरानी आउटडेटेड हो गई
पीछे रह गया हरियाणा

क आगे बढ़ता हरियाणा
एक मस्त हरियाणा
एक बेलगाम हरियाणा समाज से कटा हुआ है और सरकार से मिला हुआ है
-आगे बढ़ता हरियाणा शहरी क्षेत्रों में है तेज गति से शहरीकरण की बात चल रही है
-अब ज्यादा विवेकशील है शहरी हरियाणा
मस्त हरियाणा मतलब लाचार हरियाणा
कृषि क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार किया गया मझोले बड़े किसान शहरों में आ गए
छोटे किसान गांव में रह गए
कृषक समाज एक तनाव की स्थिति से गुजर रहा है इसलिए यह है लाचार हरियाणा
उड़ता हरियाणा
चिटॉ, दारू व मोबाइल का नशा युवाओं पर भारी है । मां-बाप के पास कोई वकत नहीं है। पहले जैसे बच्चों को सुलाने के लिए अफीम देते थे आज मोबाइल बच्चों के हाथ में दे दिए गए हैं। युवा वर्ग अपनी भाषा ही खो चुका है । जिसके पास कुछ नहीं है वह नशा कर लेता है। खेत में सामानों की चोरी हो रही है इसके लिए ऑनलाइन संवाद स्थाई संवाद नहीं ।
वन टू वन संवाद  बहुत कम रह गया है। जातिवाद और बढ़ा है खत्म होने की बजाय राजनीति का जातिकरण हुआ है।
जाति और सांप्रदायिकता ने मिलकर आम जन की सोच को बुरी तरह से प्रभावित किया है। महिलाओं के साथ भी ऐसा ही हुआ है । वैज्ञानिक सोच -शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ विवेकशील सोच व  तार्किकता नहीं बढ़ी। अपराध बढ़ गया है --गोहाना, दुलिना, मिर्चपुर कांड दलितों पर अत्याचार की क्रूरतम र घटनाएं हैं ।
समाज को मानवीय चेहरा नहीं दे पाए।
क्या किया जाय?
सामाजिक सांस्कृतिक बदलाव व नवजागरण के लिए मिलजुल कर प्रयास किए जाएं। स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व के मूल्यों को साकार करने के लिए विचार विमर्श की प्रक्रिया को तेज किया जाए।
रणबीर सिंह
9812139001
dahiyars@rediffmail.com


*सोशल मीडिया और फेसबुक सिंगल आदि का सकारात्मक प्रयोग

दो साल से रिक्त पद होंगे खत्म

वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि सभी विभागों में दो साल से रिक्त पड़े पदों को खत्म किया जाएगा। इसके पीछे तर्क यह कि जब इन पदों के बगैर कार्य चल रहा है तो इन्हें भरने की जरूरत नहीं। अनावश्यक स्टाफ के बोझ से बचने के लिए फार्मूला भी बनाया गया है।

मान लीजिए कि किसी विभाग में ग्रुप डी के 100 स्वीकृत पद हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से इनमें अधिकतम 80 कर्मचारी ही तैनात रहे हैं। वर्तमान में 75 स्थाई कर्मचारी और आठ कच्चे कर्मचारी इन पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह माना जाएगा कि पिछले दो वर्षों में विभाग को अधिकतम 88 पदों की जरूरत रही है। बाकी 12 पदों को खत्म कर दिया जाएगा।

टोटके

 1.नरसिंह भजनी

टीटी आली मिशाल
2. थालियां गई थी
3. बरसात हवन से
4.सोचैगा तो उल्टी सोचैगा
5. उल्लू आली बात

6
एक नई नवेली दुल्हन जब ससुराल में आई तो उसकी सास बोली। बींदणी कल माता के मन्दिर में चलना है। बहू ने पूछा सासु माँ एक तो माँ जिसने मुझे जन्म दिया और एक आप हो और कोन सी माँ है। सास बढ़ी खुश हुई कि मेरी बहू तो बहुत सीधी है। सास ने कहा बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है कल सब औरतें जायेंगी हम भी चलेगे। सुबह होने पर दोनों एक साथ मन्दिर जाती है आगे सास पीछे बहु जैसे ही मन्दिर आया तो बहु ने मन्दिर पर लगे एक चित्र को देखकर कहा माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है। मैं बाल्टी लाती हूँ और दूध निकालेंगे। सास ने अपने सिर पर हाथ पीटा कि बहु तो पागल है और बोली बेटा ये फोटो है जो कि पत्थर की और ये दूध नही दे सकती चलो मन्दिर में। जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी फिर बहू ने कहा माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा सास को चिंता हुई कि मेरे बेटे का तो सर ही फूट गया और बोली बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा चलो अंदर चलो मन्दिर में, और सास बोली बेटा ये माता है और इससे मांग लो। बहू ने कहा माँ ये तो पत्थर की है ये क्या दे सकती है जब पत्थर की गाय दूध नही दे सकती, पत्थर का बछड़ा दूध पी नही सकता,पत्थर का शेर खा नही सकता तो ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है? अगर दे सकती हैं तो आप मुझे आशीर्वाद दीजिये। तब सास की आँखे खुली। वो बहू पढ़ी लिखी थी क्या आप भी पढ़े लिखे हैं?
"जब जागो तभी सवेरा" must read
2
देश प्रेमी ने एक दलित से पूछा-  तुम देश से प्रेम करते हो
दलित ने कहा - मैं तुम्हें मंदिर के अंदर आकर इस सवाल का जवाब दे सकता हूं
देश प्रेमी ने कहा - मुझे उत्तर मिल गया है। तुम देश से प्रेम नहीं करते हो।
- असगर वजाहत
3
इमाम की तूँ प्यास बुझाये
पुजारी की भी तृष्णा मिटाये
पॉप की भी आस बंधाये
ए पानी बता तेरा
मजहब क्या है ???
4

उल्लू और हंस
एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए उजड़े, वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये! हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ?? यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं! यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा! भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज कि रात बिता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे! रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे उस पर एक उल्लू बैठा था। वह जोर से चिल्लाने लगा। हंसिनी ने हंस से कहा, अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते। ये उल्लू चिल्ला रहा है। हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ?? ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही। पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों कि बात सुन रहा था। सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ कर दो। हंस ने कहा, कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद! यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा, पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो। हंस चौंका, उसने कहा, आपकी पत्नी ?? अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है, मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है! उल्लू ने कहा, खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है। दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग इक्कठा हो गये। कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी। पंच लोग भी आ गये! बोले, भाई किस बात का विवाद है ?? लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है! लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे। हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है। इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना है! फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों कि जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है! यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया। उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली! रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई - ऐ मित्र हंस, रुको! हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ?? पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ? उल्लू ने कहा, नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी! लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है! मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है। यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ पर ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं! शायद ६५ साल कि आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने हमेशा अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है। इस देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!

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गादड के कान

एक बै…..एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लागरे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड़गी । गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या…..बूझिये  बहू नै…..क्यूं तंग पारी सै..?
गादडी बोल्ली…….म्हारै छोरी के बटेऊ आरे सैं……अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।
गादड छो मैं  भर कै बोल्या…..मैं देखूं सूं उननै  जाकै। अकड मैं  गादड नै  बिल तै मुंह  बाहर काढ्या  तै दोनूं कुत्यां  नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बडग्या। पर कान कुत्यां  के मुंह मैं  ए  रहगे । भीतर दूसरी गादडी नै  गादड की बहू तै कहा, पूछिये री…….मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?
गादड बोल्या………बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!

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थलियाँ  गयी थी --- जरा बचके
एक बार की बात है की एक किसान अपनी ऊंटनी के साथ खेतों में गया | खेत थलियों पर थे | वहां जाकर ऊंटनी ने खेत से एक बड़ी कचरी खाई तो वह उसके गले में अटक गयी और साँस लेने में दिकत होने लगी | गर्दन में सोजिस आ गयी | किसान उसे गाँव लेकर आया और एक डॉक्टर को दिखाया | डॉक्टर ने पूछा ,"थालियाँ गयी  थी ?" किसान बोला, हाँ गयी थी |" डॉक्टर ," कचहरी खाई थी ?" किसान ," हाँ खाई थी .|" डॉक्टर ,"एक पंसेरी और एक दूसेरी लेकर आओ | " ले आये | डॉक्टर ने ऊंटनी को लिटाने को कहा | लिटा दी गयी | डॉक्टर ने पंसेरी गर्दन के नीचे रखी और  दूसेरी से उस गांठ पर चोट की | गांठ फूट गयी और ऊंटनी ठीक हो गयी | कई लोग देख रहे थे यह सब | एक मेरे जैसा भी देख रहा था | कुछ दिन बाद रमलू   की बुढिया माँ  की गर्दन में बड़ा सा फौड़ा (गूमड़ा ) निकल आया | डॉक्टर को बुलाने गए तो डॉक्टर किसी दूसरे गाँव में गया मिला | घरवाले परेसान थे | मेरे जैसा वहां  पहुँच गया और बोला इसका इलाज तो मैं भी कर सकता हूँ | रमलू  ने कहा ," करो    |" उस आदमी   ने कहा , " थलियाँ   गयी थी? रमलू     बोला," नहीं    गयी | आदमी ," कहदे  सौन  हो सै | रमलू  नै कह दिया गयी थी | आदमी वैद , "कचहरी खाई थी?" रमलू  ," गयी नहीं तो कचहरी ?" वैद ," कहदे सौन हो सै " रमलू  ने कहा  खाई थी | वैद ," पंसेरी और दूसेरी लेकर आओ | ले आये | वैद ने बुढिया को लिटाया और गर्दन के नीचे पंसेरी राख़ कर दूसेरी से चोट की तो बुढिया का पूरा इलाज कर दिया | बुढिया इस दुनिया में नहीं रही | आजकल नकलची डॉक्टर बहोत पैदा किये जा रहे हैं | जरा बचके |   इसे ए नकली बाबे भी बहोत होगे । कॉपी पेस्ट तैं काम कोण्या चालै। दिमाग पै जोर देणा होगा ।
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गुरु जी --उठकै बाहर जाकै देखिये मींह तो नहीं बरसै सै।
चेला- खाट पै लेटया लेटया बोल्या - ना मींह कोण्या बरस ता।
गुरु- बिना बाहर जाकै तनै क्युकर बेरा ला लिया ?
चेला- बाहर तैं भीतर बिलाई आई थी मनै उसपै हाथ फिरा कै देख लिया।
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बटेऊ की हाजर  जवाब  सास

एक बै एक बटेऊ ससुराल गया । पहले ससुराल में साग-सब्जी, बूरा आदि मैं  तब  तक घी की धार डालते रहते थे जब तक कि मेहमान हाथ आगे कर के "बस, बस" कर के रोकता नहीं था । जब सास बूरा में घी डाल रही थी, तो बटेऊ परे-नै मुंह करकै बैठग्या - कदे "बस-बस" ना करना पड़ जावै ।
पर सासू भी कम चालाक नहीं थी । वो उसका मुंह वापस घी-बूरा की तरफ घुमा कर उसको दिखाती हुई बोली - "रै देख, बटेऊ जितणा तै दिया सै घाल, अर पहलवानी करणी सै तै आपणै घरां जा करिये" !!

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इब क्यो करूं?
डाक्टर सैनी आज मजबूरी मैं खरखोदे शहर मैं रोंग साइड जावण लागरया था। यातायात पुलिस के माणस नै डाक्टर साहब पाकड़ लिये। बोल्या - रोंग साइड क्यों ? थाम तो पढ़े-लिखे लोग सो। डाक्टर सैनी नै अपणे बारे बताया। पुलिसिया नै सैलूट ठोक्या अर बोल्या - डॉक्टर तो भगवान का दूसरा रूप हो सै। आप गलत काम क्यूंकर कर सको सो। जल्दी जाओ साहब। डाक्टर सैनी नै खिसिया-सी कै उसका धन्यवाद करया। पुलिसिया सहज सी बोल्या - मेरे छोरे का इलाज आपकी देख-रेख मैं सै जनाब। थोड़ा-सा ख्याल राखियो।
डाक्टर बोल्या - जरूर-जरूर। नाम क्या है? पुलिसिया बोल्या सतबीर। आठ दस दिन पाछै फेर ओहे चेटक होग्या। डाक्टर सैनी फेर रोंग साइड जावण लागरे थे। यातायात पुलिस आले नै (कुदरतन ओहे पुलिसिया था) फेर टोक दिया। फेर ईबकै उसनै छोड्या नहीं। डाक्टर सैनी का चालान काट दिया। डाक्टर सैनी हैरान-सा उसके मुंह कान्हीं लखावै। ओ पुलिसिया बोल्या - उस दिन की बात न्यारी थी। मेरा लड़का थारी देख रेख मैं था आज की बात न्यारी सै। मेरा लड़का ईब दूसरे डाक्टर की देख रेख मैं सै। मैं ईब थारी सेवा किस बात खातर करूं?
फत्ते बोल्या - एक बात मनै सुणादी ईब एक बात सरिता नै सुणाणी चाहिए।
   *** बस पांच मिनट***
       सरिता सुणावण लागी - आजकाल एक जबरदस्त तकिया कलाम सै कि ‘बस पांच मिनट।’ कोए भी बात हो, कोए भी बख्त हो, यो मुहावरा आम सुणण मैं मिलज्या सै कि बस पांच मिनट रूको फेर फुरसत ए फुरसत सै। डाक्टर सैनी की बी याहे आदत थी। सारी हाण मरीजां तै घिरया रहण करकै वे हरेक माणस ताहिं न्योंए कैह दिया करते - ‘बस पांच मिनट रूको फेर आपका नंबर सै।’ एक दिन की बात सै कि डाक्टर साहब के केबिन मैं एक बूढ़े व्यक्ति नै झांक कै देख्या अर भीतर आग्या। ओ बहोत घबरारया था। आवन्ते की साथ बोल्या - थामनै लेवण आया सूं डाक्टर साहब। मेरी बिटिया सख्त बीमार सै। थाम तो भगवान सो। चाल कै बचाल्यो उसने। डाक्टर सैनी ने आदतन कैह दिया - बस, थारी गेल्यां पांच मिनट मैं चालांगे।
बीस मिनट पाछै बूढ़ा बाबा फेर बोल्या हाथ जोड़ कै - डाक्टर साहब वार होवण लागरी सै। डाक्टर सैनी फेर बोले - बस पांच मिनट मैं चालां सां। 25 मिनट पाछै जिब डाक्टर सैनी नै कहया - हां तो बाबा चालो चालां बेटी नै देखण। तो बूढ़ा बाबा कातर नजरां तै देखता हुआ फफक पड़या अर बोल्या - ईब जावण का के फायदा डाक्टर साहब! पड़ौसी इबै-इब खबर दे कै गया सै कि पांच मिनट पहलम बिटिया का स्वर्गवास हो लिया।
           फेर कविता का नंबर आया तो उसनै एक बात बताई।
        ***पीसा बड़ा  या भगवान***
          एक बै एक बुढ़िया भिखारिन थी। भीख मांग कै उसनै पांच सात रुपइये कट्ठे कर लिए अर वा एक फलां की दुकान पै जाकै भीख मांगण लागगी - तेरा भगवान भला करैगा। बुढ़िया दो दिन तै भूखी सै। दुकानदार नै उस कान्हीं कोए ध्यान नहीं दिया। एक गावड़ी आगी। उसनै फलां कै मुंह मारणा चाहया तो दुकानदार नै एक लाठी जड़ दी उसकै। अर ग्राहकां नै चीज बेचण लागग्या। बुढ़िया नै आगै सी हो कै फेर कहया उसतै - भगवान भली करैंगे। दो फली ही दे दे। बुढ़िया दुआएं देगी। दुकानदार ने इस डर से कि कहीं ग्राहक बिदक ना जावैं एक बुस्या सा केला उस बुढ़िया के हाथ पै धर दिया। बोल्या - चाल ईब आगै चाल। बुढ़िया नै अपणे कमंडल मां तै एक रुपइये का सिक्का काढया अर बोली - ले एक केला दे दे। दुकानदार नै तो सैड़ दे सी एक बढ़िया लाम्बा, मोटा-सा केला बुढ़िया के हाथ मैं पकड़ा दिया। उसनै ऊपर नै ठाकै आसमान कान्हीं करकै बुढ़िया बोली - तेरे नाम पै तो यू केला अर एक रुपइये का यू केला। ईब तूं ही बता तनै बड्डा मानूं अक पीस्से नै बड्डा मानूं? तो आई किमै समझ मैं अक नहीं? क्यूंकर पीस्सा खून के रिश्ते भी बदल दे सै। एक हद तै ज्यादा पीस्से का लालच माणस की इन्सानियत बी खोदे सै।

1*********
वैज्ञानिक नजर
वैज्ञानिक नजर के दम पै जिन्दगी नै समार लिये।
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
1
सादा रैहणा उचे विचार साथ मैं पौष्टिक खाणा यो
मानवता की धूम मैच चाहिये इसा संसार बसाणा यो
सुरग भी आड़ै नरक भी आड़ै ना कितै और ठिकाणा यो
पड़ौसी की सदा मदद करां दुख सुख मैं हाथ बंटाणा यो
धरती सूरज चौगरदें घूमै ब्रूनो नै सही प्रचार किये।।
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
2
साच बोलणा चाहिये पड़ै चाहे थोड़ा दुख बी ठाणा रै
नियम जाण कुदरत के इसतै चाहिये मेल बिठाणा रै
हाथ और दिमाग तै कामल्यां चाहिये दिल समझाणा रै
गुण दोष तै परखां सबनै अपणा हो चाहे बिराणा रै
जांच परख की कसौटी पै चढ़ा सभी संस्कार लिये।।
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
3
इन्सान मैं ताकत भारी सै नहीं चाहिये मोल घटाणा
सच्चाई का साथ निभावां पैड़े चाहे दुख बी ठाणा
लालची का ना साथ देवां सबनै चाहिये धमकाणा
मारकाट की जिन्दगी तै ईब चाहिये पिंड छटवाणा
पदार्थ तै बनी दुनिया इसनै चीजां को आकार दिये।।
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
4
दुनिया बहोतै बढ़िया इसनै चाहते सुन्दर और बणाणा
जंग नहीं होवै दुनिया मैं चाहिये इसा कदम उठाणा
ढाल-ढाल के फूल खिलैं चाहिये इनको आज बचाणा
न्यारे भेष और बोली दुनिया मैं न्यारा नाच और गाणा
शक के घेरे मैं साइंस नै रणबीर सिंह सब डार दिये।।
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।

2********
हरियाणा नंबर वन कोण्या
मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना
चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।
1
हरया भरया हरियाणा जित दूध दही का खाना
गर्भवती मैं कमी खून की दस प्रतिशत बढ़ जाना
हम सबके उपकार बिना, बसते हुए घरबार बिना
लिंग अनुपात सुधार बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या
मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना
चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।
2
गुण गाते हरित क्रांति के नुक्सान ना कदे बतावैं
जहर घोल दिया पानी मैं कीटनाशक कहर ढावैं
बीमारियों के इलाज बिना, हम गरीबों की आवाज बिना
विकास के सही अंदाज बिना,हरियाणा नंबर वन ।कोण्या ।।
मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना
चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।
3
कीट नाशक तैं हरियाणा बहोत घणा दुःख पाग्या
हुई खाज बीमारी गात मैं ,घणा कसूता संकट छाग्या
इसकी पूरी रोकथाम बिना , पानी के सही इंतजाम बिना
अमीरों पर कसे लगाम बिना, हरियाणा नंबर वन कोण्या।।
मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना
चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।
4
अमीर गरीब के बीच की बढ़ती जावै या खाई देखो
बिना गरीब की मेहनत छाज्या घणी रुसवाई देखो
महिलाओं के सम्मान बिना, पढ़े लिखे नैजवान बिना
म्हारे पूरे बुरे अरमान बिना, हरियाणा नंबर वन कोण्या।
मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना
चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।
5
मानस तैं मानस का भाईचारा , हो हर शहर गाम मैं
हम राजी होकै हाथ बँटावां एक दूसरे के काम मैं
भाईचारे की छाप बिना ,सबकी सांझी खुभात बिना
गरीब के सिर पै छात बिना, हरियाणा नंबर वन कोण्या
मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना
चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।

**पीगी तैं किट किट में ए