सोमवार, 7 अप्रैल 2014

fareb

पल पल तुम्हारा  साथ रहे निभाते हम 
इक इशारे पर दुनिया छोड़ जाते हम 
समुन्द्र के बीच पहुँच फरेब किया तुमने 
तुम कहते तो किनारे पे डूबकी खाते हम



toote rishte

कुछ खबर नहीं वो शक्श क्या चाहता रहा  
कि तालुक़ तोड़ कर भी मुझको आजमाता रहा 
टूटे हुए तालुक में भी कितनी मजबूती है 
मैं जितना भूलती रही वो उतना ही याद आता रहा  





MAT POOCHH

मत पूछ मेरी सबर की इन्तिहाँ कहाँ तक है 
तूँ सितम कर खूब तेरी ताकत जहाँ तक है 
मुझे तॊ मेरी वफ़ा की उम्मीद पूरी है दोस्त 
बस ये देखना है कि तूँ बेवफा कहाँ तक है 

dil ka dard



दिल के दर्द को शब्दों में ढाला नहीं गया 
गम के आंसूं को आँखों से निकाला नहीं गया 
उस बेवफा ने मुझे दर्द इसलिए दिया बहन 
क्योंकि उससे मेरा प्यार सम्भाला नहीं गया 


प्रेमी और प्रमिका

प्रेमी और प्रमिका

प्रेमी  : जब हमारी शादी हो जायेगी मैं तुम्हारी सारी चिन्तायें और कष्ट बांट ल्यूंगा । प्रेमिका  : मुझे तुमसे यही उम्मीद है,
 लेकिन मेरी जिंदगी में कोई चिन्ता या कष्ट नहीं है।प्रेमी -- क्यों ?प्रेमिका   : वो तो इसलिये क्योंकि अब तक हमारी शादी
 नहीं हुई है।

PREM PTR

प्रेम पत्र!

जीतो की एक सहेली ज्यादा पड़ी लिखी ना थी उसकी शादी एक अच्छे पढ़े-लिखे साहब से हो गई। जो शहर में काम करता था। शादी के लगभग तीन-चार माह बाद उसके पति का पत्र आया। पत्र काफी साहित्यिक था, अंत: उसने जवाब भी उसी तरह देना चाहा।

उसने जीतो से पूछा कि सम्भोधन कैसे करूँ और अंत में क्या लिखूं।

जीतो ने उसे बताया कि शुरू में लिखना, 'मेरे प्राण पति और अंत में आप के चरणों की दासी।'

यह पूछकर वो चली गई। उसने पत्र लिखा। तीसरे दिन उसके पति का नाराजगी भरा पत्र आया। वो जीतो के पास रोती हुई आई तो जीतो ने उससे पूछा, "ऐसा क्या लिख दिया कि तुम्हारे पति नाराज हो गए। मैंने तो ऐसी कोई बात नहीं लिखाई।"

इस पर जीतो की सहेली ने अपने पति का पत्र जीतो की तरफ बढ़ा दिया। पत्र पढ़कर उसका हंसी के मारे बुरा हाल हो गया। उसकी सहेली ने अपने पत्र में लिखा था, 'मेरे चरण पति और अंत में लिखा था आपके प्राणों की प्यासी।'

डाक्टर का इलाज

डाक्टर का इलाज

एक आदमी मनोचिकित्सक के पास गया । बोला -''डॉक्टर साहब मैं बहुत परेशान हूं। जब भी मैं बिस्तर पर लेटता हूं, 
मुझे लगता है कि बिस्तर के नीचे कोई है। जब मैं बिस्तर के नीचे देखने जाता हूं तो लगता है कि बिस्तर के ऊपर कोई है।
 नीचे, ऊपर, नीचे, ऊपर यही करता रहता हूं। सो नहीं पाता । कृपा कर मेरा इलाज कीजिये नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा।'' 
डॉक्टर ने कहा - ''तुम्हारा इलाज लगभग दो साल तक चलेगा। तुम्हें सप्ताह में तीन बार आना पड़ेगा। अगर तुमने मेरा 
इलाज मेरे बताये अनुसार लिया तो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे।'' मरीज - ''पर डॉक्टर साहब, आपकी फीस कितनी 
होगी ?''डॉक्टर - ''सौ रूपये प्रति मुलाकात''गरीब आदमी था। फिर आने को कहकर चला गया। लगभग छ: महीने बाद
 वही आदमी डॉक्टर को सड़क पर घूमते हुये मिला । ''क्यों भाई, तुम फिर अपना इलाज कराने क्यों नहीं आये ?'' 
मनोचिकित्सक ने पूछा। ''सौ रूपये प्रति मुलाकात में इलाज करवाऊं ? मेरे पड़ोसी रमलू  ने मेरा इलाज सिर्फ बीस रूपये में
 कर दिया'' आदमी ने जवाब दिया। ''अच्छा! वो कैसे ?''''दरअसल वह एक बढ़ई है। उसने मेरे पलंग के चारों पाए
 सिर्फ पांच रूपये प्रति पाए के हिसाब से काट दिये।''

ताला कोणी खुलता

ताला  कोणी खुलता

रमलू  नै  एक दिन कुछ ज्यादा ही पी ली। लडखड़ाते कदमों से किसी तरह घर के दरवाजे तक पहुंचा और जेब से
 चाभी निकालकर ताला खोलने की कोशिश करने लगा।
नशा ज्यादा होने की वजह से वह चाभी को ताले में डाल ही नहीं पा रहा था। चाभी कभी इधर हो जाती कभी उधर । 
उसे परेशान होते देख पास ही खड़े एक व्यक्ति ने उसकी मदद करनी चाही ।
पास आकर बोला - लाओ चाभी, ताला मैं खोल देता हूं।
रमलू बोल्या  - नहीं, नहीं, ताला तो मैं खोल लूंगा। तुम तो बस जरा दरवाजे को पकड़ के रखो।

आज पी लेण दयो

आज पी  लेण  दयो 

रमलू  शराबी एक बार में गया । वहां जाकर उसने बार में मौजूद सभी लोगों, जिनमें बार मालिक भी शामिल था, 
के लिए अपनी तरफ से एक-एक पैग व्हिस्की का ऑर्डर दिया।
- आज सभी लोग मेरी तरफ से पियो । रमलू  ने झूमते हुए घोषणा की।
आधे घण्टे बाद रमलू  ने फिर से सभी लोगों के लिए एक-एक पैग व्हिस्की का ऑर्डर दिया। बार मालिक को भी 
एक पैग और मिला। फिर तो हर आधे घण्टे बाद यही क्रम चलने लगा। पांचवें पैग के बाद बार मालिक को चिंता
 होने लगी। उसने रमलू को एक तरफ बुलाकर कहा - भाईसाहब, आपका अभी तक का बिल तीन हजार चार सौ 
रुपये हो गया है ।- बिल ? कैसा बिल ? मेरे पास तो फूटी कौड़ी भी नहीं है। रमलू  ने जेबें उल्टी करके दिखाते हुए कहा।
अब तो बार मालिक का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उसने लात घूंसों से रमलू  की जमकर पिटाई की और 
आखिर में बार के कर्मचारियों से कहकर बाहर गंदे नाले में फिंकवा दिया ।
अगले दिन शाम को बार अभी खुला ही था कि रमलू  अंदर आया और बोला - एक पैग व्हिस्की मेरे लिए और एक-एक
 यहां मौजूद सभी लोगों के लिए मेरी तरफ से ...... ।
फिर बार मालिक की तरफ उंगली करके बोला - सिर्फ तुमको छोड़कर .... । तुम चार पैग के बाद बहक जाते हो

balance low

रमलू -- शाम – सबेरे तेरी घणी याद आवै है। सारी रात मन्नै जगावै है।
करने को तो करूं तन्नै कॉल।
… पर कस्टमर केयर की छोरी हर बार बैलंस लो बतावै है।

NAKA

. एक बै रमलू  खेत  म्ह रेडियो सुनै  था। रेडियो पै एक लुगाई बताण लाग री थी, बंबई मै बाढ़ आ गी, गुजरात मै हालण आग्या, दिल्ली म्ह… रमलू  नै देख्या पाछे नै नाका  टूट्या पड़्या सै , अर पाणी दूसरे के खेत म्ह जाण लाग रहया सै ।  रमलू  छोंह म्ह आकै रेड़ियो कै दो लट्ठ मारकै बोल्या – दूर-दूर की बताण लाग री सै , लवै नाका टूट्या पड़या सै , यो बतांदे होए तेरा मुँह दुक्खै था । 

रविवार, 6 अप्रैल 2014

सबसे भयानक कौन?

एक बार जंगल में कुछ लोग हवन कर रहे थे। देवताओं को खुश करने के लिए ज़ोर-ज़ोर से मंत्र पढ़े जा रहे थे, लेकिन अचानक ही वहाँ एक राक्षस प्रकट हो गया। लपलपाती, आग उगलती जिव्हा और खून से सने उसके लंबे नुकीले दाँत उसे बहुत ही भयानक बना रहे थे।

चारों तरफ भगदड़ मच गई।

जिसे जैसी जगह दिखी भाग निकला। कुछ ही पलों में सब खाली हो गया।

इस सब में एक महिला  वहीँ बैठी रही ।

राक्षस गरजते हुए उसके पास पहुंचा और पूछा, "तुम जानती  नहीं मैं कौन हूँ?"

उस महिला  ने कहा, "हाँ मैं जानती  हूँ। तुम कुम्भीपाक नर्क के राक्षस हो।"

राक्षस ने गरजते हुए, आग उगली और फिर पूछा, "तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता?"

उस महिला  ने जवाब दिया, "नहीं, बिलकुल भी नहीं।"

यह सुनकर गुस्से में पागल राक्षस बोला, "अब कोई भी तुम्हारी रक्षा नहीं कर पायेगा मूर्ख! ये बता तुझे मेरा भय क्यों नहीं है?"

उस महिला  ने उसी शान्ति से जवाब दिया, "क्योंकि मैं पिछले पच्चीस वर्षों से शादीशुदा हूँ और मेरा  पति  तुमसे भी भयानक है!" 

समय का सदुपयोग

समय का सदुपयोग 
एक स्टेनोग्राफर दफ्तर में हर सोमवार को देर से आया करता  था । एक सोमवार को देर से पहुँचने पर उसकी मैनेजर ने उसे अंदर बुलाया तो वह घबरा गया 

लेकिन जब मैनेजर ने मुस्कुरा कर पूछा कि अगले रविवार की रात तुम्हारा क्या प्रोग्राम है तो वह खिल उठा और बोला , "वैसे तो मैं अपने दोस्तों के साथ फ़िल्म देखने जाने वाला था , लेकिन आप कहें तो अब की बार यह प्रोग्राम रद्द कर दूँ।

महिला मैनेजर: बहुत अच्छा! सभी प्रोग्राम रद्द करके जल्दी सो जाना ताकि सुबह जल्दी उठ कर ठीक समय पर दफ्तर आ सको।

वसूली का तरीका

वसूली का तरीका 
रमलू  नै  होटल के मालिक तैं  कह्या , "जनाब! इस समय आपका बिल चुकाने के लिए मेरे धोरै पीसे कोन्या  ।"
होटल का मालिक बोला, "आप चिंता मत कीजिए, हम आपका नाम दीवार पर लिख देंगे। आप जब अगली बार आएं तो दे दीजिएगा।"

रमलू :न्यूँ   तो सबनै  बेरा पाट ज्यागा

होटल का मालिक: कैसे पता लग जाएगा श्रीमान जी, नाम के ऊपर आपका कोट जो टंगा होगा।

Adalat kee tauheen

अदालत की तौहीन 

अदालत में मुक़दमा चल रहा था कि शराबी पति रमलू ने अपनी पत्नी का हाथ तोड़ दिया।

जज के सामने जब पति को पेश किया गया तो उसने सुबकते-सुबकते सारी घटना सुना दी। जज ने पति से भविष्य से अच्छा व्यवहार करने के वायदे पर उसे छोड़ दिया।

लेकिन दूसरे दिन ही उसे पत्नी का दूसरा हाथ तोड़ने पर जज के सामने लाया गया।

इस बार रमलू ने सफाई देते हुए बताया, "हजूर छूटने पर अपने को सम्भालने के लिए मैंने थोड़ी सी शराब पी पर जब इससे भी कोई फर्क नहीं आया तो थोड़ी-थोड़ी करके मैं दो बोतलें पी गया। दो बोतल शराब पीने के बाद जब मैं घर पहुंचा तो मेरी पत्नी मुझ पर चिल्लाने लगी कि शराबी ,आ गया नाली में लेटकर।

हजूर मैंने अपनी हालत पर गौर किया और सोचा शायद यह ठीक कहती है। इसलिए मैं खामोश रहा। इसके बाद वह बोली, "हरामखोर, कुछ काम धन्धा भी करा कर।" हजूर मैं इस पर भी मैं कुछ नहीं बोला पर फिर तो इसने हद ही कर दी और बोली, "अगर जज में थोड़ी सी भी अकल होती तो तू अब तक जेल में होता।" बस हजूर, अदालत की तौहीन मुझसे बर्दाश्त ना हुई!