शनिवार, 13 अप्रैल 2019

बहाना


टीचर (रमलू  से), "आज स्कूल मे देर से आने का तुमने क्या बहाना ढूंढा है?"

रमलू , "सर आज मै इतनी तेज दौड कर आया  कि बहाना सोचने का मौका ही नही मिला।"

सूर्य


कमलू  रमलू तैं , अगर दिन को सूर्य निकला तो क्या होगा?

रमलू  नै  जवाब दिया, "बिजली का बिल बढ जाएगा।"

तजुर्बा


रमलू ,"डेडी, ज्यादा काबिल कौन है मैं या आप?"

डैडी, " मै, क्योकि मैं एक तो तुम्हारा बाप  हूँ , दुसरे उम्र मे भी तुम से बडा हूँ  और मेरा तजुर्बा भी तुम से ज्यादा है।"

रमलू   , "फ़िर तो आप जानते होगें कि अमेरिका की खोज किस ने की थी? "

डैडी, "कोलम्बस ने की थी"

 रमलू , "कोलम्बस के बाप ने क्यों नही की, उसका तजुर्बा तो कोलम्बस से कही ज्यादा होगा ?"

मिलता झुलता


टीचर (क्लास मे पढाते हुए), "बच्चो आयकर, बिक्रीकर, भूमिकर से मिलता जुलता कोइ और शब्द बताओ।"

रमलू , "सर, एक नही तीन शब्द सुनें , सुनील गावासकर, सचिन तैंदुलकर और दिलीप वेंगसरकर।"

शनिवार, 6 अप्रैल 2019

mastar jee


बाबू --- तेरे मास्टर जी की चिठ्ठी आई सै अक रमलू ताहिं पढ़ावण  मैं मनै बहोत मुस्किल आवै सै ।
रमलू -- मनै तो पहलमें कही थी अक यूं बेकार मास्टर सै ।



kulla

एक बै  दो बड़ी सी उम्र की लुगाई गाम के बस अड्डे प बस की बाट मे बैठी थी |
घनिये वार हो ली अर बस ना आई |
एक बोली - आंहे कितनी वार होली बेठे बेठे मेरा त कुल्हा सो ग्या |
दूसरी बोली - हाँ जीजी खर्रांटे  तै  मन्ने भी सुने थे |

JAI SHANKAR

पूजा करवा रहे पंडित जी नै  गृहणी तैं कहया - "बोलिए जै शंकर "|
"शंकर " उस गृहणी के पति का नाम था | वा भला उसका नाम क्यूकर लेंती ?
बोली -" रमलू  के पापा की जै |"

Kaun

 वार्ताः जीत कौर को सुनाम के शहर में सूचना मिलती है ऊधम सिंह की शहादत की। वह मन ही मन रो पड़ती है पुरानी मुलाकातों को याद करके। समझ नहींआता उसे कि वह ऊधम सिंह के साथ अपने रिश्ते को कैसे समझे। ऊधम सिंह का आजादी का सपना ही उसे सही रिश्ता लगता है उसके साथ। क्या सोचती है भला।
                रागनी-13
                कौण किसे की गेल्यां आया कौण किसे की गैल्यां जावै।।
                ऊधम सिंह के सपन्यां का यो भारत ईब कौण रचावै।।
                किसनै सै संसार बनाया किसनै रच्या समाज यो
                म्हारा भाग तै भूख बताया बाधैं कामचोर कै ताज यो
                मानवता का रूखाला आज पाई-पाई का मोहताज यो
                अंग्रेज क्यों लूट रहया सै मेहनत कश की लाज यो
                क्यों ना समझां बात मोटी अंग्रेज म्हारा भूत बणावै।।
                कौण पहाड़ तोड़ कै करता धरती समतल मैदाल ये
                हल चला खेंती उपजावै उसे का नाम किसान ये
                कौन धरा नै चीर कै खोदै चांदी सोने की खान ये
                ओहे क्यों कंगला घूम रहया गोरा बण्या धनवान ये
                म्हारे करम सैं माड़े कहकै अंग्रेज हमनै यो बहकावै।।
                हम आजादी चाहवां अक अनपढ़ता का मिटै अन्धकार
                हम आजादी चाहवां अक जोर जुल्म का मिटै संसार
                हम आजादी चाहवां अक ऊंच नीच का मिटै व्यवहार
                हम आजादी चाहवां अक लूट पाट का मिटै कारोबार
                जात पात और भाग भरोसै या कोन्या पार बसावै।।
                झूठ्यां पै ना यकीन करां म्हारी ताकत सै भरपूर
                म्हारी छाती तै टकराकै गोली होज्या चकना-चूर
                जागते रहियो सोइयो मतना ना म्हारी मंजिल दूर
                सिंरजन हारे हाथ रणबीर घणे अजब रणसूर
                देश की आजादी खातर ऊधम सिंह राह दिखावै।

fansee

कमलू  अर रमलू  दसमीं  में दसमीं बार फ़ैल होगे 
कमलू : चाल  फांसी खाल्याँ सां । 
रमलू : साले, पागल हो गया है??
आगले जनम मैं  हटकै  नर्सरी तैं  शुरू करना पडैगा!!!

अंडा अर रमलू

अंडा अर रमलू ********* 
एक ग्राहक नै अंडे बेचन आले रमलू  तै बूझ लिया ," के तनै कदे सोच्या सै अक इस अंडे महां तैं बच्चे लिकडें क्यूकर सें ? रमलू  बोल्या, " हाँ सोच्या तो सै | इस बात पर मनै अचरज भी होवै सै अक यो बच्चा अंडे कै भीतर बडै क्यूकर सै ?*********