एक बै दो बड़ी सी उम्र की लुगाई गाम के बस अड्डे प बस की बाट मे बैठी थी |
घनिये वार हो ली अर बस ना आई |
एक बोली - आंहे कितनी वार होली बेठे बेठे मेरा त कुल्हा सो ग्या |
दूसरी बोली - हाँ जीजी खर्रांटे तै मन्ने भी सुने थे |
घनिये वार हो ली अर बस ना आई |
एक बोली - आंहे कितनी वार होली बेठे बेठे मेरा त कुल्हा सो ग्या |
दूसरी बोली - हाँ जीजी खर्रांटे तै मन्ने भी सुने थे |
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