गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

rokti kyon nahin

पति   - अजी सुनती  हो ? आपकी  दोस्त एक पागल लड़के  से शादी करने जा रही  है. आप उसे रोकती   क्यों नहीं ? पत्नी  - क्यों रोकूँ ? उस ने  मुझे रोका था क्या ..... ?

hospital

पंजाब का एक अस्पताल
मरीज --डाक्टर साहब बिस्तरे ते एक  चादर तां  दे देवो  |
डाक्टर - वो मेरा कमरा हैगा  ना जिथे  मैं सोंदा  हाँ  ,उठां  दे  बिस्तर तों  ले लो |
मरीज वहां गया वापिस आकर-- डाक्टर साहब ! वहां तो चादर की तो गल छड़ो   गद्दा भी टूटा फूटा हैगा  |  

bhains

एक लड़की   एक भैंस  के सामने गिर गयी .
एक लड़के  ने यह देखकर कहा - "अपनी ताई  के पैर छू रही  हो ?"
लड़की  बोली  - "जी ताऊ जी  !"

bachche

जादूगर - बच्चो, मैं इस रूमाल को जादू से तोता  बनाकर दिखाऊंगा. ताली  बजाओ |
 विपिन (बच्चा )- इसमें कौनसी बड़ी बात सै . म्हारे  मास्टरजी  तो हमें बिना किसी
 जादू के ही रोज मुर्गा बना देवैं सैं ...

सोमवार, 16 दिसंबर 2013

PREMIKA

एक दिन प्रेमिका  ने मौका पाकर अपनी प्रेमी  का मोबाइल चैक  किया कि उसने किस नाम से उसका मोबाइल नंबर सेव किया है.
इसके लिए उसने अपने मोबाइल से प्रेमी  के मोबाइल पर मिस काल किया तो उसमे लिखकर आया -
कालिंग बेकूफ नंबर 4 

JUDGE

एक जज नै कहया : इतना मामूली सा झगड़ा तो थाम  कोर्ट के बाहर भी निपटा सकते थे ।
आरोपियों में तै  एक सैड दे सी बोल्या  : हम कोर्ट के बाहर ही निपटावन लागरे  थे अक  पुलिस हमनै   झगड़ा करने के इलजाम में यहां पकड़ ल्याई ।-- 

MAREEJ AUR DOCTOR

मरीज और डॉक्टर के बीच बात हों रही है 
मरीज : सही सही  बताओ  डॉक्टर साहब, मेरे बचने की कितनी उम्मीद  है ?


डॉक्टर : सौ प्रतिशत! आंकड़े बताते हैं कि इस रोग में दस में से नौ आदमी मरते हैं – और मेरे दस मरीजों में से नौ मर चुके हैं। तुम दसवें हो!

chabi

रमलू    अपने पाँच   साल के लड़के को डॉक्टर के पास ले गया 
रमलू - डॉक्टर , देखो नै  मेरे लडके नै  मेरे फ्लैट की चाबी निगल ली है
डॉक्टर - चाबी निगलने के बाद कितना समय हुवा है ?रमलू  - सात  दिन हुवे होगे |
डॉक्टर - क्या? सात  दिन? इतने दिन के बाद तुम उसे मेरे पास ला रहे हो?रमलू - वा दुपलिकेट चाबी थी ना    ... वो भी  आज  गुम   हों गयी 

badeshi dikhoon soon

लन्दन  की  यात्रा तैं  लौट कै  आये रमलू  नै  अपनी घराली  तैं  बूझ्या  – “के  मैं विदेशी बरगा दीखूं  हूँ ?”
घराली  – “जमा बी ना  …”
 – “तै फेर  लन्दन मैं  एक औरत क्यों बुझै  थी अक  मैं विदेशी सूँ  अक ------

रविवार, 15 दिसंबर 2013

इसीलिए हम देखते हैं कि आजादी के आन्दोलन के दौरान तरह तरह की  शैक्षिक ,साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाएं खड़ी हो  गयी ,जिनके जरिये भारतीय भाषाओँ तथा उनके साहित्य को विकसित करने , लोगों को शिक्षित करने का काम हुआ | फिर उस काम को देश की  आजादी के लक्ष्य से जोड़ा  गया , सब भाषाओँ और विभिन्न संस्कृतियों को जोड़कर एक राष्ट्रीय संस्कृति की  परिकल्पना की गयी और विविधता में एकता की बात की गयी |सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं  पर   ध्यान देने वाले कितने ही आन्दोलन चले और कितने ही संगठन बने | उदहारण के लिए , भारतीय कम्यूनिष्ट आन्दोलन के साथ साथ प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा ('इंडियन पीपुल्स थियेटर असोसिएसन ' यानि भारतीय नाट्य संघ) जैसी संस्थाएं बनी | इस सबके पीछे यही चेतना काम कर रही थी की मानसिक स्वराज के बिना राजनितिक स्वराज नहीं मिलेगा और मानसिक स्वराज का अर्थ था एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक नवजागरण |  जारी है -- 

Dhobi


Gadhe


SHADEE SHUDA



बुधवार, 11 सितंबर 2013

soch

सकारात्मक सोच घोर अँधेरे में भी
 रोशनी  की किरण ढूंढ लेती है 
नकारात्मक सोच रोशनी में भी
 साफ़ साफ नहीं देख पाती है 

KUNVARE SO KE

kunvare so ke
एक दिन रमलू को एक अनजान फोन नंबर से फोन आया --फोन पै एक छोरी बोली हैलो थाम कुंवारे सो के ? 
रमलू बोल्या --हाँ कुंवारा सूँ फेर थाम कौन बोलो सो ? 
जवाब आया -- मैं था री घराली प्रेमो बोलूं सूँ ,आ घर नै फेर बताऊँगी | 
थोड़ी सी वार मैं फेर फोन आया अर एक छोरी बोली --थाम शादी शुदा सो ? 
रमलू बोल्या --हाँ फेर थाम कौन बोलो सो ? 
लड़की -- मैं थारी गर्ल फ्रैंड ! धोखेबाज !!! 
रमलू--सॉरी डार्लिंग मनै सोच्या मेरी घराली प्रेमो है | 
लड़की-- प्रेमो ए सूँ| घरा आ एक बॅ फेर बताऊँगी |

RAMLOO

रमलू -पहलम मैं अपनी बीवी नै बीए करवाऊँगा 
फेर एम ए और पीएचडी और फिर अच्छी सी नौकरी दिवाऊंगा 
कमलू बोल्या - अर फेर आच्छा सा रिश्ता देखकै उसका ब्याह भी करवा दिए ।