सोमवार, 16 दिसंबर 2013

badeshi dikhoon soon

लन्दन  की  यात्रा तैं  लौट कै  आये रमलू  नै  अपनी घराली  तैं  बूझ्या  – “के  मैं विदेशी बरगा दीखूं  हूँ ?”
घराली  – “जमा बी ना  …”
 – “तै फेर  लन्दन मैं  एक औरत क्यों बुझै  थी अक  मैं विदेशी सूँ  अक ------

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