कविता और सविता बहुत पक्की सहेली थी । एक दिन
कविता बोली --- सविता चार पांच दिन पहलम तेरा अर
रलदू का झगड़ा होग्या था । इब के ढंग सै ? सविता -- हाँ
कविता ! समझौता सा हो ए गया । रमलू नै मेरे आगै गोड्डे
टेक दिए । कविता -- वो क्यूकर ? सविता -- रमलू धरती मैं
गोड्डे टेक कै न्यूँ बोल्या -- पलंग के तले तैं बाहर आज्या ईब
पाछै कोण्या मारूँ ।
कविता बोली --- सविता चार पांच दिन पहलम तेरा अर
रलदू का झगड़ा होग्या था । इब के ढंग सै ? सविता -- हाँ
कविता ! समझौता सा हो ए गया । रमलू नै मेरे आगै गोड्डे
टेक दिए । कविता -- वो क्यूकर ? सविता -- रमलू धरती मैं
गोड्डे टेक कै न्यूँ बोल्या -- पलंग के तले तैं बाहर आज्या ईब
पाछै कोण्या मारूँ ।
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