मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

गोड्डे टेक दिए

कविता और सविता बहुत पक्की सहेली थी । एक दिन
कविता बोली --- सविता चार पांच दिन पहलम तेरा अर
 रलदू का झगड़ा होग्या था । इब के ढंग सै ? सविता -- हाँ
कविता ! समझौता सा हो ए  गया । रमलू नै मेरे आगै गोड्डे
टेक दिए । कविता -- वो क्यूकर ? सविता -- रमलू धरती मैं
 गोड्डे टेक कै न्यूँ बोल्या -- पलंग के तले तैं बाहर आज्या  ईब
  पाछै कोण्या  मारूँ । 

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