एक मंदिर का निर्माण होण लागरया था अक एक मजदूर घनिए ऊंचाई तैँ पड़ग्या । उसकी जान तो बचगी फेर चोटें बहुत आईं।
एक पंडित जो दूर खड़या खड़या उसनै गिरता देखै था भाज कै उसके धोरै आया अर उसनै जिंदा पाकै बोल्या --: भगवान तेरी गेल्यां था बेटे।
मजदूर कराहते हुए बोल्या --: हां कोए ना कोए जरूर मेरी गेल्याँ था वरना म नै घक्का कौन देता।
एक पंडित जो दूर खड़या खड़या उसनै गिरता देखै था भाज कै उसके धोरै आया अर उसनै जिंदा पाकै बोल्या --: भगवान तेरी गेल्यां था बेटे।
मजदूर कराहते हुए बोल्या --: हां कोए ना कोए जरूर मेरी गेल्याँ था वरना म नै घक्का कौन देता।
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