शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

dhaka kaun deta

एक मंदिर का निर्माण होण लागरया  था अक  एक मजदूर घनिए  ऊंचाई  तैँ  पड़ग्या । उसकी जान तो बचगी  फेर  चोटें बहुत आईं।
एक पंडित जो दूर खड़या खड़या  उसनै  गिरता देखै था भाज कै उसके धोरै आया  अर  उसनै  जिंदा पाकै  बोल्या --: भगवान तेरी गेल्यां  था  बेटे।
मजदूर कराहते हुए बोल्या --: हां कोए  ना  कोए  जरूर मेरी  गेल्याँ  था वरना म नै  घक्का कौन देता।

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