रविवार, 21 जुलाई 2013

MUFAT MAIN

मोराँ  नै दाणे 
 रमलू अपनी चौपाड़ मैं झोला लेकै बैठ्या था अर बैठ्या बैठ्या झोले मैं हाथ घालकै थोड़ी थोड़ी हाण मैं हाथ बहार काढ कै मुठी खोल्लन लाग रया था । साहमी खड्या खड्या कमलू देखै था वो उसके धोरै जा कै बोल्या --रमलू के करण लागरया  सै इतनी वार होली ? रमलू बोल्या --कमलू मैं तो मोरां नै दाणे खुवावन लागरया सूँ । कमलू-- आडे मोर कित सैं ? रमलू बोल्या--न्यूँ  तो कमलू मेरे पै दाणे बी कोन्या फेर मुफ्त का पुन्न कमावण मैं के हर्जा सै ?

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