शनिवार, 24 मई 2014

Ibkai sahi


एक  बै रमलू   का  अर  कमलू  का पड़ोस था | कमलू  का बुड्ढा बाबू मर गया | अर  रमलू  हर लामणी लाग रे थे किम्मे ध्यान ना दिया | कई दिन पाछे :- कमलू  — आ भाई , हाम भोत नाराज सां ,तम मेरे बाबू का गोड़ा मोड्न ना आये |रमलू —– नाराज ना होवे भाई ,इबकै  कोए मरेगा जब आ जावान्गे |

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