शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

शर्म नीं आई

रमलू  अपणी घरआली धमलो  नै  ल्याण खातर सुसराड चल्या गया | जद वो धमलो नै  लेके अपणी सुसराड तै चाल्लण लाग्या तो उसकी सासू  नैं जुहारी म्ह उस ताई दस रपिये दे दिए | घरां आयां पाच्छे रमलू  धमलो  गेल झगड़ा करण  लाग्या अर कई देर ताहिं  झगड़ता रह्या | आखिर मैं  धमलो  तंग होकै रमलू  तैं  बूझण  लाग्यी, 'जी थाम मेरै गेल क्यान्तें झगड़ण लाग रह्ये सो?' रमलू  छोह मैं आकै  बोल्या, "तेरी मां नै  शर्म कोणी आयी |" धमलो  नै  बूझ्या , ""किस बात की शर्म?"  बोल्या, "मैं थाहरे घरां केले तो सो रपियाँ के लेकै  गया पर तेरी मां नै   जुहारी म्ह दस रपिये दे दिए |" धमलो  तपाक तैं  बोल्यी, "जी मन्ने न्यूं बताओ अक थाह्म ओड़े मन्ने लेण गए थे अक केले बेच्चण गए थे |"

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