रमलू अपणी घरआली धमलो नै ल्याण खातर सुसराड चल्या गया | जद वो धमलो नै लेके अपणी सुसराड तै चाल्लण लाग्या तो उसकी सासू नैं जुहारी म्ह उस ताई दस रपिये दे दिए | घरां आयां पाच्छे रमलू धमलो गेल झगड़ा करण लाग्या अर कई देर ताहिं झगड़ता रह्या | आखिर मैं धमलो तंग होकै रमलू तैं बूझण लाग्यी, 'जी थाम मेरै गेल क्यान्तें झगड़ण लाग रह्ये सो?' रमलू छोह मैं आकै बोल्या, "तेरी मां नै शर्म कोणी आयी |" धमलो नै बूझ्या , ""किस बात की शर्म?" बोल्या, "मैं थाहरे घरां केले तो सो रपियाँ के लेकै गया पर तेरी मां नै जुहारी म्ह दस रपिये दे दिए |" धमलो तपाक तैं बोल्यी, "जी मन्ने न्यूं बताओ अक थाह्म ओड़े मन्ने लेण गए थे अक केले बेच्चण गए थे |"
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