पड़ौसियों की छोरी के ब्याह में फेरे करवावण खातिर कोई बाहमण ना मिल्या ।
जब कित्तै तैं बाहमण का जुगाड़ ना हुया तै छोरी आळे रमलू नै ले आये । रमलू नै फेरे शुरु करवा दिये ।
तीन फेरे होण पाच्छै रमलू बोल्या - भाइयो, रस्म तै पूरी हो-गी, छोरी की विदा करवाओ ।
छोरे आळे बाराती बोले - जी, फेरे तै सात होया करैं ।
रमलू बोल्या - भाई, बात इसी सै, जै (अगर) उसनै रुकणा होगा तै तीन फेरयां में भी कित्तै ना जावै ।
अर जै इसनै भाजणा ए सै, तै चाहे पच्चीस फेरे करवा ल्यो !!
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