सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

गादड के कान

गादड के कान

एक बै…..एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लागरे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड़गी । गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या…..बूझिये  बहू नै…..क्यूं तंग पारी सै..?
गादडी बोल्ली…….म्हारै छोरी के बटेऊ आरे सैं……अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।
गादड छो मैं  भर कै बोल्या…..मैं देखूं सूं उननै  जाकै। अकड मैं  गादड नै  बिल तै मुंह  बाहर काढ्या  तै दोनूं कुत्यां  नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बडग्या। पर कान कुत्यां  के मुंह मैं  ए  रहगे । भीतर दूसरी गादडी नै  गादड की बहू तै कहा, पूछिये री…….मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?
गादड बोल्या………बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!

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