सोमवार, 11 जुलाई 2016

ट्रैफिक इंस्पेक्टर रमलू  नेशनल हाईवे पै एकला  अपनी मोटरसाइकल पे बैठया  था…!
उसे बख्त  दिल्ली कांही तैं  आंती  हुयी एक कार  नै बॉर्डर क्रॉस करया …!!
रमलू नै   रुकण का इशारा  करया …
और जब कार रुकी तो टहलता हुआ ड्राइवर की खिड़की पर दस्तक दिया…!
एक नवयुवक जो गाड़ी चला रहा था…
उसने शीशा नीचा कर सिर  बाहर निकाल कर पूछा:
“क्या बात है इंस्पेक्टर…?”
रमलू  नै  एक झापड़ उसके गाल पर रसीद किया…
युवक: “अरे, मारा क्यों…?”
रमलू : “जब हरियाणा  पुलिस का ट्रैफिक इंस्पेक्टर रमलू  किसी गाड़ी को रुकण  खातर कहता है…
तो ड्राइवर को गाड़ी के कागजात अपने हाथ मैं पकड़ें  हुये  होणा  चाहिए…!”
युवक: “सारी इंस्पेक्टर…….
मैं पहली बार हरियाणा  आया हूँ….!”
फिर उसने ग्लव कंपार्टमेंट से पेपर्स निकाल कर दिखाये..!
रमलू  नै  पेपर्स का मुआयना किया फिर बोल्या :
“ठीक सै ….राख  ले ….!”
फिर घूमकर पैसेन्जर सीट की ओर गया और शीशा ठकठकाया…!!
पैसेन्जर सीट पर बैठा दूसरा युवक शीशा गिराकर सिर  बाहर निकाल कर पूछा :-
“हाँ बोलिए….?”
तड़ाक…!
एक झापड़ रमलू  नै  उसकै  भी  जड़  दिया ..!
“अरे ….! मैंने क्या किया …?”
रमलू : “या  तेरी  हेकड़ी तारण  की  खातर …!”
युवक:- “पर मैंने तो कोई हेकड़ी नहीं दिखाई…?”
रमलू  :- “इबै  नहीं दिखाई, पर मैं जानूँ  सूँ ….
एक किलोमीटर आगै  जाकै तूँ  अपने दोस्त तैं  कैहन्ता --
“ओ  दो कौड़ी का इंस्पेक्टर मेरै  मारता …. तो बताता उसनै ….!”



 😛

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