एक बार रमलू ने सार्वजनिक स्थान पर भैंस बाधने के लिये खूंटा गाड़ राख्या था। दुसरे गाँव आल्याँ नै खूंटा उखाड़ने का अनुरोध करया पर रमलू नै बात नहीं मानी। अन्त में पन्चायत बुलायी गयी।
पन्चो नै रमलू तैं कहा -तनै खूंटा गलत जगह गाड़ राख्या सै ।
रमलू - मानता हूँ भाई।
रमलू - मानता हूँ भाई।
पन्च- खूंटा यहाँ नहीं गाड़ना चाहिए था।
रमलू - मान्या भाइ।
रमलू - मान्या भाइ।
पन्च- खूंटे से टकरा कर बच्चों को चोट लाग सकै है।
रमलू - मानता हूं।
रमलू - मानता हूं।
पन्च- भैंस सार्वजनिक स्थान पर गोबर करती है, गन्दगि फैलै सै ।
रमलू - मानता हूं।
रमलू - मानता हूं।
पन्च- भैंस बालकां कै सिन्ग पुन्छ भी मार दे सै ।
रमलू - मानता हूं,
मनै थारी सारी बात मानी। इब पन्च लोगों मेरी एक ही बात मान ल्यो ।
रमलू - मानता हूं,
मनै थारी सारी बात मानी। इब पन्च लोगों मेरी एक ही बात मान ल्यो ।
पन्च- बताओ अपनी बात!!!
रमलू - खूं टा आड़े ऐ गडैगा ।।
रमलू - खूं टा आड़े ऐ गडैगा ।।
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