भेली
हरियाणा मैं भात न्योतने की एक प्रथा है। एक बै एक ताई भात न्योतन दिल्ली के बवाना गाँव मैं जाथी। ओचन्दी बार्डर पै पुलिस नै भेली (5 किलो गुड़) पकड़ ली अर थानेदार बोल्या-- ताई गुड़ गुड़ दिल्ली मैं कोणी जा सकदा।ताई बोली - दरोगा जी मेरा भाई चाला सै । जै गुड़ नहीं लेकै गयी तो बेरा ना के के सुनावैगा।मन्नै यो गुड़ ले जाणदे।
थानेदार कुछ पिस्से लेकै जाण देना चाहवै। बुढ़िया बहोत गिड़ गिड़ाई पर थानेदार कोण्या मान्या ।फेर बुढ़िया सोच साच कै बोली-- भाई बिना भेली तो मैं नहीं जाऊं अर भेली तूँ नहीं ले जावण दे। तै फेर न्यूं कर चार मार्च का फ़ाग आले दिन का ब्याह सै अर या भेली तोहें राख अर उस दिन आ जाईये ।
हरियाणा मैं भात न्योतने की एक प्रथा है। एक बै एक ताई भात न्योतन दिल्ली के बवाना गाँव मैं जाथी। ओचन्दी बार्डर पै पुलिस नै भेली (5 किलो गुड़) पकड़ ली अर थानेदार बोल्या-- ताई गुड़ गुड़ दिल्ली मैं कोणी जा सकदा।ताई बोली - दरोगा जी मेरा भाई चाला सै । जै गुड़ नहीं लेकै गयी तो बेरा ना के के सुनावैगा।मन्नै यो गुड़ ले जाणदे।
थानेदार कुछ पिस्से लेकै जाण देना चाहवै। बुढ़िया बहोत गिड़ गिड़ाई पर थानेदार कोण्या मान्या ।फेर बुढ़िया सोच साच कै बोली-- भाई बिना भेली तो मैं नहीं जाऊं अर भेली तूँ नहीं ले जावण दे। तै फेर न्यूं कर चार मार्च का फ़ाग आले दिन का ब्याह सै अर या भेली तोहें राख अर उस दिन आ जाईये ।
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