सत्तू राह मैं जांदी होई छोरी तैं बूझन लाग्या --तूं मनै जानै सै ? कमली -- ना , कौन सै तूं ? सत्तू -- मैं ओये सूँ जो तनै दो दिन पहलम बी नहीं पिछान्या था |
मास्टर जी ---धिरतराष्ट्र कै १०० बालक थे अर पांडव कै पाँच , इसा क्यूं था ? रमलू --- मास्टर जी साँझ नै ज्योत बाल कै कृशन जी महाराज धोरै बूझुंगा फेर बताऊँगा
रमलू फकीर अर अम्बानी अमीर का एक बार सूट बैथ्ग्य बात करण का | अम्बानी जी बोले --अच्छा रमलू न्यूं बता अक किस करना मेहनत सै अक या मजा सै ? रमलू बोल्या --अम्बानी जी क्यूं मजाक करो सो गरीब की गेल्याँ ? अम्बानी --नहीं रमलू मैं असल मैं जानना चाहूं सूँ | रमलू बोल्या -- अम्बानी साहब जरूर मजा होगा , नाह तै मेहनत होती तै थाम भी मेरे पै ए करवांदे||
आंधी चल रही ये नहीं थमीं यारो रात की गर्द मेरे चेहरे पे जमीं यारो कुछ ठूंठ खड़े हैं कहीं कहीं मेरे जैसे कुछ उखड़े पड़े हैं कहीं तुम्हारे जैसे हम सब बेचें हैं इसके थपेड़े खाकर तुम बैठ गये अपने महलों में जाकर यह आंधी आज किसे साल रही देखो झोंपड़ी इधर उधर उछाल रही देखो
एक बार रमलू की घर आली चांदो रमलू तीं बोली -- अपने ब्याह नै घने ए साल होगे | आज तो थाम मने एक बात साच्ची साच बताओ |रमलू बोल्या -- कौनसी बात ? चांदो बोली -- थाम मने नयों बता दयो अक ब्याह तैं पहलम थारा कितनी छोरीयाँ तैं याराना था ? या बात सुन कै रमलू एक दम चुप होग्या अर घनी ए वार ताहीं कोन्या बोल्या | रमलू नै चुप देख कै चांदो बोली -- तेरी बोलती बंद क्यां तैं होगी ? रमलू बोल्या -- चुप होज्या पहल्यां गिन लेन दे |
एक गुजराती बाबू के २ बालक थे |रमलू अर कमलू | रमलू -- पापा , कमलू आपको गधे की बराबर बी कोनी समझता कमलू- नहीं पापा , यूं झूठ बोलै सै | मैं तो समझूं सूँ |
मखौलिया बनिया -भगवान जै तूं मने १०० रपईये दे दे तो ५० मैं मंदिर मैं चढ़ा द्यूंगा | थोड़ी सी वार मैं जब वो थोड़ी सी दूर गया तो ५० रपईये पागे| मखौलिया बनिया बोल्या--वह रै राम जी ,इतना बी भरोषा कोनी करया अपने रपईये पहल्में काट लिए तनै
रविवार, 22 अप्रैल 2012
रमलू नै अपना गधा बेचना था . रमलू नै अपने सारे दोस्तों को एस ऍम एस करया ---थामनै कदे किसे गधे की जरूरत हो तो मनै याद कर लियो |
रमलू की घरआली कै एक छोरा पैदा हुया | पैदा होंते की साथ वो नर्स नै बोल्या -- मो बा इल लेरी सै के?? नर्स बोली -- क्यूं के करेगा मो बा इल का ?? छोरे नै अंगड़ाई सी ली अर बोल्या --मेरी दोस्त को एक एस ऍम एस करना था |
रमलू नै अपने दोस्त ताहीं कहया -- देख वा छोरी मनै देख कै हँसन लागरी सै |
ठ्मलू नै जवाब दिया --जब मनै तूं पहली बरियाँ देख्या था तो तीन दिन ताहीं अपनी हांसी कोनी रोक पाया था |
एक गाम की नटखट छोरी डाकघर मैं मनी आर्डर करवान गयी |
पोस्ट मास्टर --मैडम यो नोट तो पाट्या औड सै | इसनै बादल दे |
नटखट छोरी बोली -- मैं अपनी मम्मी नै पीसे भेज री सूँ | फट या औड नोट भेजूं कै नया थामनै के फरक पड़े सै ?
बोस -- तुम्हें ड्राइवर की जॉब दे रहा हूँ | स्टार्टिंग सैलरी २००० रूपैये | ठीक सै ना
हरयाणवी डॉ इवर -- यु आर ग्रेट सर ! गाड्डी स्टार्ट करने की सैलरी तै ठीक सै ---बट?? गाड्डी चलावन की सैलरी कितनी सै???