शनिवार, 21 अप्रैल 2012

तेरी ख़ाल तरवाऊँगा 
रमलू सते हर के बाग़ मैं रोज आम चोरी कर कै लियान्दा अर रजबाहे के पुल बै बैठ कै मौज तै खानदा | सते उसतैं बहोत तंग आ ग्या | एक दिन सते नै वो मौके पै ए पाकड़ लिया अर बोल्या -- चाल घरां चाल कै तेरे बाबू धोरै तेरी जम कै पिटाई करवाऊँगा | रमलू सते तैं बोल्या --- घरां जावन की के जरूरत सै ? सते बोल्या और के चोरी बी करै अर सीना जोरी बी करै| चाल घरां तेरे बाबू धोरै | रमलू बोल्या -- घरां जावन की के जरूरत सै ? सते-- क्यूं ? वो मेरा बाबू तो थारले उस अमरुद के पेड़ पै चढ़ कै अमरुद तोड़न लाग रया सै!! 

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