चौधरी साहब अपनी पत्नी और ग्यारह बालकों के साथ सर्कस देखण गये लाल किला मैदान के धोरै पहोंचे | एक हरयाणा का सिपाही टकर ग्या |चौराहे पै उस सिपाही नै रोक लिया | चौधरी साहब नै छोह मैं आ कै बूझ्या ," आखिर म नै करया के सै ?"
" कुछ ना कुछ पवाडा तो रचे राख्या सै जो या इतनी भीड़ तनै घेर री सै |" सिपाही नै अकड़ कै कहया |
" कुछ ना कुछ पवाडा तो रचे राख्या सै जो या इतनी भीड़ तनै घेर री सै |" सिपाही नै अकड़ कै कहया |
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