तीन मंजली ईमारत की तीसरी मंजिल तैं थोड़ा सा पानी नीचे कै जानते होए एक जनाब के सिर पै पड्या | " अरै पानी क्यूं फेंक रहे सो ?" जनाब नै चिल्ला कै रूका मारया |" माडा सोच समझ कै बोल | इस ढाल का झूठा इल्जाम मतना ला वै | मैं पानी कित फेंकूं सूँ | मैं तो अपने बालक नै शु शु करवान लाग रया सूँ |
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