एक दिन रमलू आ कै पडोसी चाचा तैं बोल्या :“रै चाचा…. थारी इस्तरी दे दे” चाचा अपनी लुगाई की ओर इसारा करकै बोल्या :“ले जा… वा बैठी।।”रमलू चुप चाप देखन लाग्या और बोल्या ..“चाचा यो नहीं.. कपडे हाली चाहिये ।।”चाचा बोल्या :“रै बावले , या तनै बगैर कपड़याँ की दीखे है के।।”रमलू गुस्से मैं चीख्या “रै चाचा.. तू बावला ना बनै .. करंट ह़ाली इस्त्री चाहिए . करंट हाली…” चाचा भी उछलकै बोल्या ,“बावली पूँछ…. हाथ तो ला कै देख..करंट ना मारै , फेर बात करीए!!!”
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