बुधवार, 27 अप्रैल 2016

इस्तरी


एक दिन रमलू आ कै  पडोसी चाचा तैं  बोल्या :“रै  चाचा…. थारी इस्तरी दे दे” चाचा अपनी  लुगाई की ओर इसारा  करकै  बोल्या :“ले जा… वा बैठी।।”रमलू  चुप चाप देखन लाग्या और बोल्या ..“चाचा यो नहीं.. कपडे हाली चाहिये ।।”चाचा  बोल्या :“रै  बावले , या तनै बगैर कपड़याँ  की दीखे है के।।”रमलू  गुस्से  मैं  चीख्या “रै  चाचा.. तू बावला  ना बनै .. करंट ह़ाली इस्त्री चाहिए . करंट हाली…” चाचा भी उछलकै  बोल्या ,“बावली पूँछ…. हाथ तो ला कै  देख..करंट ना मारै , फेर बात करीए!!!”


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