रविवार, 17 अप्रैल 2016

आपरेशन के बाद रमलू  बोला:-
“डाक्टर साहब,
क्या अब मैं रोग मुक्त हूँ?”
.
.
.
सामने से जवाब मिला:- “बेटा,
डाक्टर साहब तो धरती पर ही रह गए,
मैं तो चित्र गुप्त  हूँ ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें