मंगलवार, 28 अगस्त 2012

दो दो पत्नियों के राखन के मामले मैं मुकदमा चाल रहया था नफे पै | ( आज काल तो हर तीसरे घर मैं मुकदमा चाल स कै सै ) कई बरसां केस चाल्या | आखिर मैं जज नै फैंसला सुनाया ," आरोप सिद्ध ना होने कर कै नफे सिंह को बरी करया जा सै |" नफे बोल्या ," पर जज साहब म नै इतना और बता दयो अक इब मैं कौनसी धोरै जाऊं ?"
 विदाई के बखत बेटी माँ तै लिपट कै रोवन लागी तो  माँ  उसनै चुप करान्ते  होयें बोली ," बेटी , रोया नहीं करते ! खुशी खुशी जाओ ! आखिर मैं भी तो एक दिन अपने माता पिता नै छोड़ कै तुम्हारे पापा की साथ आई थी |"
बेटी सुबकती सुबकती बोली ," मम्मी तुम तो पापा के साथ आई थी ना | मैं तो एक अनजान छोरे की साथ जान लाग री सूँ ना |"
फल विक्रेता -- ( ग्राहक तैं बोल्या ) -- "साहब , ये सेब कश्मीर के सें ले ल्यो |" 
ग्राहक -- ना ना म नै बसी फल कोन्या चाहियें | वहां नहीं बिक़े तो यहाँ ठा ल्याया | या डै बेच कै हम नै ठगना चाह वै   सै  

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 शहरी बेटा -- माँ म नै थोड़ा चूरन दे दो , खट्टी डकार आवैं सें |
शहरी माँ --- कोए बात ना बेटा , थोड़ी सी चिन्नी खा ले |
 एक शिक्षिका नै एक छात्र से पूछ्या ," तुमने गे पर निबंध क्यों नहीं लिख्या ?" 
छात्र ," मैडम , मनै  उस पर लिखना शुरू करया ए ठा अक वा भाज गी" 

SHADEE SHUDA

 एक शिक्षक अपनी कक्षा मैं मखियों के बारे मैं छात्रों को बतावै था अक एक अकेली माखी अपने जीवन काल मैं लाखों अंडे देवै सै |
या बात सुन कै एक छात्र नै दूसरे छात्र के कान मैं कहया ," एक एकली माखी लाखों अंडे देवै सै तो शादी शुदा माखी का तो औड ए कोन्या कोए बेरा ना कितने लाख अंडे देंती होगी |"

Gamoli

 एक गामौली पहली बरियाँ शहर मैं आया | सड़क के बीचों बीच उसनै चालतें देख कै ट्रैफिक पुलिस के जवान नै टोक दिया ," सड़क के बीच मैं क्यों चल रहे हो , किनारे किनारे चलो |"
" अरे वाह !! मनै बीच मैं चलन तैं रोकै सै अर आप चौराहे के बीचों बीच खड्या |"  गामौली नै गात डाट कै कहया | 

सोमवार, 27 अगस्त 2012

(2) Ranbir Singh Dahiya

(2) Ranbir Singh Dahiya

Greed

लालच बुरी बला --------------------------------------
बहुत पुरानी बात सै । रोहतक के एक धनी व्यापारी के रसोईघर में एक कबूतर नै घोंसला बनाया हुया था। एक दिन एक लालची कौआ उधर आ निकलया । वहां मछली को देखकर उसके मुंह में पानी भर आया। तब उसने सोचया , मुझे इस रसोईघर में घुसना चाहिए, पर कैसे?

तभी उसकी निगाह कबूतर पर जा पड़ी। उसने सोचया कि यदि मैं कबूतर से दोस्ती कर लूं तो शायद बात बन जावै ।

-- कबूतर
 जब दाना चुगने बाहर निकला तो कौआ उसके साथ लाग लिया । थोड़ी ही देर में कबूतर नै जब पीछे मुड़कै देखया तो अपने पीछे कौए को पाया।

उसने पूछा- तुम मेरे पीछे क्यों लगे हो?

कौए नै मीठे स्वर में कहया - तुम मुझे अच्छे लगते हो। इसलिए तुमसे दोस्ती करना चाहूं हूं।

कबूतर नै कहया - बात तो तुम ठीक कह रहे हो, मगर हमारा-तुम्हारा भोजन अलग-अलग है। मैं बीज खाता हूं अर तुम कीड़े खाओ सो |
कौए ने चापलूसी करते हुए कहया - कोई बात नहीं, हम इकट्ठे रह लेंगे।
शाम को दोनों पेट भरकर वापस आ गए।

व्यापारी ने कबूतर के साथ कौए को भी देख्या तो सोच्या अक शायद उसका मित्र होगा।

एक दिन व्यापारी ने रसोइए से कहया , आज कुछ मेहमान आरे सें । उनके लिए स्वादिष्ट मछलियां बनाना।
कौआ यह सब सुन रहा था।
रसोइए ने स्वादिष्ट मछलियां बनाईं।
तभी कबूतर कोए तैं बोल्या चाल अपन खाना खान बाहर चलते हैं |
मक्कार कौए ने कहया - आज मेरा पेट दर्द करै है, तुम अकेले ही चले जाओ।
कबूतर भोजन की तलाश में बाहर निकल गया।
उधर कौआ रसोइए के बाहर निकलने का इंतजार कर रहया था। जैसे ही रसोइया बाहर निकला, कौआ तुरंत थाली की ओर झप ttyटया और मछली का टुकड़ा मुंह में भरकर घोंसले में जा बैठया अर खावन लगया ।

रसोइए को जब रसोई में खटपट की आवाज सुनाई दी तो वो वापस रसोई की ओर लपकया । उसने देखा कौआ घोंसले में बैठा मछली का टुकड़ा मजे से खा रहा है।

रसोइए को बहुत गुस्सा आया और उसने कौए की गरदन पकड़ कर मरोड़ दी।

शाम को जब कबूतर दाना चुगकर आया तो उसने कौए का हश्र देखया ।
जब उसने घोंसले में मछली का अधखाया टुकड़ा पड़ा देखा तो उसकी समझ में आ गया कि उसने जरूर लालच किया होगा तभी उसकी यह हालत हुई है

BINA SOCHE SAMJHE

बिना सोचें समझें --------------------------------------------------
एक गांव में एक ब्राह्मण रहया करता। उसकी पत्नी कै कोए ओलाद नहीं थी। उसने मन बहलाने के लिए एक नेवला पाल लिया था। नेवले को ब्राह्मण के घर में घूमने-फिरने की पूरी आजादी tथी। ब्राह्मणी को नेवला बहोतै प्यारा था। 

कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणी के घर एक बेटे का जन्म हुआ। ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहया अक इब महारै संतान हो गई है, इसलिए
 नेवले को घर तैं काढ दो। कहीं ऐसा न हो कि नेवला बच्चे का नुकसान कर दे। ब्राह्मणी ने ब्राह्मण की बात न मानी।

एक दिन ब्राह्मणी कुंए पर पानी भरने गई। बच्चा पालने में सो रहया था अर नेवला पालने के पास आराम कररया था।

इतने में किसी तरफ से घर में एक सांप आ गया। वह बच्चे की कांहीं काटने को बढ़या । नेवले नै यह सब देख लिया। नेवला सांप का शत्रु हो सै । नेवले ने सांप के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। घर में खून ही खून हो गया। नेवले ने बच्चे की जान बचा दी यह दिखाने के लिए वह घर के दरवाजे पै आ बैठया ।


ब्राह्मणी जब कुँए तैं पानी भरकै आई तब उसने खून से लथपथ नेवले को दरवाजे पर देखया । वह नेवले को देखकै घबरा गई और यह समझी कि उसने बच्चे को मार डाला है, इसलिए गुस्से में ब्राह्मणी ने नेवले पर पानी भरा घड़ा दे मारया । 

ब्राह्मणी रोती हुई घर के अंदर गई, देखा कि बच्चा पालने में सोया हुआ है। पास में सांप मरा हुआ पड़या है। यह देखकै वह अपनी भूल पर पछताने लगी, उसको अपनी भूल का बेरा पाट्या।

janamdin

भतेरी (अपने छोटे पुत्र से) - तूं अपने जन्मदिन पर किस-किसको बुलाना चाहवै सै ? 
बल्ले - दादा-दादी, मामा, चाचा-चाची को। आखिर मनै गिफ्ट अर रुपए तो इन्हीं लोगों से ही मिलेंगे ना ।

लठ की भाष्या

लठ की भाष्या
एक बै रमलू खेत मैं रेडियो सुनै था। रेडियो पै एक लुगाई बता वै थी अक , बंबई मै बाढ़ आ गी, गुजरात मै हालण आग्या, दिल्ली मैं पारलियामेंट … रमलू नै देख्या पाच्छै नाका टूट्या पड़्या सै , अर पाणी दूसरे के खेत मैं जावन लाग रहया सै । रमलू छोह मैं आकै रेड़ियो कै दो लट्ठ मारकै बोल्या – दूर-दूर की बताण लाग री सै , लवै नाका टूट्या पड़या सै , यो बतावण  मैं के तेरा मुंह दुखै था ।

custmer care

पिया तेरी मने घणी याद आवै हो ।
रात नै नींद कति बी नहीं आवै हो ।
फोन पर बात करू जी ललचावै हो |
या कस्टमर केयर की छोरी डरावै हो |
सैड दे सी बै लैंस मने वा बता वै हो |

HANU--MAAN

रमलू नै कमलू ताहीं कहया ," अरे तनै बेरा सै के हनुमान जाट था ?"
कमलू बोल्या ," तनै क्यूकर बेरा पाट्या ?"
रमलू बोल्या ," घर आली तो राम की थी सीता अर आग हनुमान नै अपनी पूंछ में लवा ली | जाट बिना और कोए इस्सा काम कौन कर सकै सै ?

Shaharee baboo

एक शहरी बाबू जी एक गामौली तैं रास्ता बूझन लाग्या | गामौली बोल्या ," न्यूं कर तूं आगे सी जा कै सुधे हाथ नै हो लिए अर फेर बीस कदम चल कै तूं उलटे हाथ नै हो लिए |" बाबू जी बोल्या ," भाई साहब मैं तो आप से आप करके बात कर रहा हूँ और आप मुझे तूं तूं बोल रहे हो |" गामौली बोल्या ," फॉर के तनै बाबू बोलूँ ?"

सोमवार, 20 अगस्त 2012

tees ka ghata


PROFESSOR


PADHAYEE



ICE CREAM


chavanni