सोमवार, 27 अगस्त 2012

Greed

लालच बुरी बला --------------------------------------
बहुत पुरानी बात सै । रोहतक के एक धनी व्यापारी के रसोईघर में एक कबूतर नै घोंसला बनाया हुया था। एक दिन एक लालची कौआ उधर आ निकलया । वहां मछली को देखकर उसके मुंह में पानी भर आया। तब उसने सोचया , मुझे इस रसोईघर में घुसना चाहिए, पर कैसे?

तभी उसकी निगाह कबूतर पर जा पड़ी। उसने सोचया कि यदि मैं कबूतर से दोस्ती कर लूं तो शायद बात बन जावै ।

-- कबूतर
 जब दाना चुगने बाहर निकला तो कौआ उसके साथ लाग लिया । थोड़ी ही देर में कबूतर नै जब पीछे मुड़कै देखया तो अपने पीछे कौए को पाया।

उसने पूछा- तुम मेरे पीछे क्यों लगे हो?

कौए नै मीठे स्वर में कहया - तुम मुझे अच्छे लगते हो। इसलिए तुमसे दोस्ती करना चाहूं हूं।

कबूतर नै कहया - बात तो तुम ठीक कह रहे हो, मगर हमारा-तुम्हारा भोजन अलग-अलग है। मैं बीज खाता हूं अर तुम कीड़े खाओ सो |
कौए ने चापलूसी करते हुए कहया - कोई बात नहीं, हम इकट्ठे रह लेंगे।
शाम को दोनों पेट भरकर वापस आ गए।

व्यापारी ने कबूतर के साथ कौए को भी देख्या तो सोच्या अक शायद उसका मित्र होगा।

एक दिन व्यापारी ने रसोइए से कहया , आज कुछ मेहमान आरे सें । उनके लिए स्वादिष्ट मछलियां बनाना।
कौआ यह सब सुन रहा था।
रसोइए ने स्वादिष्ट मछलियां बनाईं।
तभी कबूतर कोए तैं बोल्या चाल अपन खाना खान बाहर चलते हैं |
मक्कार कौए ने कहया - आज मेरा पेट दर्द करै है, तुम अकेले ही चले जाओ।
कबूतर भोजन की तलाश में बाहर निकल गया।
उधर कौआ रसोइए के बाहर निकलने का इंतजार कर रहया था। जैसे ही रसोइया बाहर निकला, कौआ तुरंत थाली की ओर झप ttyटया और मछली का टुकड़ा मुंह में भरकर घोंसले में जा बैठया अर खावन लगया ।

रसोइए को जब रसोई में खटपट की आवाज सुनाई दी तो वो वापस रसोई की ओर लपकया । उसने देखा कौआ घोंसले में बैठा मछली का टुकड़ा मजे से खा रहा है।

रसोइए को बहुत गुस्सा आया और उसने कौए की गरदन पकड़ कर मरोड़ दी।

शाम को जब कबूतर दाना चुगकर आया तो उसने कौए का हश्र देखया ।
जब उसने घोंसले में मछली का अधखाया टुकड़ा पड़ा देखा तो उसकी समझ में आ गया कि उसने जरूर लालच किया होगा तभी उसकी यह हालत हुई है

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