रमलू चिकित्सक के पास दुबारा जाता है... चिकित्सक : दवाई पी-ली थी या नहीं? रमलू : नहीं Doctor साहब दवाई तो हरी थी. चिकित्सक- मेरा मतलब है दवाई ले ली थी ना? रमलू - हाँ doctor साहब आपने दी, तो मैंने ले ली थी. चिकित्सक- अरे यार दवाई की शीशी खा-ली थी ना? रमलू - नहीं doctor शीशी तो भरी हुई थी. चिकित्सक - अबे गधे दवाई को पी-लिया था ना? \ रमलू - अरे dr साहब पीलिया (juandice) तो मुझे था!
रमलू : पिता के रूप में मुझे गर्व है कि मेरा पुत्र मेडिकल कॉलेज में है। कमलू :अरे वाह! वहां क्या पढ़ाई कर रहा है वह? रमलू : वह पढ़ नहीं रहा है, वहां उसे पढ़ा जा रहा है।
दस साल का रमलू बहुत ध्यान से एक किताब पढ़ रहा था, जिसका टाइटल था, 'बच्चों का पालन-पोषण कैसे करें'? मां: तुम इस किताब को क्यों पढ़ रहे हो? रमलू : मैं ये देखना चाहता हूं कि मेरा पालन-पोषण ठीक से हो रहा है या नहीं ?
एक बार की बात मुढाल हल्के के M.L.A. तहिं चौधरी बन्सी लाल नै हरियाणा State Assembly का Speaker बना दिया। जब मुढाल हल्के के लोग उस M.L.A. धोरै नौकरी मांगन गये, तो वो बोल्या ‘भाई..चौधरी साब नै मै निरा बाजण का बना दिया, नौकरी कडे तैं दयु ‘।
एक बर रमलू चा पीवण एक चा के खोखे पै चल्या गया । बोल्या ---रै नीकू एक चा बनाईये । ईतने मैं उसका याड़ी कमलू आज्या सै । बोल्या --रै नीकू न्यूँ करिये दो मैं कर ल्याईये । थोड़ी सी वार मैं एक और याड़ी धमलू आज्या सै । बोल्या --रै नीकू न्यूँ करिये तीन मैं कर ल्याईये । थोड़ा बतलाये । इतनै ठमलू और आग्या । बोल्या --रै नीकू चार मैं कर ल्याइए । चा पीयें पाछै रमलू बोल्या --रै नीकू कितने रुपैये होगे ? नीकू -- रपैये रुपैये छोड़ तूँ न्यूँ कर ये कप धोज्या।
एक बै रमलू का अर कमलू का पड़ोस था | कमलू का बुड्ढा बाबू मर गया | अर रमलू हर लामणी लाग रे थे किम्मे ध्यान ना दिया | कई दिन पाछे :- कमलू — आ भाई , हाम भोत नाराज सां ,तम मेरे बाबू का गोड़ा मोड्न ना आये |रमलू —– नाराज ना होवे भाई ,इबकै कोए मरेगा जब आ जावान्गे |
एक चौधरी साहब के बेटे नै एक नवाब साहब के बेटे को पीट दिया । नवाब साहब शिकायत करने गए तो बोले—
हुज़ूर चौधरी साहब आपके लखत-ऐ-जिगर ने हमारे नूर-ऐ-चश्म को बड़ी बे-रहमी से पीटा है | आइन्दा के लिए ख़बरदार कर दीजियेगा ।
अगले दिन नवाबजादे ने चौधरी साहब के बेटे को पीट दिया तो गुस्साए चौधरी साहब नवाब को बोले—” देख रै गाडे, अपने सांड नै डाट लिए नहीं तै लठ्ठां लठ्ठां देदड दयांगे !”
एक बार रमलू अर दो तीन नए नए जवान रोहतक मैं कै कार लिए जावैं थे सोनीपत स्टैंड धोरे जाके बिचल गे ! एक पुलिसिया दिख्या तो एक नाड काढ कै बोल्या ---दिल्ली जाना सै ! पुलिसिया बोल्या--- तो जा भाई मैं कुन्सा तन्ने रोकूँ सूँ !
दिल के दर्द को शब्दों में ढाला नहीं गया गम के आंसूं को आँखों से निकाला नहीं गया उस बेवफा ने मुझे दर्द इसलिए दिया बहन क्योंकि उससे मेरा प्यार सम्भाला नहीं गया