शनिवार, 15 अगस्त 2015

खून की कोई जात नहीं होती

खून की कोई जात नहीं होती
खून के चार ग्रुप जानती है
साइंस ए, बी, एबी, ओ  में भी 
पोजिटिव ए बी एबी और ओ
नेगेटिव  ए बी एबी और ओ  हैं  
इसके अलावा दहिया का खून
हुड्डा का खून अलग नहीं होता
मलिक के खून में भी यही ग्रुप होते
तो फिर गोत्रों के आधार पर
इतनी मारा मारी क्यों ?
बहुत कोशिश में हूँ समझने की
अब कुछ कुछ समझ आ रहा है ||

मेरे हिस्साब से  हम आज के सन्दर्भ में पुरानी कल्चर के बेहतर पक्षों की नीव पर एक बेहतर सर्वमान्य ग्रामीण कल्चर का विकास करना  चाहते है और जो गंदगी , कूपमंडूकता , पिछड़ापन तथा गैरबराबरी की कुरीतियां थी उनको छोड़ने के लिए नवजागरण के वास्ते सबको मिलकर समाज सुधार को घर घर पहुँचाना होगा । आधुनिकता के नाम पर परोसी जा रही अंध उपभोग्तावादी संस्कृति से भी झूझना होगा । 



साथ तुम्हारा इन्कलाब नारा इस कदर भा गया 
मकसद वीरान जिन्दगी का जैसे फिर से पा गया 
मोम के घरों में बैठे लोग हमारे घर जलाने आये 
जला दिए हमारे मग़र अपने भी ना बचा पाये 
तबाह कर दिया जहान को मुनाफा हमें खा गया 
रास्ता ही गल्त पकड़ा हमें भी उसी पर चलाया है 
स्वर्ग नर्क के पचड़े में तुम्हीं ने हमको  फंसाया है  
भगवान और बाबाओं का खेल समझ में आ गया 
आशा बाबू एक  प्रवचन के कई लाख कमाते हैं 
निर्मल बाबू नकली लोग पैसे दे कर के  बुलाते हैं 
भगवान की आड़ में मुनाफा दुनिया पर छा गया 
जात गौत उंच नीच का नारा हमको अब खा गया 

शनिवार, 9 मई 2015

एक सनकी राजा के पास एक बकरा था। उस बकरे से इतनी तेज बदबू आती थी कि कोई उसके पास एक मिनट भी खड़ा नहीं रह सकता था।

राजा ने सबको कहलवाया: जो इस बकरे के साथ 5 मिनट तक एक कमरे में रहेगा, उसे इनाम मिलेगा।

एक आदमी आया और उसे कमरे में बकरे के साथ बंद कर दिया गया। डेढ़ मिनट बीतते-बीतते वह बाहर निकल आया।

दूसरा आदमी अंदर गया और वह करीब तीन मिनट तक उस बकरे के साथ अंदर रहा और फिर उसे भी न रहा गया।

तीसरे आदमी ने ताल ठोकी, लेकिन 4 मिनट से ज्यादा वह भी नहीं बिता पाया वहां।

राजा ने अब फिर घोषणा करवाई कि क्या कोई ऐसा यहां शूरवीर नहीं, जो इस बकरे के साथ पांच मिनट का वक्त गुजार पाए?

अब रमलू  के दिल को छू गई यह बात और वह उस कमरे में जाने को तैयार हो गया। वह अंदर गया।

एक मिनट गुजरे, फिर तीन मिनट, फिर पांच मिनट, फिर सात मिनट...और इस तरह करते हुए पूरे 12 मिनट गुजर गए। रमलू  की हिम्मत देख सब हैरान थे...

इसी बीच बकरा काफी तेजी से दरवाजा तोड़कर वहां से भागा निकला!!!

do chutkale

एक गधा गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड के ऑफिस पहुंचा ताकि पता कर सके के आज भी वह विश्व का सबसे अधिक मूर्ख जानवर रहा कि नहीं। 

ऑफिस से बाहर वह बुरी तरह नाराज होकर यह चिल्लाते हुए निकला कि 

'यो  कमबख्त रमलू  कौन सै  ?'

एक महिला  ने अपनी  शादीशुदा दोस्त से पूछा, भूकम्प कित  सै ? 

दूसरी  दोस्त: सहज बोल भित्तर सै  , ।

सोमवार, 5 जनवरी 2015

Ramloo

ब्याह पाछै
रमलू -इस  दिन का तो मनै बहोत दिन तैं इन्तजार था ।
कमलो - तो मैं जाऊँ ?
रमलू -  ना कति नहीं ।
कमलो - के तूँ मेरे तैं बहोत प्यार करै सै ।
रमलू - हाँ ।  पहलम भी करूँ था , इब्बी करूँ सूँ , अर आगै भी करता रहूंगा ।
कमलो - कदे मेरी गेल्याँ धोखा तो नहीं करैगा ?
रमलू -कति नहीं ।  इस तैँ आच्छा  तो यो होगा अक मैं मरे जाऊं ।
कमलो -- हमेशा प्यार करैगा ना  ?
रमलू -- हमेशा ।
 कमलो - कदे मनै पीटैगा तो नहीं ?
रमलू - ना मैं इसा मानस कोण्या ।
कमलो -- के मैं तेरे पै  भरोसा कर सकूँ सूँ ?
रमलू -हाँ
कमलो --ओह डार्लिंग !
ब्याह के पांच साल पाच्छै --------------
ईब इसनै नीचे तैं ऊपर पढ़ कै  देखो _-

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

report card

एक बर रमलू  डॉक्टर के पास पहुंचा और बोला: “डॉक्टर अंकल, क्या आपके पास दर्द की दवा है?”

डॉक्टर : “दर्द कहां है?”

रमलू : “जी, अभी तो नहीं है, लेकिन आधे घंटे बाद होज्यागा  जब मेरा बाबू  रिपोर्ट कार्ड देखैगा। ”

OVER TIME

एक बर बस में रमलू साथ खड़ी लड़की पर जानबूझकर गिरने लगा तो  लड़की गुस्से से बोली.
लड़की: क्या करते हो?
रमलू  जी सरकारी नौकरी!
लड़की: लड़कियां छेड़ना सरकारी नौकरी सै ?
 रमलू :नहीं, यह तो मैं ओवर टाइम कररया सूँ । 

दो चुटकले



एक बर गाम मैं  थानेदार आग्या, उस दिन एक भाई की भैंस  किसे का खेत चरगी थी, घना कसूता उल्हाना आया था। उसके घर आले  थानेदार नै  बोले, थानेदार साब इसने डरा धमका कै  ब्याह खातर त्यार कर ल्यो , यो ब्याह तैं  घना डरै  सै ।  थानेदार नै  डरा धमका कै  वो ब्याह क मन्ड्प मैं  बैठन नै त्यार कर दिया। दूजे गाम मैं जिब दुल्हन नै  ब्याह के  मन्ड्प मैँ  ल्याए , तो छोरा बोला “ए बेबे तेरी भैँस  नै  भी किसे का खेत चर लिया था के “?
एक  बै एक साईकल आले नै  एक बुढिया मैं  साईकल भिडा दी। बुढिया बोली “रे  ऊत तूँ  ईतनी बडी बडी मूँछ  ले रया सै , तनै शरम नही आयी  मेरै  टक्कर मारदी”। साईकल आला छोरा बोला, “क्यो ताई मूंछां  मैं  के ब्रेक लाग री सैं ”।

चूंन्ग ली हो तो

एक बर एक मारुती कार आले  नै एक ट्र्क मैं  पाछे तैं  टक्कर मारदी  अर  ट्र्क कै  नीचै  बडग्या। ट्रक  आला ड्रेवर खीड्की माँ  तैं  बोल्या, “अर भाई चूंन्ग ली हो तो बार काढ ले”।

बुधवार, 29 अक्टूबर 2014

निबंध

 निबंध

मास्टरजी  नै छात्रों से कहा कि कल गाय पर निबंध लिखकर ही आना।
 दूसरे दिन मास्टरजी ने पूछा कौन निबंध लिखकर नहीं आया है?
 रमलू  तुम बताओ निबंध लिखा?
रमलू  (छात्र): नहीं लिख पाया मास्टरजी.
मास्टरजी (गुस्से मैं ) : क्यों? और ये हाथ में प्लास्टर कैसे चढ़ गया?

रमलू : वह गाय नहीं सांड लिकड़्या  और उसनै  मेरै जोर की लात मार दी।

तीन फेरे रमलू के


पड़ौसियों  की छोरी के ब्याह में फेरे करवावण खातिर कोई बाहमण ना मिल्या । 
जब कित्तै तैं बाहमण का जुगाड़ ना हुया तै छोरी आळे रमलू नै  ले आये । रमलू  नै फेरे शुरु करवा दिये ।
तीन फेरे होण पाच्छै रमलू  बोल्या - भाइयो, रस्म तै पूरी हो-गी, छोरी की विदा करवाओ ।
छोरे आळे बाराती बोले - जी, फेरे तै सात होया करैं ।
रमलू  बोल्या - भाई, बात इसी सै, जै (अगर) उसनै रुकणा होगा तै तीन फेरयां में भी कित्तै ना जावै ।
 अर जै इसनै भाजणा ए सै, तै चाहे पच्चीस फेरे करवा ल्यो !!

सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

हरा साग



एक ताई कै तीन-चार बाळक थे । ताई रोज उन ताहीं हरा साग बणा कै दे देती - कदे सिरसम का, कदे चणे का, कदे बथुए का ।
बाळक बोले - मां, रोज-रोज हरा साग मत बणाया कर, कदे दूसरा भी बणा लिया कर ।
ताई बोल्ली - खाओ चाहे मत खाओ, मैं तै रोज हरा साग ए बणाऊंगी ।
बाळक फेर बोले - इसतैं आच्छ्या तै हामनै गळामा घाल-कै खेत में चरा ल्याया कर !

बटेऊ की हाजर जवाब सास



एक बै एक बटेऊ ससुराल गया । पहले ससुराल में साग-सब्जी, बूरा आदि मैं  तब  तक घी की धार डालते रहते थे जब तक कि मेहमान हाथ आगे कर के "बस, बस" कर के रोकता नहीं था । जब सास बूरा में घी डाल रही थी, तो बटेऊ परे-नै मुंह करकै बैठग्या - कदे "बस-बस" ना करना पड़ जावै ।
पर सासू भी कम चालाक नहीं थी । वो उसका मुंह वापस घी-बूरा की तरफ घुमा कर उसको दिखाती हुई बोली - "रै देख, बटेऊ जितणा तै दिया सै घाल, अर पहलवानी करणी सै तै आपणै घरां जा करिये" !!

गादड के कान

गादड के कान

एक बै…..एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लागरे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड़गी । गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या…..बूझिये  बहू नै…..क्यूं तंग पारी सै..?
गादडी बोल्ली…….म्हारै छोरी के बटेऊ आरे सैं……अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।
गादड छो मैं  भर कै बोल्या…..मैं देखूं सूं उननै  जाकै। अकड मैं  गादड नै  बिल तै मुंह  बाहर काढ्या  तै दोनूं कुत्यां  नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बडग्या। पर कान कुत्यां  के मुंह मैं  ए  रहगे । भीतर दूसरी गादडी नै  गादड की बहू तै कहा, पूछिये री…….मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?
गादड बोल्या………बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

छक्का1

छक्का
गरीब की बात हमेशा  बस चुनाव में  होती है
 चुनाव गए गरीब गया गरीबी फिर रोती है
हरयाणा की राजनीति गोत व जात को ढोती है
इलाकावाद की भरम फिर सबको  डबोती है
मैरिट मानवता फिर वजूद अपणा खोती  है
ये जातिगत राजनीति बीज घृणा के बोती है
"रणबीर "

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

छक्का


छक्का
गऊ शाळा और  मंदिर बणा जो  खुद की गोज भरण लगे
बण धर्म गुरु माँ बाहणां की जो ईज्जत पै नीत धरण लगे
इसे  चालबाज नेता बण कै जनता का शोषण करण लगे
बचियो इसे धर्मात्मावां तैँ जो चौड़े  द्रोपदी चीर हरण लगे
लोग इनकी भकायी मैं आकै झूठे सप्नयां मैँ तिरण लगे
झूठे वायदे पिलाकै दारू धरण विधान सभा मैं चरण लगे
"रणबीर "
सच का सौदा झूठ बेचते कट कट कर मरते देखो
जात गौत की जफी पारे रंग सेक्युलर भरते देखो
भूले हारीबीमारी याराना दवा कंपनी से करते देखो
पुलिस अफसर सब ईनसे खामखा आज़ डरते देखो
जहाँ जनता गयी वहीँ पे ये अत्याचारी घिरते देखो
काँग्रेस कभी भाजपा  इनेलो के पाले फिरते देखो 

सोमवार, 29 सितंबर 2014

बाप का नाम करया रौशन

बाप का नाम करया  रौशन
माँ रमलू तैं: बेटा यो के करण लागरया सै ? 
रमलू : माँ , मैं बाबू  का नाम इस बल्ब पर लिखण लागरया सूँ ।  
माँ : ईसा  करै सै रे बेटा ?
रमलू : मैं अपने बाबू  का नाम रौशन करण ताहिं कररया सूँ  । 
रमलू डाक्टर से -आपने कहा  था कि सुबह गेम खेलने से सेहत ठीक रहती है ,पर मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ा?

 डॉक्टर - कौन  सा गेम खेल्या था
रमलू -- वोहे

sardaar

एक बै  रमलू काँधे पै  एक तोता बिठाएं ले जावै  था | 
आगे तैं कमलू  आग्या वो बोल्या "रै रमलू यु कुन्सा जिनावर सै "| 
तोता बोल्या -"सरदार"

रमलू कमलू नै पागे दो बम्ब

रमलू कमलू नै पागे दो बम्ब 
कमलू - रमलू  नै  दो बम मिले, पुलिस नै  देवण चाल पड़े।  
कमलू रमलू तैं बूझण लाग्या: जै कोए  बम राह  में फटग्या तो?
रमलू : झूठ बोल दयांगे अर  कह दयांगे अक एकै मिल्या था.

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

apnee e liya

बाणिया (अपणी बहू तै) - मेरी कड मै भोत दर्द  हो रया सै, जा कै रमलू के घर तै आयोडैक्स  लिया
बहू - वो कोन्या दें
बाणिया - आच्छा ! भोत कन्जूस वो तै, चाल कोए ना, अपणी ए काढ ल्या अलमारी मै तै।