सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

गादड के कान

गादड के कान

एक बै…..एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लागरे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड़गी । गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या…..बूझिये  बहू नै…..क्यूं तंग पारी सै..?
गादडी बोल्ली…….म्हारै छोरी के बटेऊ आरे सैं……अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।
गादड छो मैं  भर कै बोल्या…..मैं देखूं सूं उननै  जाकै। अकड मैं  गादड नै  बिल तै मुंह  बाहर काढ्या  तै दोनूं कुत्यां  नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बडग्या। पर कान कुत्यां  के मुंह मैं  ए  रहगे । भीतर दूसरी गादडी नै  गादड की बहू तै कहा, पूछिये री…….मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?
गादड बोल्या………बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

छक्का1

छक्का
गरीब की बात हमेशा  बस चुनाव में  होती है
 चुनाव गए गरीब गया गरीबी फिर रोती है
हरयाणा की राजनीति गोत व जात को ढोती है
इलाकावाद की भरम फिर सबको  डबोती है
मैरिट मानवता फिर वजूद अपणा खोती  है
ये जातिगत राजनीति बीज घृणा के बोती है
"रणबीर "

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

छक्का


छक्का
गऊ शाळा और  मंदिर बणा जो  खुद की गोज भरण लगे
बण धर्म गुरु माँ बाहणां की जो ईज्जत पै नीत धरण लगे
इसे  चालबाज नेता बण कै जनता का शोषण करण लगे
बचियो इसे धर्मात्मावां तैँ जो चौड़े  द्रोपदी चीर हरण लगे
लोग इनकी भकायी मैं आकै झूठे सप्नयां मैँ तिरण लगे
झूठे वायदे पिलाकै दारू धरण विधान सभा मैं चरण लगे
"रणबीर "
सच का सौदा झूठ बेचते कट कट कर मरते देखो
जात गौत की जफी पारे रंग सेक्युलर भरते देखो
भूले हारीबीमारी याराना दवा कंपनी से करते देखो
पुलिस अफसर सब ईनसे खामखा आज़ डरते देखो
जहाँ जनता गयी वहीँ पे ये अत्याचारी घिरते देखो
काँग्रेस कभी भाजपा  इनेलो के पाले फिरते देखो 

सोमवार, 29 सितंबर 2014

बाप का नाम करया रौशन

बाप का नाम करया  रौशन
माँ रमलू तैं: बेटा यो के करण लागरया सै ? 
रमलू : माँ , मैं बाबू  का नाम इस बल्ब पर लिखण लागरया सूँ ।  
माँ : ईसा  करै सै रे बेटा ?
रमलू : मैं अपने बाबू  का नाम रौशन करण ताहिं कररया सूँ  । 
रमलू डाक्टर से -आपने कहा  था कि सुबह गेम खेलने से सेहत ठीक रहती है ,पर मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ा?

 डॉक्टर - कौन  सा गेम खेल्या था
रमलू -- वोहे

sardaar

एक बै  रमलू काँधे पै  एक तोता बिठाएं ले जावै  था | 
आगे तैं कमलू  आग्या वो बोल्या "रै रमलू यु कुन्सा जिनावर सै "| 
तोता बोल्या -"सरदार"

रमलू कमलू नै पागे दो बम्ब

रमलू कमलू नै पागे दो बम्ब 
कमलू - रमलू  नै  दो बम मिले, पुलिस नै  देवण चाल पड़े।  
कमलू रमलू तैं बूझण लाग्या: जै कोए  बम राह  में फटग्या तो?
रमलू : झूठ बोल दयांगे अर  कह दयांगे अक एकै मिल्या था.

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

apnee e liya

बाणिया (अपणी बहू तै) - मेरी कड मै भोत दर्द  हो रया सै, जा कै रमलू के घर तै आयोडैक्स  लिया
बहू - वो कोन्या दें
बाणिया - आच्छा ! भोत कन्जूस वो तै, चाल कोए ना, अपणी ए काढ ल्या अलमारी मै तै। 

gulgule

एक बै रमलू  घर नै  आया अर् अपनी बहु धमलो  तै बोल्या - आज मैं रामेहर के घरां  वो ए खा कै आया सूं, अर् तू भी वो ए बना ले l
धमलो  बोली-  जाय रोये वो ए का कुछ नाम भी होगा, के बनाऊ?
रमलू  बोल्या - वो ए बना, ना तै आज तेरी खैर नहीं l
इस्से तरिया  धमलो  पूछती रही अर् वो नुए कहता रहा कि वो ए बना,
अर् रमलू  नै धमलो चौखी  पीट  दी।
थोड़ी देर में एक पड़ोसन आई अर् बोली यो के कर राख्या सै  या पीट पीट  कै  तनै  गुलगुले बरगी बना दी ।
रमलू नै  दो लठ उस पड़ोसन कै  धरे अर् कह्य के तू थोड़ी हाण पहल्या आ जाती तै या बेचारी धमलो  तै ना पिटती....

रविवार, 27 जुलाई 2014

तलाक़

रमलू  और उसकी पत्नी धमलो में बिलकुल भी नहीं पटती थी. आखिरकार
 उन्होंने तलाक़ लेने का फैसला कर लिया.
जज ने उन्हें तीन महीने बाद की तारीख दी और कहा कि इन 3 महीनों के 

दौरान ज्यादा से ज्यादा समय एक साथ रहने की कोशिश करें, एक
 दूसरे से बात करें.
3 महीने बाद जब संता और उसकी पत्नी अदालत पहुँचे तो जज ने 

पूछा – “इस दौरान कितना वक्त साथ में बिताया और बातचीत
 हुई कि नहीं ?”
रमलू  – “हम लोग पूरे 5 हफ्ते साथ-साथ रहे और किसी एक भी बात पर 

सहमत नहीं हो सके …..”
धमलो  (बीच में बात काटते हुए) – “ये झूठ बोल रहे हैं योर ऑनर ! 

हम लोग 5 हफ्ते नहीं, 6 हफ्ते साथ-साथ रहे !!!”

सीख गई

धमलो (रमलू तैं ) – आपको याद है शादी के शुरूआती दिनों में जब मैं खाना बनाती थी
 तो आप मुझे ज्यादा खिलाते और खुद कम खाते थे ! …. अब ऐसा क्यों नहीं … ?
.रमलू  - क्योंकि अब तुम खाना बनाना सीख गई हो !!!

तौहीन अदालत की

रमलू नै  पत्नी के साथ मारपीट करने के जुर्म में अदालत में पेश किया गया.
जज ने रमलू की जबानी पूरी घटना ध्यान से सुनी और भविष्य में अच्छा 
व्यवहार करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया.
अगले ही दिन रमलू नै  पत्नी को फिर मारा और फिर अदालत में पेश किया गया.
जज ने कड़क कर पूछा – “तुम्हारी दुबारा ऐसा करने की हिम्मत कैसे हुई ? 
अदालत को मजाक समझते हो ?”
रमलू नै  अपनी सफाई में जज को बताया – नहीं हुजूर, आप मेरी पूरी बात सुन लीजिए. 
कल जब आपने मुझे छोड़ दिया तो अपने-आपको रिफ्रेश करने के लिए मैंने थोड़ी सी 
शराब पी ली. जब उससे कोई फर्क नहीं पड़ा तो थोड़ी-थोड़ी करके मैं पूरी बोतल पी गया. 
पीने के बाद जब मैं घर पहुंचा तो पत्नी चिल्ला कर बोली – “हरामी, आ गया नाली का पानी पीकर !”
हुजूर, मैंने चुपचाप सुन लिया, और कुछ नहीं कहा. फिर वह बोली – “कमीने, कुछ काम धंधा भी 
किया कर या केवल पैसे बर्बाद करने का ही ठेका ले रखा है … !”
हुजूर, मैंने फिर भी कुछ नहीं कहा और सोने के लिए अपने कमरे में जाने लगा. 
वह पीछे से फिर चिल्लाई – “अगर उस जज में थोड़ी सी भी अकल होती तो तू आज जेल में होता … !!!”
बस हुजूर, अदालत की तौहीन मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई …. !!!

अच्छा रेट

रमलू : माँ , मैं कल से स्कूल नहीं जाऊंगा।
ममी: क्यों बेटा, ऐसी क्या बात हो गई?
रमलू : आज स्कूल में हम सभी बच्चों का वजन किया गया था...
ममी: तो क्या हुआ?
रमलू : मनै  डर है कि अगर रेट अच्छा मिला, तो स्कूल वाले कहीं हमें बेच न डालें!!!

जैसी करनी, वैसी भरनी।

टीचर: रमलू , एक ऐसी कहानी सुनाओ जिससे कोई शिक्षा मिलती हो।
रमलू : मैंने उसको फोन किया, वह सो रही थी।
फिर उसने मुझे फोन किया, तो मैं सो रहा था।
टीचर : इसमें कौन सी शिक्षा मिलती है?
रमलू  : शिक्षा मिलती है : जैसी करनी, वैसी भरनी।

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

शर्म नीं आई

रमलू  अपणी घरआली धमलो  नै  ल्याण खातर सुसराड चल्या गया | जद वो धमलो नै  लेके अपणी सुसराड तै चाल्लण लाग्या तो उसकी सासू  नैं जुहारी म्ह उस ताई दस रपिये दे दिए | घरां आयां पाच्छे रमलू  धमलो  गेल झगड़ा करण  लाग्या अर कई देर ताहिं  झगड़ता रह्या | आखिर मैं  धमलो  तंग होकै रमलू  तैं  बूझण  लाग्यी, 'जी थाम मेरै गेल क्यान्तें झगड़ण लाग रह्ये सो?' रमलू  छोह मैं आकै  बोल्या, "तेरी मां नै  शर्म कोणी आयी |" धमलो  नै  बूझ्या , ""किस बात की शर्म?"  बोल्या, "मैं थाहरे घरां केले तो सो रपियाँ के लेकै  गया पर तेरी मां नै   जुहारी म्ह दस रपिये दे दिए |" धमलो  तपाक तैं  बोल्यी, "जी मन्ने न्यूं बताओ अक थाह्म ओड़े मन्ने लेण गए थे अक केले बेच्चण गए थे |"

नीम्बू पानी मैँ जीरा

 

ताऊ धारे  के 6 छोरे थे | वे 6 के 6 जमां काले थे | एक बार वे सारे गाम के जोहड़ में नहाण लागरे  थे | ताऊ धारे  उन्ती देख देख कै  राजी होरया था | ताऊ उन्ती देखदा देखदा अपणे धोरे खड़े रमलू  ती बोल्या - "देख मेरे छोरे !", रमलू बोल्या - "हाँ ताऊ देखे, जणू नीम्बू पाणी में जीरे के बुँदे  होए दाणे तैरण लाग रै सै |"
रमलू  सबसे बड़ा चैलेंज क्या है?
कमलू : एग्जाम में पेपर खाली छोड़कर लास्ट में लिख देना..
….कि हिम्मत है तो पास करके दिखा!

तुम्हारी भाभी से'।

एक दिन रमलू  नै  अपनी भाभी खूब पीटी ।  उसके चिल्लावण  की आवाज सुन कै  पड़ोसी देखण  आगे  अर  रमलू  तैं  बूझण  लागे  अक  के  बात होगी , इतना क्यों मार रहे हो अपनी भाभी नै ?
रमलू (गुस्से में): भाईसाहब या  मेरी  पीठ पीछे छुप -छुप के रोज मेरे सभी दोस्तों गेल्याँ  बाते करती है।
पडोसी: तुम्हे कैसे पता लगा?
रमलू : अरे मैं जब भी अपने किसी दोस्त तैं  बूझूँ  हूँ कि वो फ़ोन पै  किस गेल्याँ बात कररया   हैं, तो वो नयों ऐ  कहवै  है 'तेरी  भाभी तैं '।

लठ से गाड़ दिये

लठ से गाड़ दिये 

रमलू चार बर आठवीं जमात मैं लगातार फेल होग्या । आई बरियां वो अपने बाबू नै कहन्दा "इब कै तो लठ गाड़ आया । जइब पाँचमी बर वो पेपर दे कै नै आया तो उसके बाबू नै बूझ्या --बेटा रमलू पेपर किस होग्या ? रमलू नै कह्या -- बाबू इब कै नै तो कति  लठ सा गाड़ दिया । 
रमलू का बाबू --वाह बेटे पाछले लठ तो तेरे पै पाट्टे कोन्या अर तूँ एक लठ और गाड़ आया ।

beer

एक बार रमलू अर कमलू , किसी बियर बार में बियर पीने गये। जब वह पीने लगे तो रमलू बोला, "लगता है बाहर बारिश हो रही है। तुम ऐसा करो घर जाकर जल्दी से छतरी ले आओ।"

कमलू  गुर्राया: मुझे पता है मेरे जाने पर तुम मेरी सारी बियर पी जाओगे।

रमलू  ने उसे यकीन दिलाया कि वो उसकी बियर नहीं पियेगा। उसके हिस्से की बियर ज्यों की त्यों रखी रहेगी।

संता यह सुनकर मान गया और छतरी लेने चला गया।

जब रात गहराने लगी पर कमलू  छतरी लेकर नहीं लौटा तो बंता ने सोचा शायद रमलू  घर पर ही रुक गया है और अब नहीं आएगा। यही सोच कर उसने कमलू  का बियर वाला गिलास उठाया ही था कि बार के एक कोने की छोटी सी खिड़की से तेज आवाज आई, "अगर पीओगे तो मैं छतरी लेने नहीं जाऊंगा।"