शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

report card

एक बर रमलू  डॉक्टर के पास पहुंचा और बोला: “डॉक्टर अंकल, क्या आपके पास दर्द की दवा है?”

डॉक्टर : “दर्द कहां है?”

रमलू : “जी, अभी तो नहीं है, लेकिन आधे घंटे बाद होज्यागा  जब मेरा बाबू  रिपोर्ट कार्ड देखैगा। ”

OVER TIME

एक बर बस में रमलू साथ खड़ी लड़की पर जानबूझकर गिरने लगा तो  लड़की गुस्से से बोली.
लड़की: क्या करते हो?
रमलू  जी सरकारी नौकरी!
लड़की: लड़कियां छेड़ना सरकारी नौकरी सै ?
 रमलू :नहीं, यह तो मैं ओवर टाइम कररया सूँ । 

दो चुटकले



एक बर गाम मैं  थानेदार आग्या, उस दिन एक भाई की भैंस  किसे का खेत चरगी थी, घना कसूता उल्हाना आया था। उसके घर आले  थानेदार नै  बोले, थानेदार साब इसने डरा धमका कै  ब्याह खातर त्यार कर ल्यो , यो ब्याह तैं  घना डरै  सै ।  थानेदार नै  डरा धमका कै  वो ब्याह क मन्ड्प मैं  बैठन नै त्यार कर दिया। दूजे गाम मैं जिब दुल्हन नै  ब्याह के  मन्ड्प मैँ  ल्याए , तो छोरा बोला “ए बेबे तेरी भैँस  नै  भी किसे का खेत चर लिया था के “?
एक  बै एक साईकल आले नै  एक बुढिया मैं  साईकल भिडा दी। बुढिया बोली “रे  ऊत तूँ  ईतनी बडी बडी मूँछ  ले रया सै , तनै शरम नही आयी  मेरै  टक्कर मारदी”। साईकल आला छोरा बोला, “क्यो ताई मूंछां  मैं  के ब्रेक लाग री सैं ”।

चूंन्ग ली हो तो

एक बर एक मारुती कार आले  नै एक ट्र्क मैं  पाछे तैं  टक्कर मारदी  अर  ट्र्क कै  नीचै  बडग्या। ट्रक  आला ड्रेवर खीड्की माँ  तैं  बोल्या, “अर भाई चूंन्ग ली हो तो बार काढ ले”।

बुधवार, 29 अक्टूबर 2014

निबंध

 निबंध

मास्टरजी  नै छात्रों से कहा कि कल गाय पर निबंध लिखकर ही आना।
 दूसरे दिन मास्टरजी ने पूछा कौन निबंध लिखकर नहीं आया है?
 रमलू  तुम बताओ निबंध लिखा?
रमलू  (छात्र): नहीं लिख पाया मास्टरजी.
मास्टरजी (गुस्से मैं ) : क्यों? और ये हाथ में प्लास्टर कैसे चढ़ गया?

रमलू : वह गाय नहीं सांड लिकड़्या  और उसनै  मेरै जोर की लात मार दी।

तीन फेरे रमलू के


पड़ौसियों  की छोरी के ब्याह में फेरे करवावण खातिर कोई बाहमण ना मिल्या । 
जब कित्तै तैं बाहमण का जुगाड़ ना हुया तै छोरी आळे रमलू नै  ले आये । रमलू  नै फेरे शुरु करवा दिये ।
तीन फेरे होण पाच्छै रमलू  बोल्या - भाइयो, रस्म तै पूरी हो-गी, छोरी की विदा करवाओ ।
छोरे आळे बाराती बोले - जी, फेरे तै सात होया करैं ।
रमलू  बोल्या - भाई, बात इसी सै, जै (अगर) उसनै रुकणा होगा तै तीन फेरयां में भी कित्तै ना जावै ।
 अर जै इसनै भाजणा ए सै, तै चाहे पच्चीस फेरे करवा ल्यो !!

सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

हरा साग



एक ताई कै तीन-चार बाळक थे । ताई रोज उन ताहीं हरा साग बणा कै दे देती - कदे सिरसम का, कदे चणे का, कदे बथुए का ।
बाळक बोले - मां, रोज-रोज हरा साग मत बणाया कर, कदे दूसरा भी बणा लिया कर ।
ताई बोल्ली - खाओ चाहे मत खाओ, मैं तै रोज हरा साग ए बणाऊंगी ।
बाळक फेर बोले - इसतैं आच्छ्या तै हामनै गळामा घाल-कै खेत में चरा ल्याया कर !

बटेऊ की हाजर जवाब सास



एक बै एक बटेऊ ससुराल गया । पहले ससुराल में साग-सब्जी, बूरा आदि मैं  तब  तक घी की धार डालते रहते थे जब तक कि मेहमान हाथ आगे कर के "बस, बस" कर के रोकता नहीं था । जब सास बूरा में घी डाल रही थी, तो बटेऊ परे-नै मुंह करकै बैठग्या - कदे "बस-बस" ना करना पड़ जावै ।
पर सासू भी कम चालाक नहीं थी । वो उसका मुंह वापस घी-बूरा की तरफ घुमा कर उसको दिखाती हुई बोली - "रै देख, बटेऊ जितणा तै दिया सै घाल, अर पहलवानी करणी सै तै आपणै घरां जा करिये" !!

गादड के कान

गादड के कान

एक बै…..एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लागरे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड़गी । गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या…..बूझिये  बहू नै…..क्यूं तंग पारी सै..?
गादडी बोल्ली…….म्हारै छोरी के बटेऊ आरे सैं……अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।
गादड छो मैं  भर कै बोल्या…..मैं देखूं सूं उननै  जाकै। अकड मैं  गादड नै  बिल तै मुंह  बाहर काढ्या  तै दोनूं कुत्यां  नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बडग्या। पर कान कुत्यां  के मुंह मैं  ए  रहगे । भीतर दूसरी गादडी नै  गादड की बहू तै कहा, पूछिये री…….मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?
गादड बोल्या………बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

छक्का1

छक्का
गरीब की बात हमेशा  बस चुनाव में  होती है
 चुनाव गए गरीब गया गरीबी फिर रोती है
हरयाणा की राजनीति गोत व जात को ढोती है
इलाकावाद की भरम फिर सबको  डबोती है
मैरिट मानवता फिर वजूद अपणा खोती  है
ये जातिगत राजनीति बीज घृणा के बोती है
"रणबीर "

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

छक्का


छक्का
गऊ शाळा और  मंदिर बणा जो  खुद की गोज भरण लगे
बण धर्म गुरु माँ बाहणां की जो ईज्जत पै नीत धरण लगे
इसे  चालबाज नेता बण कै जनता का शोषण करण लगे
बचियो इसे धर्मात्मावां तैँ जो चौड़े  द्रोपदी चीर हरण लगे
लोग इनकी भकायी मैं आकै झूठे सप्नयां मैँ तिरण लगे
झूठे वायदे पिलाकै दारू धरण विधान सभा मैं चरण लगे
"रणबीर "
सच का सौदा झूठ बेचते कट कट कर मरते देखो
जात गौत की जफी पारे रंग सेक्युलर भरते देखो
भूले हारीबीमारी याराना दवा कंपनी से करते देखो
पुलिस अफसर सब ईनसे खामखा आज़ डरते देखो
जहाँ जनता गयी वहीँ पे ये अत्याचारी घिरते देखो
काँग्रेस कभी भाजपा  इनेलो के पाले फिरते देखो 

सोमवार, 29 सितंबर 2014

बाप का नाम करया रौशन

बाप का नाम करया  रौशन
माँ रमलू तैं: बेटा यो के करण लागरया सै ? 
रमलू : माँ , मैं बाबू  का नाम इस बल्ब पर लिखण लागरया सूँ ।  
माँ : ईसा  करै सै रे बेटा ?
रमलू : मैं अपने बाबू  का नाम रौशन करण ताहिं कररया सूँ  । 
रमलू डाक्टर से -आपने कहा  था कि सुबह गेम खेलने से सेहत ठीक रहती है ,पर मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ा?

 डॉक्टर - कौन  सा गेम खेल्या था
रमलू -- वोहे

sardaar

एक बै  रमलू काँधे पै  एक तोता बिठाएं ले जावै  था | 
आगे तैं कमलू  आग्या वो बोल्या "रै रमलू यु कुन्सा जिनावर सै "| 
तोता बोल्या -"सरदार"

रमलू कमलू नै पागे दो बम्ब

रमलू कमलू नै पागे दो बम्ब 
कमलू - रमलू  नै  दो बम मिले, पुलिस नै  देवण चाल पड़े।  
कमलू रमलू तैं बूझण लाग्या: जै कोए  बम राह  में फटग्या तो?
रमलू : झूठ बोल दयांगे अर  कह दयांगे अक एकै मिल्या था.

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

apnee e liya

बाणिया (अपणी बहू तै) - मेरी कड मै भोत दर्द  हो रया सै, जा कै रमलू के घर तै आयोडैक्स  लिया
बहू - वो कोन्या दें
बाणिया - आच्छा ! भोत कन्जूस वो तै, चाल कोए ना, अपणी ए काढ ल्या अलमारी मै तै। 

gulgule

एक बै रमलू  घर नै  आया अर् अपनी बहु धमलो  तै बोल्या - आज मैं रामेहर के घरां  वो ए खा कै आया सूं, अर् तू भी वो ए बना ले l
धमलो  बोली-  जाय रोये वो ए का कुछ नाम भी होगा, के बनाऊ?
रमलू  बोल्या - वो ए बना, ना तै आज तेरी खैर नहीं l
इस्से तरिया  धमलो  पूछती रही अर् वो नुए कहता रहा कि वो ए बना,
अर् रमलू  नै धमलो चौखी  पीट  दी।
थोड़ी देर में एक पड़ोसन आई अर् बोली यो के कर राख्या सै  या पीट पीट  कै  तनै  गुलगुले बरगी बना दी ।
रमलू नै  दो लठ उस पड़ोसन कै  धरे अर् कह्य के तू थोड़ी हाण पहल्या आ जाती तै या बेचारी धमलो  तै ना पिटती....

रविवार, 27 जुलाई 2014

तलाक़

रमलू  और उसकी पत्नी धमलो में बिलकुल भी नहीं पटती थी. आखिरकार
 उन्होंने तलाक़ लेने का फैसला कर लिया.
जज ने उन्हें तीन महीने बाद की तारीख दी और कहा कि इन 3 महीनों के 

दौरान ज्यादा से ज्यादा समय एक साथ रहने की कोशिश करें, एक
 दूसरे से बात करें.
3 महीने बाद जब संता और उसकी पत्नी अदालत पहुँचे तो जज ने 

पूछा – “इस दौरान कितना वक्त साथ में बिताया और बातचीत
 हुई कि नहीं ?”
रमलू  – “हम लोग पूरे 5 हफ्ते साथ-साथ रहे और किसी एक भी बात पर 

सहमत नहीं हो सके …..”
धमलो  (बीच में बात काटते हुए) – “ये झूठ बोल रहे हैं योर ऑनर ! 

हम लोग 5 हफ्ते नहीं, 6 हफ्ते साथ-साथ रहे !!!”

सीख गई

धमलो (रमलू तैं ) – आपको याद है शादी के शुरूआती दिनों में जब मैं खाना बनाती थी
 तो आप मुझे ज्यादा खिलाते और खुद कम खाते थे ! …. अब ऐसा क्यों नहीं … ?
.रमलू  - क्योंकि अब तुम खाना बनाना सीख गई हो !!!

तौहीन अदालत की

रमलू नै  पत्नी के साथ मारपीट करने के जुर्म में अदालत में पेश किया गया.
जज ने रमलू की जबानी पूरी घटना ध्यान से सुनी और भविष्य में अच्छा 
व्यवहार करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया.
अगले ही दिन रमलू नै  पत्नी को फिर मारा और फिर अदालत में पेश किया गया.
जज ने कड़क कर पूछा – “तुम्हारी दुबारा ऐसा करने की हिम्मत कैसे हुई ? 
अदालत को मजाक समझते हो ?”
रमलू नै  अपनी सफाई में जज को बताया – नहीं हुजूर, आप मेरी पूरी बात सुन लीजिए. 
कल जब आपने मुझे छोड़ दिया तो अपने-आपको रिफ्रेश करने के लिए मैंने थोड़ी सी 
शराब पी ली. जब उससे कोई फर्क नहीं पड़ा तो थोड़ी-थोड़ी करके मैं पूरी बोतल पी गया. 
पीने के बाद जब मैं घर पहुंचा तो पत्नी चिल्ला कर बोली – “हरामी, आ गया नाली का पानी पीकर !”
हुजूर, मैंने चुपचाप सुन लिया, और कुछ नहीं कहा. फिर वह बोली – “कमीने, कुछ काम धंधा भी 
किया कर या केवल पैसे बर्बाद करने का ही ठेका ले रखा है … !”
हुजूर, मैंने फिर भी कुछ नहीं कहा और सोने के लिए अपने कमरे में जाने लगा. 
वह पीछे से फिर चिल्लाई – “अगर उस जज में थोड़ी सी भी अकल होती तो तू आज जेल में होता … !!!”
बस हुजूर, अदालत की तौहीन मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई …. !!!