मंगलवार, 19 जून 2012

takat

एक बूढ़े पहलवान नै भीड़ को संबोधित करते होयें कहया ,
" मेरे मैं इबी उतनी ए ताकत सै जितनी जवानी के दिनों 
मैं थी |"
"वा क्यूकर ?" एक माणस नै बूझ ली |
" वो बड़ा सा पत्थर देखो सो ना | मैं उसनै  जवानी मैं बी
 ठाया  करदा अर  इबी  ठाऊँ  सूँ   | वो ना तो  जवानी मैं  
उठया अर ना बुढ़ापे मैं |"

कौनसी फ़िल्म

एक  युवती नै सिनेमा हाल  मैं फोन करकै 
बूझ्या -- " कौनसी   फ़िल्म लागरी  सै ?
" तेरी मांग भर दयूं |" सिनेमा के  कर्मचारी 
नै बताया |
युवती नै छोह मैं आकै कहया ," बदतमीज |"
" वा तो अगले हफ्ते लागे  गी |" उधर तैं 
आवाज  आई 

chamach

एक  आदमी नै अपनी पत्नी तैं कहया ,
" चालै नै एक कमीज खरीद लिया वाँ |" 
"क्यूं ?" पत्नी नै बूझ  लिया |
" असल मैं आजकल कमीज की साथ 
 तीन चम्मच  मुफ्त मैं दे वैं  सें | 
आज काल घर मैं चमच्यां की जरूरत सै ना| "

SAMANTA

एक  किशोरी  नै अपनी सहेली ताहीं कहया ,
" मेरी माँ अर विद्या बाल्यान मैं एक समानता सै |"
"कौनसी ?" सहेली नै बूझ्या |
" दोनूं एकै ए कंपनी के साबुन तैं नहा वें सें |"

रेफरी

फुटबाल का मैच देख रहे एक मंत्री नै रेफरी कैद इशारा करतें होयें 
खेल अधिकारी तैं कहया ," यूं कौन बदमाश सै ? खेल के मैदान मैं 
सीटी मारदा मैदान मैं आ टपकै सै |इसनै हटाओ ताकि खेल ठीक 
ढंग तैं खेल्या जा सकै |

सोमवार, 18 जून 2012

DAS ROOPAYE

मजदूर ने मालिक से कहा , " मालिक ,मुझे अभी दस रूपये दे दीजिये | शाम को मजदूरी मैं तैं काट  लियो |"
इब्ब ऐ तो कोन्या दे सकदा , क्योंकी दस रूपे टूटे कोन्या |" मालिक नै   कहया |
मजदूर बोल्या -- मनै टूटे रूपे नहीं साब्बत ही चाहियें  

बूझे आळा पंडित

बूझे आळा पंडित

गाम कै बाहर भीड़ लाग रही थी, रमलू आया खेत म्हां तैं, लाम्बा लठ ले रहया अर बोल्या - अरै के हो रहया सै ?

एक जणा बोल्या - ताऊ, यो बाहमण आगे की बतावै सै । रमलू  फेर बोल्या - हाटियो भाई मन्नै भी देखण दयो  के रोळा सै ।

रमलू बाहमण तैं बोल्या - हां भाई, तू आगे की बतावै सै ?

बाहमण - हां जी ।

रमलू  नै लठ ऊपर नै ठाया अर बोल्या - "आंच्छ्या तै, बाहमण, तू न्यूं बता यो लठ तेरे सिर में लागैगा अक गोड्यां पै ?"

बाहमण नै सोच्या, जै सिर में कहया तै यो तेरे गोड्यां नै तोड़ैगा अर अगर गोड्यां पै कहया तै यो सिर नै फोड़ैगा !

बाहमण हाथ जोड़-कै खड़या हो-ग्या अर बोल्या - "चौधरी साहब, मैं कुछ ना जानता आगे-पाच्छे की, मन्नै माफ कर दे ।"

दीवा

दीवा
एक गामौली  के बाळक ना होवैं थे । एक दिन एक भाठ आ-ग्या अर गामौली   की घराली  नै आपणा रोणा रो दिया । बाहमण बोल्या - बेटी, रोवै मतना, मैं परसों बद्रीनाथ जाऊँ सूँ, ऊड़ै तेरे नाम का दीवा जळा  दयूंगा  - अर भगवान सब भली करैंगे, चिन्ता ना करियो ।
वो बाहमण दस साल पाच्छै उस गामौली  कै घरां आया, तै देख्या अक ऊड़ै आठ-नौ बाळक हांडैं थे । उसनै पड़ौसी तैं बूझी अक ये बाळक किसके सैं ? पड़ौसी बोल्या अक महाराज ये उस्सै के सैं जिसका तू दस साल पहल्यां बद्रीनाथ में दीवा बाळ-कै आया था ।
बाहमण बोल्या - रै, यो गामौली  कित सै ?
पड़ौसी बोल्या - महाराज, वो तै कल बद्रीनाथ चल्या गया - तेरे दीवे नै बुझावण !!!

रौळा

रौळा

एक बै सरतो  घर कै भीतर आपणी छोरी गैल रौळा करै थी ।

सरतो बोल्ली - छोरी, तू काम ढंग तैं कर लिया कर, ना तै मैं तन्नै बाब्याँ गैल ब्याह दयूँगी ।

घर कै बाहर एक बाबा सारी बात सुणै था । बाबा बोल्या - माई मैं डट्टूं अक जाऊं ?

रविवार, 17 जून 2012

makkhan singh

मक्खन  सिंह  की बहू दूध बिलोवे थी | थोड़ी सी हान मैं जद मक्खन  बिलोवानी मैं तैरण लाग्या तो वा अपनी सास नै बोली " माँ जी इब मक्खन तैरण लाग्या सै |
सास नै डांट मार कै कहया ," तनै बोलन का शउर   नहीं सै के ? अपने सुसरे का नाम लेंते होयें तनै शर्म नहीं आंती ? बहू चुप रैहगी | अगले दिन उसे ढाल जब दूध बिलोवन पै मक्खन तैरण लाग्या तो बहू बोली , माँ जी , देखो नै बिलोवानी मैं पिता जी तैरें सें|  

विटामिन सी

 शिक्षक  नै  छात्रों तैं बूझ्या --किस चीज मैं विटामिन सी सभ तैं फालतू  होवै सै ?\
" मिर्च मैं " एक छात्र नै बताया |
"ओ  क्यूकर ?" शिक्षक नै बूझ्या |
" मिर्च खान्ते की साथ  सारे लोग सी सी करण  लाग्ज्याँ सें |" छात्र नै कहया |

KANJOOS


एक कंजूस माणस ---- के पियोगे भाई , ठंडा अक गरम 
महमान  ---- जी दोनु मंगवा ल्यो 
कंजूस माणस ---- रामू न्यूं कर एक ठंडा अर एक गरम ,
 ग्लास पानी का ले आ 

PICHHANYA

सत्तू राह मैं जांदी होई छोरी तैं बूझन लाग्या --तूं मनै जानै सै ?
कमली -- ना , कौन सै तूं ?
सत्तू -- मैं ओये सूँ जो तनै दो दिन पहलम बी नहीं पिछान्या था |

KITNA CHAHVAI SAI

एक औरत --- तूं मनै कितना चाहवै सै ?
रमलू --- शाहजहाँ तैं भी फालतू औरत --- फेर तूं मेरे मरें पाछै ताजमहल बन्वावैगा ?
रमलू ---हाँ मनै प्लाट तो ले राख्या सै बस तेरे मरण की बाट देखूं सूँ |

pandav

मास्टर जी ---धिरतराष्ट्र कै १०० बालक थे अर पांडव कै पाँच , इसा क्यूं था ?
रमलू --- मास्टर जी साँझ नै ज्योत बाल कै कृशन जी महाराज धोरै बूझुंगा फेर बताऊँगा 

KHABAR

रमलू ---अच्छी खबर बी सै अर भुंडी बी |
थमलू---इसी के खबर सै ?
अच्छी तो या अक मेरी घराली का अक्सी डैन्ट होग्या अर बुरी बात या अक व बचगी |

TECHNOLOGY

नर्स --- मुबारक हो थारे घर छोरा हुया सै |
रमलू---के टकनोलोजी आगी लुगाई मेरी हस्पताल मैं अर छोरा घर मैं |||

KISS

रमलू फकीर अर अम्बानी अमीर का एक बार सूट बैथ्ग्य बात करण का |
अम्बानी जी बोले --अच्छा रमलू न्यूं बता अक किस करना मेहनत सै अक या मजा सै ?
रमलू बोल्या --अम्बानी जी क्यूं मजाक करो सो गरीब की गेल्याँ ?
अम्बानी --नहीं रमलू मैं असल मैं जानना चाहूं सूँ |
रमलू बोल्या -- अम्बानी साहब जरूर मजा होगा , नाह तै मेहनत होती तै थाम भी मेरे पै ए करवांदे||

Daroo

कमली --थाम देसी पी कै आवो सो तो मनै पारो कह कै बोलै सै |
अर जब अंगरेजी पी कै आवो सो तो मनै डार्लिंग कह कै बोलो सो 
फेर आज थामनै मेरे ताहीं भूतनी अर चुड़ैल क्यूं कहया ?
रमलू --आज स्प्राईट पी कै आया सूँ | सीधी बात नो बकवास ||

chhoree


रमलू --- छोरी फंसानी आवै सै ?
कमलू  --- ना |
रमलू ---एक कागज का जहाज  बना , जिब मास्टर जी  आवें तो उस नै  क्लास मैं उड़ा
 दिए अर मास्टर जी बूझें तो उस छोरी का नाम ले दिए| बस फँसगी छोरी 
 

bijali


मास्टर जी --- बालको बताओ बीजली कित तैं आवै सै ?
रमलू --- मामा के घर तैं मास्टरजी |
मास्टर जी --- क्यूकर ?
रमलू ----जब भी बीजली जावै है, मेरा बाबू कहवै है , सालयाँ नै फेर काट दी     

Kaunsee kitab


मास्टर जी --- कौनसी किताब थाम नै  ज्यादा मदद करै सै ?
रमलू -- साच बोलूँ अक झूठ ?
मास्टर जी --साच बोल बेटा |
रमलू --- मेरे बाबू की चैक बुक |
--