सोमवार, 18 जून 2012

रौळा

रौळा

एक बै सरतो  घर कै भीतर आपणी छोरी गैल रौळा करै थी ।

सरतो बोल्ली - छोरी, तू काम ढंग तैं कर लिया कर, ना तै मैं तन्नै बाब्याँ गैल ब्याह दयूँगी ।

घर कै बाहर एक बाबा सारी बात सुणै था । बाबा बोल्या - माई मैं डट्टूं अक जाऊं ?

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