बात समझ कोन्या आई
एक बर रमलू कमलू थमलू ठमलू अर धमलू अपने यार फते के ब्याह मैं बरात मैं चाले गए । सुसराड़ मैं खातिर दारी मैं कमू वेटर शिकंजी के गिलास भर भर कै बरातियां ताहीं प्यावण लाग रया था । कमू नै उन पांचूआं ताहीं एक एक गिलास भर भर कै शिकंजी का दे दिया । रमलू नै शिकंजी पी कै गिलास सीधा धर दिया अर ,कमलू नै अपना गिलास मूंधा धर दिया अर थमलू नै टेढ़ा गेड़ दिया । कमू वेटर उन ताहीं बोल्या --थम तीनूँआं नै गिलास न्यारे न्यारे ढाल क्यूं धरे सै ? रमलू -- मेरा सीधा गिलास धरण का मतलब यूं सै अक इसमें ओर शिकंजी घाल दयो । कमलू -- मेरा मूंधा धारण का मतलब यो था अक मनै ओर शिकंजी कोण्या चाहिए । थमलू बोल्या -- मेरा टेढ़ा गिलास धरण का मतलब यो था अक बचरी हो तै घाल दे नहीं तो रहण दे । आई किमै समझ मैं ?
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