रविवार, 9 जून 2013

किस्सा जल सै यो तो निरा पाणी सै

रमलू जमा अनपढ़ । एक दिन शहर मैं चाल्या गया । उ डै एक आदमी जल सेवा करण  लाग रया  था । वो मानस रमलू तैं बोल्या --ले भाई जल पी ले । रमलू  नै बेर नहीं था अक जल के बला हो सै । रामलू नै सोच्ची अक पी कै तो देख ल्यूं  अक यो जल के बल सै । रामलू नै उस मानस धोरै एक गिलास जल ले लिया अर दो तीन घूँट भर कै  बोल्या --जा मेरे यार यो किस्सा जल सै यो तो निरा पाणी सै । 

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