रमलू जमा अनपढ़ । एक दिन शहर मैं चाल्या गया । उ डै एक आदमी जल सेवा करण लाग रया था । वो मानस रमलू तैं बोल्या --ले भाई जल पी ले । रमलू नै बेर नहीं था अक जल के बला हो सै । रामलू नै सोच्ची अक पी कै तो देख ल्यूं अक यो जल के बल सै । रामलू नै उस मानस धोरै एक गिलास जल ले लिया अर दो तीन घूँट भर कै बोल्या --जा मेरे यार यो किस्सा जल सै यो तो निरा पाणी सै ।
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