दारू अर रमलू
रमलू बहोत घनी दारू पिया करै था । जिब देखो जिब नशे मैं धुत पावै । एक दिन दुखी हो कै उसकी घर आली धमलो नै अपना बाबू फते बुला लिया अर बोली --बाबू इसकी तो किसे बख्त बी दारू कोण्या उतरती । फते बी समझावन लाग्या --बेटा रमलू ! तूँ दारू मत पीया कर । रमलू बोल्या --ठीक सै , मैं दारू कोण्या पीऊँ पर तमनै मेरी तीन शर्त माननी होँगी । फते बोल्या --बेटा बता तेरी तीन शर्त कौनसी सैं ? रामलू बोल्या --एक तो मैं जिस दिन कोए मेहमान आवैगा उस दिन दारू पीऊँगा । फते अर धमलो नै सोच्ची अक चलो कोए बात ना मेहमान के रोज रोज आवैंगे । न्यूँ सोच कै रमलू तिं बोले --ठीक सै । इब दूसरी शर्त बता । रमलू बोल्या-जिब ब्याह शादी होगी एक उस दिन पीऊँगा । वे दोनों बोले ठीक सै या भी मांनी । तीसरी और बता -- रमलू बोल्या --एक मेरा जिब जी करैगा जिद पीऊँगा ।
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