सोमवार, 10 जून 2013

दारू अर रमलू 
रमलू बहोत घनी दारू पिया करै था । जिब देखो जिब नशे मैं धुत पावै । एक दिन दुखी हो कै उसकी घर आली धमलो नै अपना बाबू फते  बुला लिया अर बोली --बाबू इसकी तो किसे बख्त बी दारू कोण्या उतरती । फते बी समझावन लाग्या --बेटा  रमलू ! तूँ दारू मत पीया कर । रमलू बोल्या --ठीक सै , मैं दारू कोण्या पीऊँ पर तमनै  मेरी तीन शर्त माननी होँगी ।  फते बोल्या --बेटा  बता तेरी तीन शर्त कौनसी सैं ? रामलू बोल्या --एक तो मैं जिस दिन कोए मेहमान आवैगा  उस दिन दारू पीऊँगा । फते अर धमलो  नै सोच्ची अक चलो कोए बात ना मेहमान के रोज रोज आवैंगे । न्यूँ  सोच कै रमलू तिं बोले --ठीक  सै । इब दूसरी शर्त बता । रमलू बोल्या-जिब ब्याह शादी होगी एक उस दिन पीऊँगा । वे दोनों बोले ठीक सै या भी मांनी । तीसरी और बता -- रमलू बोल्या --एक मेरा जिब जी करैगा जिद पीऊँगा । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें