रमलू – यार कल रात घर देर तैं पहुँचया--
बैल बजाई पर बीवी नै गुस्से में दरवाजा कोणी खोल्या--
-पूरी रात सड़क पै गुजार दी
कमलू – फिर तड़कै बीवी नै दरवाजा खोल्या अक नहीं ?
रमलू – नहीं यार, सबेरे दारू उतरी तो याद आया अक,
इबै तो मेरी शादी ए ना हुई सै।।
अर चाबी तो मेरी गौज मैं ए थी ।।
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