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रमलू नै अपनी प्रेमिका तैं पूछया - डियर ! मैं तुम्हारे पिताजी से शादी की बात किस बख्त करूं ?प्रेमिका ने कहा - जब कभी मेरे पिताजी के पैर में जूते न हों ।
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मेहमान- तो बेटा आगै के करण का इरादा सै?
रमलू - थारे जान्ते ऐ इन बचे होए बिस्कुटां का , ठंडे अर भुजिया का बक्कल तारणा सै।।
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डॉक्टर - आपके तीन दांत कैसे टूट गए ?
मरीज - पत्नी ने कड़क रोटी बनाई थी.
डॉक्टर - तो खाने से इनकार कर देते !
मरीज – जी, वही तो किया था … !!!
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एक खूबसूरत लडकी बस स्टैंड पर खडी थी | एक नौजवान बोला- चांद तो रात में निकलता हैं , आज दिन में कैसे निकल आया ?
लडकी बोली - अरे उल्लू तो रात को बोलता था , आज दिन में कैसे बोल रहा हैं |
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जानू तुम तो करोड़ों में हो...!
धमलो- सुनै सै , तेरी खातर मेरी के कीमत सै?
रमलू- धमलो तूँ तै कई करोड़ों की सै...
धमलो- तै उन्है करोड़ों महं तै 6,60000 रुपये दे दे, सहेलियों की गैल सिंगापुर घूमण जाणा सै
सुनते की साथ रमलू बेहोश..
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पिता: फिर से फेल हो गया? पड़ोस की लड़की को देख हमेशा क्लास में फर्स्ट आती है।
रमलू बेटा: उसको देखकर ही तो मैं फेल हो गया हूं।
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बात समझ कोन्या आई
एक बर रमलू कमलू थमलू ठमलू अर धमलू अपने यार फते के ब्याह मैं बरात मैं चाले गए । सुसराड़ मैं खातिर दारी मैं कमू वेटर शिकंजी के गिलास भर भर कै बरातियां ताहीं प्यावण लाग रया था । कमू नै उन पांचूआं ताहीं एक एक गिलास भर भर कै शिकंजी का दे दिया । रमलू नै शिकंजी पी कै गिलास सीधा धर दिया अर ,कमलू नै अपना गिलास मूंधा धर दिया अर थमलू नै टेढ़ा गेड़ दिया । कमू वेटर उन ताहीं बोल्या --थम तीनूँआं नै गिलास न्यारे न्यारे ढाल क्यूं धरे सै ? रमलू -- मेरा सीधा गिलास धरण का मतलब यूं सै अक इसमें ओर शिकंजी घाल दयो । कमलू -- मेरा मूंधा धारण का मतलब यो था अक मनै ओर शिकंजी कोण्या चाहिए । थमलू बोल्या -- मेरा टेढ़ा गिलास धरण का मतलब यो था अक बचरी हो तै घाल दे नहीं तो रहण दे । आई किमै समझ मैं ?
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किस्सा जल सै यो तो निरा पाणी सै
रमलू जमा अनपढ़ । एक दिन शहर मैं चाल्या गया । उ डै एक आदमी जल सेवा करण लाग रया था । वो मानस रमलू तैं बोल्या --ले भाई जल पी ले । रमलू नै बेर नहीं था अक जल के बला हो सै । रामलू नै सोच्ची अक पी कै तो देख ल्यूं अक यो जल के बल सै । रामलू नै उस मानस धोरै एक गिलास जल ले लिया अर दो तीन घूँट भर कै बोल्या --जा मेरे यार यो किस्सा जल सै यो तो निरा पाणी सै ।
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एक बार रमलू ट्रेन में सफर कर रहा था ।
ट्रेन में बहुत भीड़ होने के कारण रमलू एक गंजे आदमी के पास जाकर बैठ गया ।
आदमी गुस्से से बोला-हाँ, हाँ मेरे सिर पर आकर बैठ जा..।
रमलू-नहीं अंकल में यहीं ठीक हूँ .. वहां से तो फिसलने का डर है ।
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रमलू नै एक बै एक पॉलट्री फार्म खोल लिया । फेर रमलू अपनी मुर्गियों के द्वारा कम अंडे दिए जाण करकै परेशान था। एक दिन उसनै सारी मुर्गियों ताहीं हुक्म दिया अक काल तैं मुर्गियां ज्यादा अंडे देवैँगी ।
रमलू :अगर तुम लोगों ने कल से 2-2 अंडे नहीं दिए तो कल से तुम्हारा दाना पानी बंद।
मुर्गियाँ कसूती डरगी …. सारियाँ नै 2-2 अंडे दिए पर एक नै बस एकै अंडा दिया।
मालिक: तनै 1 अंडा क्यूं दिया सै ? तनै मेरा डर नहीं ?
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.जवाब मिल्या : मालिक ! यो थारा डर करकै ए तो दिया सै … नातै मैं तो मुर्गा सूँ ।
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विश्वास उठ लिया
एक दिन, एक चोर रमलू के घराँ चोरी करण आग्या . तिजोरी पै लिख्या था ‘तोड़ने की जरूरत नहीं सै …
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564 बटन दबा दयो , आपै खुल जावैगी …
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ज्योंहे चोर नै 564 बटन दबाया, थोड़ी सी वार मैं पुलिस आगी …
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चोर बुड बुड़ाया : माँ कसम, आज इंसानियत पर तैं विश्वास उठ लिया
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नहले पै दहला
रमलू सिपाही की ड्यूटी बोर्डर पी लाग री थी । एक दिन फोन कर कै रमलू अपने अधिकारी जुगनू थानेदार ताहीं न्यूँ बोल्या--साहब जी मनै एक ट्रक दारू का पकड़ लिया सै । जुगनू थानेदार बोल्या--शाब्बाश रमलू इब तूँ न्यूँ कर अक एक ट्रक भुजिया का और पकड़ ले ।
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