शिष्य: गुरु जी , इसी पत्नी नै के कहवै सैं
जो गौरी हो, लाम्बी हो, सुंदर हो,होशियार हो,
पति को समझती हो, कदे झगड़ा ना करती हो?
गुरु जी: उसनै मन का बहम कहवैं सैं बेटा! मन का बहम!!
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