ख़बर दूर की !
एक बै रमलू खेत मैं रेडियो सुनै था,
रेडियो पै एक लुगाई बताण लाग री थी,
बंबई मैं बाढ़ आगी, गुजरात मैं हालण आग्या, दिल्ली मैं ..
रमलू नै देख्या पाच्छै नाका टूट्या पड़्या सै,
अर पाणी दूसरे के खेत मैं जाण लाग रहया सै।
रमलू छोंह मैं आकै रेड़ियो कै दो लट्ठ मारकै बोल्या,
“दूर-दूर की बताण लाग री सै,
लवै नाका टूट्या पड़या सै
यो बतांदे होए तेरा मुँह दुक्खै था के ।”
ranbir dahiya
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें