शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

नाक तले की

नाक तले की  
एक बर रमलू  खेत मैं  रेडियो सुनै  था। रेडियो पै एक लुगाई बताण लाग री थी अक बंबई मै बाढ़ आगी, गुजरात मै हालण आग्या, दिल्ली मैं आप आगी । रमलू नै  देख्या पाछे नै  नाका टूट्या पड़्या सै , अर पाणी दूसरे के खेत मैं  जावण लाग रहया सै । रमलू  छोंह मैं आकै रेड़ियो कै दो लट्ठ मारकै बोल्या – दूर-दूर की बताण लाग री सै , नाक तलै नाका टूट्या पड़या सै , यो बतांदे होए तेरा मुँह दुक्खै  सै के ।

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