रमलू नै चोरी करण की कसूती आदत थी। एक दिन वो चोरी करता पकड़या गया । थाणेदार सिपाही तैं बोल्या –इसकै सौ जूत मार आप्पे ए सीधा हो ज्यागा । सिपाही उसती हवालात मैं जूत मारण खातर लेग्या तो रलदू उसतैं सौ का नोट दिखाकै बोल्या – किम्मे हो नी सकता । सिपाही सौ का नोट गोज मैं घाल कै बोल्या – मैं भींत कै जूत मारूँगा अर तूँ किलकी मारें जाइये। रमलू नै एक सौ का नोट और जेब तै काढ्या अर बोल्या – ले किलकी बी तूँ ए मार लिए मन्नै जावण दे।
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