गुरुवार, 9 जनवरी 2014

kime ho nahin sakta

रमलू नै चोरी करण की कसूती आदत थी। एक दिन वो चोरी करता  पकड़या गया । थाणेदार सिपाही तैं  बोल्या –इसकै सौ जूत मार आप्पे ए सीधा हो ज्यागा । सिपाही उसती हवालात मैं  जूत मारण खातर लेग्या तो रलदू उसतैं  सौ का नोट दिखाकै बोल्या – किम्मे हो नी सकता । सिपाही सौ का नोट गोज मैं  घाल कै बोल्या – मैं भींत  कै जूत मारूँगा अर तूँ किलकी मारें  जाइये। रमलू नै एक सौ का नोट और जेब तै काढ्या अर बोल्या – ले किलकी बी तूँ ए मार लिए मन्नै जावण दे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें