गुरुवार, 9 जनवरी 2014

पाछे नै लटक ले”

रमलू सवारी ढोण खातर नया टैम्पू ल्याया  । उसनै दिन-रात टैंम्पू ए टैंम्पू दीखण लाग-गे । एक रात नै  वो नींद मैं बोलण लाग-ग्या -- आ ज्याओ भाई आ ज्याओ, टैंपू चाल्लै सै, तोले से आ-ज्याओ।  या बात सुण कै उसकी बहू बोली-- “के बात हो-गी , आज न्यूं क्यूकर बोल्या ?” रमलू  नींद मैं ए बोल्या-- कड़े जावैगी बेबे ? या सारी बात रमलू  का बाबू भी सुणन लाग रहया था, वो बोल्या ---रै झकोई , के कहवे सै बहू नै ? रमलू -- नींद में-ऐं बोल्या--“ताऊ, घना ना बोलै ! तू पाछे नै लटक ले” !

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