रमलू सवारी ढोण खातर नया टैम्पू ल्याया । उसनै दिन-रात टैंम्पू ए टैंम्पू दीखण लाग-गे । एक रात नै वो नींद मैं बोलण लाग-ग्या -- आ ज्याओ भाई आ ज्याओ, टैंपू चाल्लै सै, तोले से आ-ज्याओ। या बात सुण कै उसकी बहू बोली-- “के बात हो-गी , आज न्यूं क्यूकर बोल्या ?” रमलू नींद मैं ए बोल्या-- कड़े जावैगी बेबे ? या सारी बात रमलू का बाबू भी सुणन लाग रहया था, वो बोल्या ---रै झकोई , के कहवे सै बहू नै ? रमलू -- नींद में-ऐं बोल्या--“ताऊ, घना ना बोलै ! तू पाछे नै लटक ले” !
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