सोमवार, 20 जनवरी 2014

मटके में मछली

मटके में मछली
 रमलू घर कै  बाहर बैठया  पानी तैं  भरे मटके मैं हाथ घुमावण लागरया  था, सो, उड़े  कै जान्ते  होंए  कमलू  नै बूझ्या -- "के  करै सै , रमलू  भाई...?" रमलू  नै जवाब दिया, "भाई, मछलियां पकड़ रहया  सूँ ..." कमलू  नै तुरन्त रमलू  के गाल पै एक ज़ोरदार तमाचा रसीद कर दिया , अर बोल्या , "अरै  गधे, किते मटके मैं भी मछलियां पैदा हुया  करैं ?" रमलू  चुपचाप उल्टा  बैठग्या , अ र जब कुछ वार  पाछै कमलू  लौट कै आया , तो भी रमलू  उसे ढाल मटके मैं  हाथ घुमावण  लागरया  था, सो, कमलू नै फेर बूझ्या , "क्यों रमलू  भाई, के तूँ  इब ताहिं  मछलियां पकड़ण लागरया  सै ...?" रमलू  सैंड दे सी  उठया , अर कमलू  के  गाल पै  ज़ोरदार तमाचा मारकै  बोल्या , "अरै  गधे, किते  मटके मैं  भी मछलियां पैदा हुया  करैं ..?"

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