[04/07, 6:21 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 780
~एक बार एक सरकारी स्कूल का "गुरुजी" अपनी गाड़ी में कही जा रहा था और सामने से एक झोटा बुग्गी वाला आ रहा था। मास्टर जी उसको पहचान गए क्योंकि वो मास्टर जी का student रमलू था ।
मास्टर जी ने अपनी गाड़ी उसकी झोटा बुग्गी के पास रोकी और उसकी तरफ बुरा सा मुँह बना कर टोंट कसा,"अरय झोटा बुग्गी चलावै सै ?"
रमलू भी अपने गुरुजी का ही सच्चा चेला था बोला,"ओर तेरे पढ़ाये होड़ जहाज चलावैंगे? "
[04/07, 6:23 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 781
माँ (रमलू से)- तूँ रोवै क्यों सै ?
रमलू - मेरे मास्टर जी बहुत बीमार थे, वे ....
माँ - के वे मर गए?
रमलू - नही, वे ठीक हो लिए ,अर काल तै स्कूल आवन आले सैं ।
[04/07, 6:27 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 782
रमलू नै चैलेंज किया अक वो कुतुब मीनार को सिर पर रख कर मुंबई ले जा सकता है।
इस पर सारी मीडिया वहां पहुंच गई।
तब रमलू नै मीडिया से कहा: बस कोई कुतुब मीनार ठाकै उसके सिर पर धर दे।
[04/07, 6:38 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 783
रमलू तुम इस लड़की को जानते हो ?
हां , कभी मैं इसके साथ सोया करता था
अच्छा ! कब ? कहां ?
जब मैं स्कूल में पढ़ता था , साइंस की क्लास में !
[05/07, 6:14 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 784
रमलू फिल्म ‘धूम-2’ देखने सिनेमा हॉल गया। जब फिल्म खत्म हुई, तो सारे लोग हॉल से बाहर आ गए, लेकिन रमलू आराम से अपने सीट पर बैठा रहा। थोड़ी देर बाद सिक्योरिटी गार्ड आए और उससे पूछा, ‘अभी तक बाहर क्यों नहीं गए।’
जवाब में रमलू कहता है, ‘फिल्म के अंत में कहा गया था कि धूम-3 जल्दी ही आ रही है। बस उसी का इंतज़ार कर रहा हूं।’
[05/07, 6:19 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 785
रमलू कमलू पेपर देने के बाद लड़ रहे थे।
सर: तुम लोग क्यूं लड़ रहे हो।
रमलू : यह पागल पेपर खाली छोड़ कर आया है।
सर: तो क्या हुआ।
कमलू : क्यूंकि मैं भी तो पेपर खाली छोड़ कर आया हूं,अब टीचर को
लगेगा कि हम दोनों ने नकल की है।
[05/07, 6:20 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 786
तीन कीड़ी रास्ते में बैठकर बातें कर रही थीं कि अचानक उस रास्ते से हाथी गुजरता हैं।
वहां बैठी एक कीड़ी हाथी से बोली- ऎ हाथी मुझसे कुश्ती लडोंगे।
बाकी कीडियाँ - अरे रहने दो यार बेचारा अकेला हैं।
[06/07, 6:34 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 787
रमलू (बीबी को मायके में फोन पर कहता है ) —
अपना ध्यान रखना, सुना है बहुत डेंगू फैल रहा है ।।।
धमलो (सिर पकड़ के)–
मेरा सारा खून तो थामनै पी लिया, मच्छर के “रक्त दान” करण नै आवैगा??
[06/07, 6:46 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 788
शिक्षक: MATHS का फुल फॉर्म बताओ..??
रमलू : मेरी आत्मा तनै हमेशा सतावैगी ..!
शिक्षक आज तक सोच रहा है…कि लड़के ने फुल फॉर्म बताया था कि बददुआ दी थी..
[07/07, 6:29 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 789
रमलू ज्योंहि कालेज मैं पहोंचया तो खुशी का मारया उछलण लाग्या।
कमलू:के हुया ?इतना राज्जी क्यों होरया सै?
रमलू: आज मेरे तैं पहली बरियाँ किसे छोरी नै मेट्रो मैं बात करी।
कमलू:वह भाई क्या बात हुई!
रमलू: मैं बैठ्या था, वा आकै बोली, "उठो , यह लेडीज सीट है।"
[07/07, 6:34 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 790
धमलो: हम कड़ै जावण लागरे सां?
रमलू: लोंग ड्राइव पर।
धमलो: थामनै मेरे ताहिं पहलम क्यों नहीं बताया?
रमलू: मनै भी इबै ए बेरा लाग्या सै, जब ब्रेक फेल होगे।
[07/07, 7:09 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 791
निचोड़ने तैं मरगी
सर्दियों में एक दिन रमलू बिल्ली नै ठंडे पानी तैं नुहावै था।
कमलू - यो के करै सै ? इतने जाड्डे मैं ठंडे पानी तैं वा मर ज्यागी ।
(रमलू जब वापस लौटा तो सचमुच बिल्ली मरी हुई थी)
कमलू - मैंने कहया था ना अक मर ज्यागी ।
रमलू - अरे यार, या नुहावण तैं नहीं मरी, बल्कि नहलाने के बाद निचोड़ने तैं मरगी ।
[08/07, 12:43 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 792
रमलू : मेरी शराफत देखो ..
मैंने तुम्हे देखे बगैर ही शादी कर ली ...
धमलो : मेरी शराफत देखो....
मैंने देख कर भी इन्कार नहीं किया...
[08/07, 12:45 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 793
रमलू : सुनो जी, अगर आपके बाल इसी रफ़्तार से झड़ते रहे तो मैं तुम्हे तलाक़ दे दूँगा!!
धमलो : हे राम ! और मैं पागल इनको बचाने की कोशिश कर रही थी.....
[08/07, 12:57 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 794
एक चोर रमलू का मोबाइल लेकै भाज लिया -----
रमलू हंसण लागग्या --
कमलू --- वो तेरे मोबाइल नै लेकै भाजरया अर तूँ हंसण लागरया सै ??
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रमलू -- भाजण दे -- चार्जर तो मेरे धोरै सै ।
[08/07, 12:58 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 794
अम्बानी रमलू आम्हा साहमी
आखरी तोड़
अम्बानी -- अगर मैं सुबह से अपनी कार में निकलूं तो शाम तक अपनी आधी प्रॉपर्टी भी नहीं देख सकदा -------
रमलू -- म्हारे धोरै भी ईसीए खटारा कार थी --- हमनै तो बेच दी .।
[08/07, 12:59 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 795
रमलू सारी जिंदगी सोचता रहया
अर सोचता रहया अर सोचता रहया
अर बहोतै घणा सोचता रहया
सोचते सोचते मरग्या अक मेरी बहन
के दो भाई सैं तो मेरा एक क्यूँ ?
[08/07, 12:59 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 796
कमलू रमलू तैं -- यार तूँ इतना बड़ा हो लिया और फेर भी तेरै मूंछ अर दाढ़ी नहीं आयी ?
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.रमलू -- यार मैं बिलकुल अपनी माँ पै गया सूँ ना ।
[08/07, 12:59 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 797
टीचर : बहुत तेज़ हवओ के साथ बारिश हो रही है…!!
इसका भविष्य काल बताओ???
रमलू : बस ईब लाइट जावण आली सै …!!
[08/07, 1:01 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 798
डॉक्टर : कल रात को क्या खाया था??
रमलू : बर्गर, पिज़्ज़ा और कोक..
डॉक्टर : देखो यह फ़ेसबुक नही है सच बताओ..
रमलू : जी लौकी..
[08/07, 1:01 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 799
रमलू पेंटिंग खरीदने गया…
सेल्समैन:
यह 10 हजार रुपये की है।
आईल पेंट से बनी हुई है।
रमलू :
पैसों की चिंता मत कर।
देसी घी में कुछ दिखा….!
[08/07, 1:02 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 800
रमलू …… दिल्ली चला गया
रेलवे स्टेशन पै अखबार आले तैं बोल्या :-
एक अखबार दिए …
अखबार वाला-हिन्दी या अंग्रेजी का?
रमलू ….. भाई कोईसा दे दे
मनै तो रोटी लपेटनी सै
[08/07, 1:02 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 801
टीचर: थामनै बेरा सै अक म्हारे पूर्वज बान्दर थे?
रमलू : थारे होंगे, महारे तो चौधरी थे।
[08/07, 1:03 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 802
रमलू : बापू एक खुशखबरी सै
बापू : के?
रमलू : तूने कही थी के पास
होग्या तो गाड्डी दुवाऊँगा
बापू : हाँ
रमलू : रुपिये बचगे तेरे..
[09/07, 6:58 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 803
मास्टरजी ---आप ब्रेकफास्ट में क्या नहीं खा सकते ?
रमलू का जवाब ---लंच और डिनर ।
[09/07, 6:59 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 804
टीचर : लड़कियों से
दोस्ती नहीं करोगे!
बच्चे : नहीं करेंगे।
टीचर : वतन के लिए जान
दे दोगे!
बच्चे : दे देंगे, ऐसी जिन्दगी
का करेंगे भी क्या
[09/07, 7:07 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 805
डॉक्टर
डॉक्टर रमलू मरीज से~अगर तुम मेरी दावा से ठीक हो गए तो मुझे क्या इनाम दोगे
रमलू~साहब मैं तो बहुत गरीब आदमी सूँ कब्र खोदया करूँ आपकी फ्री में खोद दयूंगा
[09/07, 7:08 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 806
फीका सै
शादी की पार्टी मैं रमलू अपने कई गामौलियां की साथ जारया था । प्लेट में टिशु पेपर देख सोच्या अक यो भी खावण की चीज सै।
ज्योंहे मुँह मैं घालण नै हुया तो सरे गमौली चिल्लाये -- यो मत खा यो फीका सै।
[09/07, 7:09 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 807
ब्रत
रमलू नै शौक शौक मैं ब्रत राख लिया ।
वो अपने छोरे तैं बोल्या --देखिये रै सूरज डूब लिया के?
छोरा -- ना बाबू इबै तो लिकड़ रहया सै।
थोड़ी सी वार पाछै फेर बोल्या-- देख डूब्या अक नहीं ?
छोरा -- कोन्या डूब्या बाबू ।
रमलू-- लागै सै मनै गैल लेकै डुबैगा झकोई ।
[09/07, 7:10 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 808
Ramloo
रमलू की एक कसूती आदत सै
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कोए सौण लागरया हो तै उसनै जगा कै बूझैगा --- ऐं रै सोवै था के ?
[09/07, 7:11 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 809
रमलू नया फ़ोन लेकै आया
उसनै अपने दोस्त कमलू का नंबर डाइयल करया तो वो एक लड़की नै उठाया -- हेल्लो
रमलू- कौन बोल्या जी ?
लड़की- मैं राधा बोलूँ सूँ।
रमलू- ओह योतै कृष्ण की घरआली का मिलग्या। सॉरी माता ।
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