[22/07, 6:48 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 875
काफी दिनां पाछै रमलू पार्क मैं घुमण खातर गया अर घरां उल्टा आकै उसनै धमलो तैं बताया," जानै सै लोग मनै भगवान माणण लागगे सैं।"
धमलो-- तनै क्युकर बेरा पाट्या?
रमलू-जिब मैं पार्क मैं गया तो उड़ै लुगाई मनै देख कै न्यूऊं बोली," हे भगवान,तूँ फेर आग्या।"
876
रमलू (बीबी को मायके में फोन पर कहता है ) —
अपना ध्यान रखना, सुना है बहुत डेंगू फैल रहा है ।।।
धमलो (सिर पकड़ के)–
मेरा सारा खून तो थामनै पी लिया, मच्छर के “रक्त दान” करण नै आवैगा??
[23/07, 7:02 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 876
रमलू : मनै शादी में BMW मिली सै ।
ठमलू : पर तेरे पास तो कोई कार नहीं दीखती ।
रमलू : अरै मेरा मतलब था अक बहुत मोटी वाईफ।
[23/07, 7:02 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 877
पत्नी : आज ताहीं थामनै अपनी जिंदगी में करया ए के सै ?
रमलू : मैं एक सेल्फ मेड माणस सूँ ।
पत्नी : ल्यो ,अर मैं सूँ अक इब ताहीं रामजी नै दोषी मान री थी ।
[23/07, 7:06 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 878
लोकडाउन के दसवें दिन रमलू तैं कमलू नै बुझ्या--
तूँ क्युकर बख्त कॉटै सै?
रमलू- रामायण महाभारत देख कर...
कमलू नै फेर बूझ लिया अक तनै इंनतैं के सीख्या?
रमलू- महाभारत जमीन का केस सै
और रामायण अपहरण का केस सै...
[23/07, 7:10 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 879
सिपाही - चल भाई, तेरे फांसी का समय हो गया।
रमलू कैदी - पर मुझे तो फांसी 20 दिन बाद होने वाली थी!
सिपाही - जेलर साहब कह कर गए हैं कि तू उनके गांव का है,
इसलिए तेरा काम पहले...!!!
[23/07, 7:25 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 880
एक बार रमलू फौजी घर छुटटी आया ।
उसने घर आकर एक गाय खरीद ली।
रमलू फौजी जब भी गाय को खोलता तो हर बार रमलू के हाथ से छूटकर भाग जाती ।
एक दिन रमलू ने गाय को बहुत मारा ।रमलू की पत्नी बोली इतना मत मारो नही तो यह दूध नही देगी ।
रमलू बोल्या – साला मुझे दूध नही चाहिऐ… Discipline चाहिऐ – Discipline.!!
[24/07, 5:12 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 881
रमलू ने एक हलवाई की दुकान पर आधा किलो जलेबी लेकर खाई और बिना पैसे दिए जाने लगा..
दुकानदार बोला – अरे जलेबी के पैसे तो दिए जा ।
रमलू– पैसे तो है नहीं ..
इस पर दूकानदार ने अपने नौकर को बुला कर रमलू की भरपूर पिटाई करवा दी।
पिटने के बाद रमलू उठा और हाथ पैर झाड़ते हुए बोला- इसी भाव पर एक किलो और तौल दे ।
[24/07, 6:47 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 882
रमलू अपनी घरवाली धमलो से ~ कालेज के बारे मैं थारा कोए कडुआ अनुभव
धमलो ~ हाँ सै ना ! थारी अर म्हारी पहली मुलाकात कालेज मैं ए तो होई थी ।
[26/07, 5:39 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 883
रमलू मोबाइल कम्पनी में नौकरी लेने गया तो पहले ही सवाल का जवाब देने पर उसको भगा दिया गया!
सवाल: सबसे बड़ा नेटवर्क कौन सा है?
रमलू: कार्टून नेटवर्क!
[26/07, 5:39 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 884
रमलू अंडरवियर लेने दुकान पर गया।
दुकानदार ने उसे 300 रूपये का अंडरवियर दिखाया।
पैसे सुनकर रमलू बोला: यार रोज पहनने वाला दिखाओ,पार्टीवियर नहीं चाहिए।
[26/07, 5:41 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 885
कमलू धोरै रोजगार नहीं, खान नै रोटी नहीं, रहवन नै मकान नहीं
रमलू-के हाल?
कमलू- तीजां कैसे कटरे सैं!
[27/07, 5:52 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 886
वृद्धाश्रम में माँ को छोड़कर वो पलटा ही था की....
माँ ने आवाज़ देकर बुलाया...
बेटा अपने मन में किसी प्रकार का बोझ मत रखना..तुझे पाने के लिए तीन बेटियो की भ्रूण हत्या की थी...
सजा तो मिलनी ही थी...
[27/07, 5:54 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 887
एक दिन पंडित को प्यास लगी, संयोगवश घर में पानी नही था इसलिए उसकी पत्नी पडोस से पानी ले आई I पानी पीकर पंडित ने पूछा....
पंडित - कहाँ से लायी हो बहुत ठंडा पानी है I
पत्नी - पडोस के कुम्हार के घर से I (पंडित ने यह सुनकर लोटा फैंक दिया और उसके तेवर चढ़ गए वह जोर जोर से चीखने लगा )
पंडित - अरी तूने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया, कुंभार ( शुद्र ) के घर का पानी पिला दिया। पत्नी भय से थर-थर कांपने लगी, उसने पण्डित से माफ़ी मांग ली I
पत्नी - अब ऐसी भूल नही होगी। शाम को पण्डित जब खाना खाने बैठा तो घरमे खानेके लिए
कुछ नहीं था.
पंडित - रोटी नहीं बनाई. भाजी
नहीं बनाई.
पत्नी - बनायी तो थी लेकिन अनाज पैदा करनेवाला कुणबी(शुद्र) था.
और जिस कढ़ाई में बनाया था वो लोहार (शुद्र) के घर से आई थी। सब फेक दिया.
पण्डित - तू पगली है क्या कही अनाज और कढ़ाई में भी छुत होती है? यह कह कर पण्डित बोला की पानी तो ले आओ I
पत्नी - पानी तो नही है जीI
पण्डित - घड़े कहाँ गए हैI
पत्नी - वो तो मेने फैंक दिए क्योंकि कुम्हार के हाथ से बने थेI पंडित बोला दूध ही ले आओ वही पीलूँगा I
पत्नी - दूध भी फैंक दिया जी क्योंकि गाय को जिस नौकर ने दुहा था वो तो नीची (शुद्र) जाति से था न I
पंडित- हद कर दी तूने तो यह भी नही जानती की दूध में छूत नही लगती है I
पत्नी-यह कैसी छूत है जी जो पानी में तो लगती है, परन्तु दूध में नही लगती। पंडित के मन में आया कि दीवार से सर फोड़ ले। गुर्रा कर बोला - तूने मुझे चौपट कर दिया है जा अब आंगन में खाट डाल दे मुझे अब नींद आ रही है I
पत्नी- खाट! उसे तो मैने तोड़ कर फैंक दिया है क्योंकि उसे शुद्र (सुतार ) जात वाले ने बनाया था.
पंडित चीखा - ओ फुलो का हार लाओ भगवन को चढ़ाऊंगा ताकि तेरी अक्ल ठिकाने आये.
पत्नी- फेक दिया उसे माली(शुद्र)
जाती ने बनाया था.
पंडित चीखा- सब में आग लगा दो, घर में कुछ बचा भी हैं या नहीं.
पत्नी - हाँ यह घर बचा है, इसे अभी तोडना बाकी है क्योंकि इसे भी तो पिछड़ी जाति के मजदूरों ने बनाया है I पंडित के पास कोई जबाब नही था। आई कुछ समझ में कि नहीं ?
[27/07, 5:55 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 888
इससे अच्छा तो इसका बाबू था
एक शहर में एक आदमी की आदत थी की वो अपने घर के पास के चौराहे पर खड़ा हो कर पेशाब करता था। लोग उसे भला बुरा कहते थे । किसी कारण उसकी मौत हो गई। लोगों ने राहत की सांस ली। उसके बाद उसके लड़के ने चौराहे पर घूम घूम कर पेशाब करना शुरू कर दिया। लोग बोले~ इससे अच्छा तो इसका बाबू था वो खड़ा हो कर तो कर लिया करता। आई किमैं समझ मैं ?
[28/07, 6:55 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 889
एक नेताजी की गाड़ी पै प्लेट लागरी थी, जिसपै लिखा था - हा. ओ. प्र.
.
पुलिस वाले ने ड्राइवर से पूछा - कौन सी पार्टी के हैं नेताजी...?
.
ड्राइवर - हारे औड़ प्रत्याशी...!
[28/07, 7:02 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 890
टीचर: रमलू , एक ऐसी कहानी सुनाओ जिससे कोई शिक्षा मिलती हो।
रमलू : मैंने उसको फोन किया, वह सो रही थी।
फिर उसने मुझे फोन किया, तो मैं सो रहा था।
टीचर : इसमें कौन सी शिक्षा मिलती है?
रमलू : शिक्षा मिलती है : जैसी करनी, वैसी भरनी।
[28/07, 7:03 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 891
तौहीन अदालत की
रमलू नै पत्नी के साथ मारपीट करने के जुर्म में अदालत में पेश किया गया.
जज ने रमलू की जबानी पूरी घटना ध्यान से सुनी और भविष्य में अच्छा
व्यवहार करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया.
अगले ही दिन रमलू नै पत्नी को फिर मारा और फिर अदालत में पेश किया गया.
जज ने कड़क कर पूछा – “तुम्हारी दुबारा ऐसा करने की हिम्मत कैसे हुई ?
अदालत को मजाक समझते हो ?”
रमलू नै अपनी सफाई में जज को बताया – नहीं हुजूर, आप मेरी पूरी बात सुन लीजिए.
कल जब आपने मुझे छोड़ दिया तो अपने-आपको रिफ्रेश करने के लिए मैंने थोड़ी सी
शराब पी ली. जब उससे कोई फर्क नहीं पड़ा तो थोड़ी-थोड़ी करके मैं पूरी बोतल पी गया.
पीने के बाद जब मैं घर पहुंचा तो पत्नी चिल्ला कर बोली – “हरामी, आ गया नाली का पानी पीकर !”
हुजूर, मैंने चुपचाप सुन लिया, और कुछ नहीं कहा. फिर वह बोली – “कमीने, कुछ काम धंधा भी
किया कर या केवल पैसे बर्बाद करने का ही ठेका ले रखा है … !”
हुजूर, मैंने फिर भी कुछ नहीं कहा और सोने के लिए अपने कमरे में जाने लगा.
वह पीछे से फिर चिल्लाई – “अगर उस जज में थोड़ी सी भी अकल होती तो तू आज जेल में होता … !!!”
बस हुजूर, अदालत की तौहीन मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई …. !!!
[28/07, 7:21 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 892
रमलू : माँ , मैं कल से स्कूल नहीं जाऊंगा।
ममी: क्यों बेटा, ऐसी क्या बात हो गई?
रमलू : आज स्कूल में हम सभी बच्चों का वजन किया गया था...
ममी: तो क्या हुआ?
रमलू : मनै डर है कि अगर रेट अच्छा मिला, तो स्कूल वाले कहीं हमें बेच न डालें!!!
[31/07, 6:10 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 893
एक बार रमलू पूरा पट्टियों मैं लिपटया पड्या था।
कमलू-- के हुया रमलू? यो के हाल बना राख्या सै?
रमलू- के बताऊँ कमलू! मैं बीस लोगों नै मिलकै नै पीटया।
कमलू- फेर तनै के करया?
रमलू-- करना के था मनै भी कहया-- हिम्मत सै तो एक एक करकै आओ।
कमलू-- फेर
रमलू-- फेर के , फेर बीसों नै एक एक करकै मेरी पींघ सी बधा दी।
[31/07, 6:11 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 894
रमलू का बाबू-- रमलू तेरे ताहिं फूल तोड़कै ल्याण ताहिं कहया था अर तूँ पूरी डाहली तोड़ ल्याया फूल की गेल्याँ।
रमलू-- बाबू, उड़ै लिख राख्या था अक फूल तोड़णा मना सै, इस करकै मैं डाहली ए तोड़ ल्याया।
[31/07, 6:11 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 895
माँ नै रमलू तैं कहया-- बेटा लैंप जला दे।
कुछ देर पाछै माँ नै फेर बुझ्या-- बेटा लैंप जला दिया?
रमलू बोल्या-- हां माँ! वो तो जब आपणै कहया था, जिबै चूल्हे मैं गेर दिया था, इब ताहिं तो पूरा जल लिया होगा ।
[31/07, 6:32 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 896
रमलू बस में दिल्ली जा रहा था , पास वाली सीट पर बैठे भाई ने पूछा : क्या *जात* है भाई जी?
रमलू : *चौधरी* हूँ
फिर कहता है: ये *चौधरी* किसमें आते हैं?
रमलू : भाई, अगर गन्ने का पेमेंट टाइम पे हो तो *स्कार्पियो* मैं आवैं सैं ना तै *रोडवेज* बस मैं ए आवैं सैं...
[01/08, 7:17 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 897
धमलो- शादी से पहले तुम मुझे होटल,
सिनेमा, और न जाने कहां- कहां घुमाते थे
शादी हुई तो घर के बाहर भी नहीं ले जाते..
रमलू- क्या तुमने कभी किसी को...
चुनाव के बाद प्रचार करते देखा है...
[02/08, 6:32 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 898
SCHOOL
एक टीचर ने रमलू से पूछा-स्कूल क्या है?
रमलू-स्कूल वो जगह है जहाँ हमारे पापा को लूटा जाता है और हमें कूटा जाता है ।
[02/08, 6:33 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 899
KIT KIT
रमलू
किट किट की आवाज आ रही थी
रमलू( जागकै)--देखिए धमलो मूसे कपड़े कुतरण लागरे सैं ।
धमलो(कांपते हुए)
सारी सौड़ तो तनै खींच ली
मेरे ए दांत किट किटावैं सैं ।
[03/08, 7:13 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 900
डॉक्टर- जब तुम तनाव में होते हो क्या करते हो?
रमलू- जी, मंदिर चला जाता हूं...
डॉक्टर- बहुत बढ़िया, ध्यान-व्यान लगाते हो वहां?
रमलू- जी नहीं, लोगों के जूते चप्पल मिक्स कर देता हूं, फिर उन लोगों को देखता रहता हूं...
उननै तनाव मैं देख कै मेरा तनाव दूर होज्या सै ।
[04/08, 5:06 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 895
पल्स पोलिओ
पल्स पोलिओ टीम घर आयी…
रमलू (धमलो तैं ): बंदूक और कारतुस कित सैं …??
टीम भागी,
पीछे से रमलू नै रूक्का मारया ,
रुको
ओये रुको
ये म्हारे बालकां के नाम सैं .!!
[04/08, 5:12 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: वो तैरते तैरते डूब गये, जिन्हे खुदा का विश्वास था..
वो डूबते डूबते भी तर गये, जिन्हें खुद का अहसास था..!!
[04/08, 5:14 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 896
फोर-व्हीलर सै
पुलिस: बफैलो पर बैठे रमलू को
एक पुलिस वाले ने रोक कै बूझ्या
आपका हेलमेट कित है? फाइन लागेगा !!
रमलू : रे बावले नीचै देख फोर-व्हीलर सै .!!
[04/08, 5:18 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 897
एक बार एक हरयाणवी इंग्लिश सीखण UK म्है गया.
एक साल पाछै वो वापिस हरियाणा आया|
२-३ दिन पाछै उस धोरे फ़ोन आया और फ़ोन पे
एक आदमी बोल्या- मखा राम राम, | और सुना किम्मे
गाम की.......
हरयाणवी: who is Speaking ?
.
.
.
.
.
.
.
.
.
फ़ोन आला आदमी: रै पिछाणया कोणी के?
मैं बोलू सु
Anderson....UK से थारा ट्रेनर
😆😂😆😂
[04/08, 6:18 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 898
डॉक्टर--दर्द कहाँ है?
रमलू--फीस कम करदयो तो बताऊँ नहीं तो अपने आप टोहो।
[04/08, 6:24 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: रमलू-- जो दोस्त मनै रोज न्यू कहया करता अक भाई तेरे ताहिं तो ज्यान भी हाजिर सै।
कमलू--तो के होय्या उसकै?
रमलू-- उसकै तो के होना था।
आज वोहे मोबाइल मैं पासवर्ड टाईप करते हुया न्यों बोल्या," तूँ माड़ा परे नै देखिए।
[04/08, 6:24 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 899
[04/08, 6:32 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: टीचर-बच्चों तुम बड़े होकर क्या बनोगे?
पिंकी- मैं बड़ी होकै सीए बनूंगी। हमेशा हवाई यात्रा करूंगी, फाइव स्टार होटल मैं डिनर करूंगी,अर सबतें म्हंगी कर लयाऊंगी, अर
टीचर- बच्चो आप को इतना लम्बा जवाब नहीं देना, बस एक लाइन का जवाब हो।
रमलू, तुम बड़ी होकर क्या बनोगे?
रमलू- पिंकी का पति।
[04/08, 6:32 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 900
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