[16/07, 7:18 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 845
एक बै रमलू कमलू तैं बोल्या - चार इसे शहरां के नाम बता जो "पत" पै खतम होते हों ।
कमलू लाग्या आंगळियां पै गिणन अर बोल्या - सोनीपत, पानीपत, बाघपत अर खरखौदा ।
रमलू चक्कर में पड़-ग्या, बोल्या - भाई, बात समझ में कोन्यां आई, खोल कै बता - यो खरखौदा कित तैं आँन बड्या ?
कमलू बोल्या - "रै, उड़ै रामपत ब्याह राख्या सै, तनै नहीं बेरा के " !!
[17/07, 5:05 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 846
रमलू- आज बस मैं कंडक्टर नै मेरी बेइज्जती करदी।
धमलो-क्यूँ के बात हुई?
रमलू-मेरे बस तैं उतरते की साथ उसनै कहया- इब तीन सवारी इस सीट पै आ जाओ.
[17/07, 5:06 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 847
रमलू को फांसी की सजा सुनाई
गयी
.. जज ने पूछा- कोई आखिरी
ख्वाहिश?.
रमलू- जी सै ।
जज - क्या ❓❓
रमलू – मेरी जागां थाम लटक जाओ ।
दिखावे सैं दिखावे ।
[17/07, 5:10 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 848
ट्रैफिक इंस्पेक्टर रमलू नेशनल हाईवे पै एकला अपनी मोटरसाइकल पे बैठया था…!
उसे बख्त दिल्ली कांही तैं आंती हुयी एक कार नै बॉर्डर क्रॉस करया …!!
रमलू नै रुकण का इशारा करया …
और जब कार रुकी तो टहलता हुआ ड्राइवर की खिड़की पर दस्तक दिया…!
एक नवयुवक जो गाड़ी चला रहा था…
उसने शीशा नीचा कर सिर बाहर निकाल कर पूछा:
“क्या बात है इंस्पेक्टर…?”
रमलू नै एक झापड़ उसके गाल पर रसीद किया…
युवक: “अरे, मारा क्यों…?”
रमलू : “जब हरियाणा पुलिस का ट्रैफिक इंस्पेक्टर रमलू किसी गाड़ी को रुकण खातर कहता है…
तो ड्राइवर को गाड़ी के कागजात अपने हाथ मैं पकड़ें हुये होणा चाहिए…!”
युवक: “सारी इंस्पेक्टर…….
मैं पहली बार हरियाणा आया हूँ….!”
फिर उसने ग्लव कंपार्टमेंट से पेपर्स निकाल कर दिखाये..!
रमलू नै पेपर्स का मुआयना किया फिर बोल्या :
“ठीक सै ….राख ले ….!”
फिर घूमकर पैसेन्जर सीट की ओर गया और शीशा ठकठकाया…!!
पैसेन्जर सीट पर बैठा दूसरा युवक शीशा गिराकर सिर बाहर निकाल कर पूछा :-
“हाँ बोलिए….?”
तड़ाक…!
एक झापड़ रमलू नै उसकै भी जड़ दिया ..!
“अरे ….! मैंने क्या किया …?”
रमलू : “या तेरी हेकड़ी तारण की खातर …!”
युवक:- “पर मैंने तो कोई हेकड़ी नहीं दिखाई…?”
रमलू :- “इबै नहीं दिखाई, पर मैं जानूँ सूँ ….
एक किलोमीटर आगै जाकै तूँ अपने दोस्त तैं कैहन्ता --
“ओ दो कौड़ी का इंस्पेक्टर मेरै मारता …. तो बताता उसनै ….!”
[18/07, 6:36 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 849
एक बार रमलू अर कमलू , किसी बियर बार में बियर पीने गये। जब वह पीने लगे तो रमलू बोला, "लगता है बाहर बारिश हो रही है। तुम ऐसा करो घर जाकर जल्दी से छतरी ले आओ।"
कमलू गुर्राया: मुझे पता है मेरे जाने पर तुम मेरी सारी बियर पी जाओगे।
रमलू ने उसे यकीन दिलाया कि वो उसकी बियर नहीं पियेगा। उसके हिस्से की बियर ज्यों की त्यों रखी रहेगी।
कमलू यह सुनकर मान गया और छतरी लेने चला गया।
जब रात गहराने लगी पर कमलू छतरी लेकर नहीं लौटा तो बंता ने सोचा शायद रमलू घर पर ही रुक गया है और अब नहीं आएगा। यही सोच कर उसने कमलू का बियर वाला गिलास उठाया ही था कि बार के एक कोने की छोटी सी खिड़की से तेज आवाज आई, "अगर पीओगे तो मैं छतरी लेने नहीं जाऊंगा।"
[18/07, 7:42 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 850
रमलू और कमलू दोनों भाई एक ही क्लास में पढ़ते थे.
टीचर: तुम दोनों ने अपने पापा का नाम अलग-अलग क्यों लिखा?
रमलू: ताकि आप ये न कहो कि नककल मारी है!!!
[18/07, 7:43 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 851
दो किलो मटर
धमलो : अजी सुनते हो दो किलो मटर ले लूं ?
रमलू : हां, ले लो जो ठीक लग रहा है कर लो
धमलो : राय नहीं मांग रही आपकी, पूछ रही हूं कि छील लोगे इतने कि कम लूं ?
[18/07, 7:43 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 852
सेमेस्टर सिस्टम
शिक्षक: सेमेस्टर सिस्टम से क्या फायदे हैं, बताओ?
रमलू: फायदों का तो बेरा नहीं पर बेइज्जती साल में दो बार होज्या सै।
[18/07, 8:08 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 853
शर्म नीं आई
रमलू अपणी घरआली धमलो नै ल्याण खातर सुसराड चल्या गया | जद वो धमलो नै लेके अपणी सुसराड तै चाल्लण लाग्या तो उसकी सासू नैं जुहारी म्ह उस ताई दस रपिये दे दिए | घरां आयां पाच्छे रमलू धमलो गेल झगड़ा करण लाग्या अर कई देर ताहिं झगड़ता रह्या | आखिर मैं धमलो तंग होकै रमलू तैं बूझण लाग्यी, 'जी थाम मेरै गेल क्यान्तें झगड़ण लाग रह्ये सो?' रमलू छोह मैं आकै बोल्या, "तेरी मां नै शर्म कोणी आयी |" धमलो नै बूझ्या , ""किस बात की शर्म?" बोल्या, "मैं थाहरे घरां केले तो सो रपियाँ के लेकै गया पर तेरी मां नै जुहारी म्ह दस रपिये दे दिए |" धमलो तपाक तैं बोल्यी, "जी मन्ने न्यूं बताओ अक थाह्म ओड़े मन्ने लेण गए थे अक केले बेच्चण गए थे |"
[18/07, 8:09 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 854
नीम्बू पानी मैँ जीरा
ताऊ धारे के 6 छोरे थे | वे 6 के 6 जमां काले थे | एक बार वे सारे गाम के जोहड़ में नहाण लागरे थे | ताऊ धारे उन्ती देख देख कै राजी होरया था | ताऊ उन्ती देखदा देखदा अपणे धोरे खड़े रमलू ती बोल्या - "देख मेरे छोरे !", रमलू बोल्या - "हाँ ताऊ देखे, जणू नीम्बू पाणी में जीरे के बुँदे होए दाणे तैरण लाग रै सै |"
[18/07, 8:09 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 855
रमलू सबसे बड़ा चैलेंज क्या है?
कमलू : एग्जाम में पेपर खाली छोड़कर लास्ट में लिख देना..
….कि हिम्मत है तो पास करके दिखा!
[18/07, 8:09 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 856
एक दिन रमलू नै अपनी भाभी खूब पीटी । उसके चिल्लावण की आवाज सुन कै पड़ोसी देखण आगे अर रमलू तैं बूझण लागे अक के बात होगी , इतना क्यों मार रहे हो अपनी भाभी नै ?
रमलू (गुस्से में): भाईसाहब या मेरी पीठ पीछे छुप -छुप के रोज मेरे सभी दोस्तों गेल्याँ बाते करती है।
पडोसी: तुम्हे कैसे पता लगा?
रमलू : अरे मैं जब भी अपने किसी दोस्त तैं बूझूँ हूँ कि वो फ़ोन पै किस गेल्याँ बात कररया हैं, तो वो नयों ऐ कहवै है 'तेरी भाभी तैं '।
[19/07, 6:27 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 857
एक मुर्गी नै बाज़ तैं ब्याह कर लिया
मुर्गा: हम मरगे थे के ?
मुर्गी: मैं तो थारे तैं ए ब्याह करना चाहूँ थी पर मोम डैड
चाहवैं थे अक छोरा एयर फोर्स मैं हो.
[19/07, 6:30 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 858
कमलू - यार रमलू ये बापू हर नोट पै हंसते हुए क्यों पावैं सैं ?
रमलू - सीधी सी बात सै कमलू ,जै बापू रोवैंगे तो नोट भीज नहीं जागा ।
[19/07, 6:37 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 859
डेडी,
रमलू ,"डेडी, ज्यादा काबिल कौन है मैं या आप?"
डैडी, " मै, क्योकि मैं एक तो तुम्हारा बाप हुँ, दुसरे उम्र मे भी तुम से बडा हुँ और मेरा तजुर्बा भी तुम से ज्यादा है।"
रमलू , "फ़िर तो आप जानते होगें कि अमेरिका की खोज किस ने की थी? "
डैडी, "कोलम्बस ने की थी"
रमलू , "कोलम्बस के बाप ने क्यों नही की, उसका तजुर्बा तो कोलम्बस से कही ज्यादा होगा ?"
[19/07, 6:38 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 860
चीनी भाषा
कमलू नै रमलू तैं बूझ्या - के तूँ चीनी भाषा पढ सकै सै ?
रमलू बोल्या - हां , जै वा हिंदी अर अंग्रेजी मैं लिख राखी हो तै ....
[21/07, 7:12 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 861
टीचर-क्लाश में लड़ना क्यों नहीं चाहिए?
रमलू-- क्योंकि के बेरा इम्तिहान मैं कद किसकै पाछै बैठना पड़ज्या!
[21/07, 7:17 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: धमलो- सुनिए! मेरे बाबू नै मेरे ताहिं नया मोबाइल खरीद क़ै दिया सै!
रमलू--वाह! कौनसी कम्पनी का सै?
धमलो-लावारिस!
रमलू- अरै वा लावारिस नहीं
लावा आइरिस सै!
[21/07, 7:35 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 863
मास्टर जी एक होटल में खाली कटोरी में रोटी डुबो डुबो कै खावण लागरे थे।
रमलू वेटर नै बूझ लिया- मास्टर जी खाली कटोरी मैं क्युकर खावण लागरे सो?
मास्टर जी बोले- भाई हम गणित के मास्टर सां, दाल हमनै मान ली अक वा सै!
[21/07, 7:39 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: या दुनिया घणी जालिम बताई, माड़ा बच कै रेहना पड़ैगा
इसनै बस थोबड़ा सुथरा चाहिए, माड़ा सज धज कै रेहना पड़ैगा
[21/07, 3:19 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 864
रमलू: मैं तेरा दोस्त नहीं बण सकता,म्हारे घरके छोह मैं आवैं सैं
धमलो: म्हारे घरक्या नै तो जणु आश्की का डिपलोमा करवा राख्या सै!
[21/07, 3:22 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 865
रमलू--के मैं आड़े एक सिगरेट पी सकूं सूँ?
स्टेशन मास्टर--नहीं ! यहां सिगरेट पीना सख्त मना सै।
रमलू--फेर आड़े इतने सिगरेट के टुकड़े क्यों पड़े सैं ?
स्टेशन मास्टर--ये इन लोगां नै फैंके सैं जो बूझते ए कोण्या ।
[21/07, 3:25 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 866
कौरव 100 थे,
ठीक है!
जब *100 वां* पैदा हुआ तब ,
पहले कौरव की उम्र क्या थी???
छुट्टी के दिन
पडे़-पडे़ दिमाग मे आ गया था तो सोचा विद्वानों से पूछ ही लूँ
😎
[21/07, 3:26 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 867
एक साधू बिजली ठीक कर रहा था,
अचानक उसे करंट लगा...!!!
साधू - हर-हर गंगे, हर-हर गंगे..!!
रमलू - और ले-ले पंगे, छू ले तार नंगे...!!!
[21/07, 3:28 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 868
डाकू (लड़की से) - तेरा नाम क्या है लड़की?
लड़की - सपना
डाकू - सपना तो मेरी एक फेसबुक फ्रेंड का नाम भी है! जा तुझे माफ किया।
डाकू (रमलू से) - तेरा नाम क्या है लड़के?
रमलू - नाम तो मेरा रमलू है, पर प्यार से लोग मुझे भी सपना कहते हैं!
[21/07, 3:30 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 869
रमलू जंगल से जा रहा था,
अचानक भालू देखकर सांस रोककर जमीन पर लेट गया...
.
.
.
ये देखकर भालू आया और उसके कान में बोला -
भूख नहीं है, वरना सारी होशियारी निकाल देता!!!
[22/07, 6:13 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 870
कमलू- मेरी घड़ी खो गई।तनै देखी के रमलू?
रमलू-नहीं। चलती थी या बन्द थी?
कमलू- चलती थी।
रमलू- फेर तो जरूर कितै चाल कै गई होगी.
[22/07, 6:38 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 871
मोराँ नै दाणे
रमलू अपनी चौपाड़ मैं झोला लेकै बैठ्या था अर बैठ्या बैठ्या झोले मैं हाथ घालकै थोड़ी थोड़ी हाण मैं हाथ बहार काढ कै मुठी खोल्लन लाग रया था । साहमी खड्या खड्या कमलू देखै था वो उसके धोरै जा कै बोल्या --रमलू के करण लागरया सै इतनी वार होली ? रमलू बोल्या --कमलू मैं तो मोरां नै दाणे खुवावन लागरया सूँ । कमलू-- आडे मोर कित सैं ? रमलू बोल्या--न्यूँ तो कमलू मेरे पै दाणे बी कोन्या फेर मुफ्त का पुन्न कमावण मैं के हर्जा सै ?
[22/07, 6:39 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 872
थप्पड़ क्यूं मारे ?
रमलू अपने याड़ी कमलू तें फेटन रोहतक चलया गया । एड्रेस का बेरा कोन्या भाई नै । फोन करकै बूझन खातर एक अस टी डी की दूकान पै गया आर जानते की साथ दो थप्पड़ जड़ दिए दूकानदार कै । दूकानदार नै पुलिस बुला ली । पुलिसिया नै बुझी क्यों मारे थप्पड़ ?रमलू बोल्या --थानेदार साहब ! इसमें मेरा के कसूर सै ,इसनै ऐ अपनी दुकान कै महं लिख राख्या सै अक फोन मिलावान तैं पह्ल्याँ दो लगाओ ।
[22/07, 6:45 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 873
चूहा-पार्टी में चार पैग लगाकै मस्त था।
बिल्ली-आज पार्टी ना होती तो मैं तनै खा जाती।
चूहा- चली जा ना तै लोग कहेंगे नशे में औरत पै हाथ ठा दिया ।
[22/07, 6:47 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 874
रमलू (बीबी को मायके में फोन पर कहता है ) —
अपना ध्यान रखना, सुना है बहुत डेंगू फैल रहा है ।।।
धमलो (सिर पकड़ के)–
मेरा सारा खून तो थामनै पी लिया, मच्छर के “रक्त दान” करण नै आवैगा??
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